भक्ति और भावना से महका भिलाड़ — पंचधातु श्री शीतलनाथ भगवान की प्रतिष्ठा में उमड़ा श्रद्धा का सागर
भिलाड़, विशेष संवाददाता — जहाँ भलाई होती है, वहाँ भगवान स्वयं पधारते हैं; और जहाँ बुराई होती है, वहाँ से भगवान वहा से चले जाते हैं आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा के इन गूढ़ वचनों की अनुभूति तब हुई जब भिलाड़ नगर का फूल-प्रशांतपूजा जैन मंदिर प्रभु श्री शीतलनाथ भगवान की पंचधातु से निर्मित, शिल्पयुक्त, परिकर सहित प्रतिमा की प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन का साक्षी बना। यह कोई सामान्य अनुष्ठान नहीं था, बल्कि श्रद्धा, शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नयन का अनुपम संगम था, जिसमें धर्म, दर्शन और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। पूज्य राडपट्टी के धर्मसूर्य आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा, आचार्य श्री भाग्ययशसूरीजी म.सा., आचार्य श्री भव्ययशसूरीजी म.सा. एवं ह्रींकारयशसूरीजी म.सा. सहित अनेक गुरुभगवंतों की उपस्थिति में यह प्रतिष्ठा महोत्सव एक आध्यात्मिक पर्व बन गया। मंडप में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेवों के प्रवचनों से अपने हृदय को पावन किया, जिनमें यह संदेश बार-बार प्रतिध्वनित होता रहा कि मोती की उत्पत्ति सदैव शुद्ध और योग्य स्थलों पर होती है नालियों, खड्डों और गंदगी...