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भक्ति और भावना से महका भिलाड़ — पंचधातु श्री शीतलनाथ भगवान की प्रतिष्ठा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

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  भिलाड़, विशेष संवाददाता — जहाँ भलाई होती है, वहाँ भगवान स्वयं पधारते हैं; और जहाँ बुराई होती है, वहाँ से भगवान वहा से चले जाते हैं  आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा के इन गूढ़ वचनों की अनुभूति तब हुई जब भिलाड़ नगर का फूल-प्रशांतपूजा जैन मंदिर प्रभु श्री शीतलनाथ भगवान की पंचधातु से निर्मित, शिल्पयुक्त, परिकर सहित प्रतिमा की प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन का साक्षी बना। यह कोई सामान्य अनुष्ठान नहीं था, बल्कि श्रद्धा, शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नयन का अनुपम संगम था, जिसमें धर्म, दर्शन और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। पूज्य राडपट्टी के धर्मसूर्य आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा, आचार्य श्री भाग्ययशसूरीजी म.सा., आचार्य श्री भव्ययशसूरीजी म.सा. एवं ह्रींकारयशसूरीजी म.सा. सहित अनेक गुरुभगवंतों की उपस्थिति में यह प्रतिष्ठा महोत्सव एक आध्यात्मिक पर्व बन गया। मंडप में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेवों के  प्रवचनों से अपने हृदय को पावन किया, जिनमें यह संदेश बार-बार प्रतिध्वनित होता रहा कि मोती की उत्पत्ति सदैव शुद्ध और योग्य स्थलों पर होती है  नालियों, खड्डों और गंदगी...

सिंदूरी पराक्रम ( काल्पनिक ) प्रेरक कथानक:- अशोक दोशी

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  गांव में चुप्पी व सन्नाटा था,जन लोक समाज में परस्पर खुसर फुसर चल रही थी , कैसे कहना, कैसे उनके घर जाना, कैसे बात  करना , रेशमा व परिवार को कैसे  समझाना, क्या गुजरेगी उनपर ,बस और बस केवल वो ही बातें!!! चुंकि  नवपरिणीत सैनिक शमशेर सिंह  दस दिन  पहले ही ड्यूटी पर गया और सीमा पर आतंकी मुठभेड़ में,लड़ते लड़ते  शहीद जो हो गया था। शमशेर सिंह की शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे, उधर शमशेर सिंह की नवौढा  रेशमा  रसोई घर में खाना  बना रही थी, होगा कोई समय दस साढ़े दस का, टीवी पर समाचार चल रहें, शमशेर सिंह व गांव का  नाम सुनते ही भौंचक्की हुई रेशमा के मन  पर एक बार के लिए गहन मायूसी छा गयी, मातम प्रसरे उससे पहले रेशमा संभल कर चौकन्नी हो गयी,   टीवी बंद कर दिया, मन ही मन मन को मना लिया की शमशेर देश के लिए शहीद हुए हैं , मरे नहीं है । हिम्मत संजो  कर रेशमा सहज व अनजान बनी रही, जैसे  कुछ हुआ ही नहीं, डोर बेल भी बंद कर दी, मोबाइल  साइलैंट मोड़ पर रख लिया , पता था लोग बाग तो आएंगे,  रेशमा को सब बातों का एक पल में ...

आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी के सान्निध्य में हुआ प्रभु शीतलनाथ का भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव

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वापी । धर्म की पवित्र भूमि पर उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा की लहर दौड़ गई जब मुंबई हाईवे टच स्थित हृदयस्पर्शी विहारधाम – गिरनार धाम के उद्घाटन हेतु पधारे  पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद विजय यशोवर्म सूरीश्वरजी महाराजा  ने वापी में प्रभु प्रतिष्ठा का पावन कार्य संपन्न कराया। श्री अजितनाथ दादा के दर्शन के पश्चात पूज्य गुरुदेव ने श्री गुरुलब्धि चौक से प्रभु शीतलनाथ दादा की तेजस्वी स्फटिक मूर्ति को शोभायात्रा के साथ वापी के ऋषभ हाइट्स स्थित श्री हर्षाकिशोर शाह के गृह मंदिर तक  शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़, प्रभु भक्ति के गीतों और घोषणाओं से गूंजता वातावरण, और प्रभु के प्रति छलकता जनजन का समर्पण – यह सब दृश्य एक आध्यात्मिक पर्व बन गए। गृह मंदिर में हुई प्रतिष्ठा पूरे वैभव और धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। गुरुदेवश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि "जब प्रभु घर में आते हैं तो वह घर मंदिर बन जाता है, और जब प्रभु मन में आते हैं तो वह मन मंदिर। जिस मन में प्रभु का वास हो, वहां विकार, अहंकार और प्रपंच नहीं टिकते। जैसे सूर्य के आने से अंधकार मिट जाता है, वैस...

कुछ लोग इतिहास लिखते हैं, कुछ इतिहास बनते हैं। और कुछ ऐसे होते हैं जो बिना नाम के, बिना चर्चा के, इतिहास की दिशा मोड़ देते हैं। अजीत डोभाल उन्हीं में से एक हैं।

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साल 1945, उत्तराखंड की शांत और ऊँची पहाड़ियों के बीच एक छोटे से गाँव में एक बालक ने जन्म लिया। उस बालक का नाम रखा गया अजीत। एक साधारण परिवार में जन्मा यह बालक असाधारण नियति लेकर आया था। उसकी आँखों में एक अलग चमक थी। वो आँखें न कभी डरती थीं, न रुकती थीं। उनमें देश को भीतर तक देखने की दृष्टि थी। बहुत कम उम्र में उसने वह कर दिखाया जो बहुतों का सपना होता है। केवल 22 वर्ष की आयु में UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। लेकिन अजीत डोभाल के लिए यह कोई मंज़िल नहीं थी। यह तो मात्र एक रास्ता था, देश सेवा की उस यात्रा का जो उसे वहाँ तक ले जानी थी जहाँ आम इंसान सोच भी नहीं सकता। 1971 में केरल में जब सांप्रदायिक तनाव चरम पर था और पूरा प्रशासन असहाय था, तब एक दुबला-पतला अधिकारी, बिना किसी हथियार के, अकेले भीड़ में उतर गया। उसने गोली नहीं चलाई, धमकी नहीं दी, बस बात की, समझाया, और कुछ ही दिनों में वहाँ शांति लौट आई। किसी ने पूछा यह कौन है, उत्तर मिला अजीत डोभाल। उसके बाद उन्होंने जिस मोर्चे को छुआ, उसे शांत कर दिया। मिज़ोरम के विद्रोही जंगलों में जब लालडेंगा के संगठन ने भारत के ख...

"भगवान तीनों लोकों में मिल सकते हैं, परंतु सच्चे गुरु इसी लोक में मिलते हैं – और वह भी किसी-किसी को ही मिलते हैं।" – आचार्य श्री यशोवर्मसूरीजी म.सा.

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  भगवान तो तीनों लोकों में मिल सकते हैं, परंतु सच्चा गुरु इस लोक में ही मिलता है – और वह भी किसी-किसी सौभाग्यशाली को ही।” इस वाक्य को चरितार्थ करता हुआ एक  आयोजन, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतों और नदियों के मध्य, एन.एच. 48 पर स्थित (वापी अवध) श्री बगवाड़ा प्राचीन जैन तीर्थधाम में संपन्न हुआ। यहाँ आयोजित हुआ पाँच दिवसीय “श्री लब्धि-विक्रम कुमार संस्कार शिविर (L.V.K.S)” , जो केवल एक शिविर नहीं, अपितु जीवन की दिशा बदल देने वाला एक भावनात्मक और आध्यात्मिक शिविर सिद्ध हुआ। इस शिविर के पाँच दिन बच्चों और युवाओं के लिए आत्ममंथन, अनुशासन और आत्मबल के दिवस बने। यहाँ सहभागी बालकों ने जीवन के श्रेष्ठतम संकल्प लिए  प्रभु पूजा को नित्य नियम बनाना, रात्रि भोजन का त्याग करना, कंदमूल और व्यसनों से दूरी बनाना, मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से बचना और सबसे बड़ी बात  अपने जीवन को गुरु मार्गदर्शन से जोड़कर विहार में पूज्य गुरुदेव के साथ जीवन जीने की भावना रखना। यह सब कुछ मात्र प्रवचन या परामर्श नहीं था, बल्कि उनके हृदयों की पुकार थी, जो पूज्य गुरुदेव की पावन प्रेरणा से जागृत हुई। शिव...

BSF जवान पूर्णम कुमार की सकुशल वापसी: अटारी बॉर्डर पर हुआ शांतिपूर्ण आदान-प्रदान, पत्नी बोलीं - "अगर मोदी हैं, तो सब मुमकिन है"

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  बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम कुमार साहू की सकुशल वापसी ने पूरे देश को राहत की सांस दी है। लगभग तीन हफ्तों तक पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में रहने के बाद आज, 14 मई 2025 की सुबह 10:30 बजे, उन्हें अटारी, अमृतसर स्थित संयुक्त चेक पोस्ट (Joint Check Post) पर भारत को सौंप दिया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और तय प्रोटोकॉल के अंतर्गत संपन्न हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले को उच्च स्तर पर लगातार फॉलो किया जा रहा था और भारतीय एजेंसियों के प्रयासों से यह वापसी संभव हो पाई। पूर्णम साहू की पत्नी रजनी साहू, जो पश्चिम बंगाल में रहती हैं, अपने पति की वापसी की खबर सुनकर बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "अगर प्रधानमंत्री मोदी हैं, तो सब कुछ मुमकिन है।" रजनी ने यह भी याद किया कि जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, तो मात्र 15-20 दिनों के भीतर भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के ज़रिए कई परिवारों के ‘सुहाग’ का बदला लिया। और उसी संकल्पशक्ति के साथ, मेरे पति को भी वापस लाया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री को हाथ जोड़कर दिल से धन्यवाद व्यक्त किया। स...

#इन्सान_का_स्वभाव :- छगनलाल मूथा

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  खुश रहना अपने जीवन में, जो भी तूने बिन मांँगे पाया। फिर क्यों कोसें उस  ईश्वर को, जो सारी सृष्टि में समाया। जब भी मिली तूझे खुशी तरक्की, याद नहीं उसे कर पाया।  जब भी आया दुःख या विपदा, उसी को तूने मोहरा बनाया। नहीं तूझे कोई सहनशक्ति,  नहीं तूझे कोई सच्ची भक्ति। अपनी गरज के हिसाब से,  ही करता है दीया अगरबत्ती। भले लगाओ तख्ती नाम की, समाज के उद्धार का सोचो। जो असहाय निर्धन समाज में, उनको जाकर के खोजो। मन में रखना दान दया का, जीवन सफल हो जायेगा। अपने हाथों से कर ले दान तू, वरना पीछे पछतायेगा। धन दौलत कोठी बंगला मुथा,  कोई साथ न आयेगा। मेरा मेरा करते करते बंदे, राम नाम सत्य हो जायेगा। ***************************************" *कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव* *मुम्बई*

निजीकरण से लाभ या हानि :- दिनेश दोशी

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जिस देश में डाकखाने(पोस्ट ऑफिस) का पार्सल 15 से 20 दिन में और कूरियर 2 दिन में आता है,एवं जिस देश में पिज्जा 30 मिनट में आता है और एम्बुलेंस 3 घण्टे में वहाँ निजीकरण ही एकमात्र समाधान है निजीकरण (privatisation) की सबसे बड़ी बुराई यह है कि,इसमें वेतन के बदले काम करना पड़ता है प्राइवेट नोकरी में 10से 15हजार कमानेवाले कभी हडताल पर नही जाते, लेकिन 80 से 90 हजार कमानेवाले सरकारी दामादों का पेट कभी नहीं भरता है,इसलिये बार बार हड़ताल पर जाते है,यही कारण है कि निजीकरण जरूरी है 60 हज़ार की सरकारी सेलरी किसी एक को देने की बजह, 20-20 हज़ार के 3 कर्मचारी रखे जाये,तो काम भी जल्दी होगा और बेरोजगारी भी कम होगी,इसलिए निजीकरण जरूरी है और लोग कह रहे है कि निजीकरण करके सरकार देश बेच रही है ऐसा लग रहा है कि कुछ लोगों के दर्द तो पेट में है और माथा कूटा जा रहा है अगर बेलगाम घोड़े की नकेल को बराबर ना कसा गया तो वही घोड़ा लात मारकर आपको घायल कर सकता है इसीलिए भारत जैसे देश में निजीकरण की लगाम को थामना बहुत ही जरूरी है _ *✍🏼.........दिनेश दोशी*_

*मदुरै के होनहार छात्र लक्ष पारसमल जैन ने 12वीं CBSE बोर्ड परीक्षा में 97% अंक हासिल कर रचा कीर्तिमान, अब लक्ष्य है चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA)*

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*मदुरै:-* सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं। इस बात को सच कर दिखाया है वेल्लामाल विद्यालय, मदुरै के छात्र लक्ष पारसमल जैन ने, जिन्होंने 12वीं CBSE बोर्ड परीक्षा में 97% अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की है। उनके इस शानदार परिणाम ने न केवल उनके परिवार और स्कूल को, बल्कि पूरे जैन समाज और मदुरै शहर को भी गर्व महसूस करवाया है। लक्ष की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति गंभीरता है। उन्होंने हर विषय में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए यह दिखा दिया कि अगर मन में लगन हो, तो कोई भी मुकाम पाना मुश्किल नहीं होता। विद्यालय के शिक्षकों और प्रशासन ने लक्ष की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। उनके पड़ोसी और परिवारजन भी बताते हैं कि लक्ष शुरू से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाले, शांत स्वभाव और एकाग्रचित्त छात्र रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि लक्ष अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने की तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने यह ठान लिया है कि वे इस क्षेत्र में भी उत्कृष्टता हासिल करेंगे और देश व समाज के लिए एक यो...

भारत में सबसे अधिक ट्रेन आगमन और प्रस्थान वाला रेलवे स्टेशन हावड़ा जंक्शन

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हावड़ा जंक्शन :- भारतीय रेल की रफ्तार, इतिहास और भावना का प्रतीक भारतीय रेल केवल पटरियों पर दौड़ती हुई ट्रेनें नहीं हैं, यह वह धड़कन है जो देश के हर कोने को जोड़ती है। यह करोड़ों लोगों की आशाओं, सपनों और संघर्षों का सहयात्री है। इसी अपार नेटवर्क के हृदय में स्थित है हावड़ा जंक्शन, एक ऐसा नाम जो सिर्फ स्टेशन नहीं, बल्कि भारत के रेल इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यह वह स्थान है जहाँ हर दिन यात्राएं नहीं, कहानियाँ जन्म लेती हैं। जहाँ हर सीटी के साथ कोई बिछड़ता है, कोई जुड़ता है, और कोई नया सपना बुनता है। हावड़ा जंक्शन, कोलकाता की आत्मा से जुड़ा हुआ स्टेशन, भारतीय रेलवे का सबसे व्यस्त और सबसे महत्वपूर्ण केन्द्र है। यहां प्रतिदिन एक हजार से अधिक ट्रेनों का आगमन और प्रस्थान होता है। यह आंकड़ा हावड़ा को केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में अग्रणी स्थान दिलाता है। लाखों यात्रियों की चहल-पहल, प्लेटफॉर्म पर गूंजती घोषणाएं, और गाड़ियों की लगातार आवाजाही इसे एक निरंतर गतिशील संसार बना देती है। 1854 में जब पहली बार हावड़ा से रेलगाड़ी रवाना हुई थी, तब शायद ही किसी ने कल्पन...

_विश्वमंच पर छा गई मोदी तेरी डिप्लोमेसी_:- दिनेश दोशी

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 _विश्वमंच पर छा गई_  _मोदी तेरी डिप्लोमेसी_ _दूरदृष्टि से काम लिया_ _पाक की बढ़ाई बेबसी_ _मुश्किल हालात में लिए_ _फैसले तूने सब ठोस_ _कूटनीति से बन बैठा_ _लाहौर कराची का बॉस_ _विश्वपटल पर चल रहा_ _मोदी तेरा ही सिक्का_ _तेरी चाल से दुश्मन भी_  _रह गया हक्का बक्का_ _सारे जहान में बज रहे_  _मोदी तेरे डंके_ _सेना भी लोहा मान रही,_   _खुश है रण बंके_  _दुनिया दीवानी हो गई,_ _हो गए वारे न्यारे_ _कूटनीति के जाल में,_ _फंसे विरोधी सारे_ _जाबांजी तेरी छा गई_ _पूरी दुनिया दे रही दाद_ _रूस यूएस को भी चखाया_ _तूने तेरी नीति का स्वाद_ _ये तो अभी एक ट्रेलर है_ _असली फिल्म बाकी है_ _आगे आगे देखते जाओ_  _देखनी असली झांकी है_ _✍🏻दिनेश दोशी_

अचूक हमारे निशाने है.....:- अशोक दोशी

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  टिके नहीं  विमान वो उसके,   अचूक हमारे निशाने है ।  युद्ध अभ्यास व रणनीतियाॅं ,     यौद्धा  जाने माने है ।।   प्रदर्शन बेमिसाल अद्भुत,      जांबाज वे लड़ाके है ।  घर में घुस कर मारे उनको,     दहके सभी इलाके हैं ।।    संबल देता परिवारों को,       जो मोर्चा संभाले है ।   काम आये  देश के खातिर ।    जोखिम निज  पे डाले है।।    अटल इरादे अडिग हौसले,      प्रशासन की खुमारी है।      पड़ते हैं दुश्मन पे भारी,        नहीं रखी  लाचारी है।।   यदि रखें घुस पेट  जो जारी,        हम उसे नहीं छोड़ेंगे ।     छेड़ेगा यदि वो वापस तो,        उसको मार मरोडेंगे।।  अदम्य साहस साहसियों का,     जो जलवा दिखलाया है।      कई बार नापाक पडौसी          मार मुंह की खाया है।। स्वरचित: अशोक दोशी

खुशियों में भी इनकी मौजूदगी हो :- दिनेश देवड़ा धोका

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  जब भी देश पर कोई मुसीबत आती है  कहीं बाढ़ आ जाए, भूकंप से ज़मीन हिलने लगे, दंगे भड़क उठें, कोई बच्चा बोरवेल में गिर जाए या फिर दुश्मन सीमा पर हमला कर दे  तो सबसे पहली आवाज़ उठती है, "सेना को बुलाओ!" क्योंकि हमें पता है, जब हर रास्ता बंद हो जाता है, जब हर उम्मीद कमजोर पड़ जाती है, तब भारतीय सेना सबसे पहले खड़ी मिलती है। वो बिना कोई सवाल किए, बिना थके, बिना रुके डटी रहती है  हमारे लिए, इस देश के लिए। लेकिन जब बात आती है खुशी की, कोई उद्घाटन हो, मंच सजाया जाए, पुरस्कार बांटे जाएं या रिबन काटा जाए, तो हम किसे बुलाते हैं? फिल्मी सितारे, नेता, सेलिब्रिटीज  जिनके लिए ये सब बस एक और इवेंट होता है। और उस फौजी का क्या? जिसने हमारे चैन की नींद के लिए अपनी रातें जगा दीं। जिसने त्योहारों की मिठास छोड़कर बारूद की बू में वक़्त बिताया। जो रक्षा बंधन पर बहन से मिलने नहीं आ सका क्योंकि उसे सरहद की रक्षा करनी थी। जो होली की रंगत छोड़कर बर्फ की सफेदी में तैनात रहा। और सिर्फ वही नहीं, उसका परिवार भी। वो मां, जो सालों से बेटे को गले लगाए बिना बस तस्वीर से बातें करती है। वो पत्नी, ज...

अहमदाबाद में भव्य तिरंगा यात्रा: मुख्यमंत्री पटेल ने किया नेतृत्व

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  अहमदाबाद, 13 मई 2025  भारतीय सेना की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मिली बड़ी सफलता के उपलक्ष्य में सोमवार को अहमदाबाद में एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा देश के वीर जवानों को सम्मान अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी। यात्रा की शुरुआत वाडज क्षेत्र की व्यासवाड़ी से हुई, जहां भगवान परशुराम की प्रतिमा के सामने से हजारों लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर देश के प्रति अपना प्रेम प्रकट किया। यात्रा सुभाष चंद्र बोस सर्कल पर समाप्त हुई, जहां मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस यात्रा में स्कूली बच्चे, साधु-संत, व्यापारी, सामाजिक संगठन, गुजरात चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI), रेड क्रॉस सोसाइटी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और नागरिकों की भारी भागीदारी रही। मुख्यमंत्री पटेल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, "ऑपरेशन सिंदूर हमारी सेना की बहादुरी और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। भारत अब आतंक के खिलाफ चुप नहीं बैठता, बल्कि हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देता है।" यात्रा में मंत्री जगदीश विश्वकर्मा...

गर्मियों की यादगार छुट्टियाँ: महाबलेश्वर और पंचगनी की गोद में बसे शिवाजी सदन विला का अनुभव

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  हर साल गर्मियों की छुट्टियों का बेसब्री से इंतज़ार होता है, लेकिन इस बार की छुट्टियाँ कुछ अलग ही रंग लेकर आईं। हम चार कपल अपने बच्चों के साथ 2 may  2025 को चार दिन के प्रवास पर  जब पंचगनी और महाबलेश्वर की ओर निकले, तो मन में उमंगों की तरंगें थीं। यात्रा की असली खूबसूरती तब सामने आई जब हमने अपना ठिकाना शिवाजी सदन विला में बनाया, जो इन दोनों पर्यटन स्थलों के बीच प्रकृति की गोद में बसा है। शिवाजी सदन विला न केवल जगह के लिहाज़ से आकर्षक था, बल्कि वहां का वातावरण भी अत्यंत सुकूनदायक था। पाँच बेडरूम और दो बड़े हॉल वाला यह विला पूरी तरह सुविधाओं से सुसज्जित था, जिसमें स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया था। विला का स्विमिंग पूल बच्चों के लिए उत्साह का केंद्र बना रहा, जहां हँसी-ठिठोली और मस्ती का दौर चलता रहा। वहां के केयर टेकर शिवाजी भैया की आत्मीयता ने इस प्रवास को और भी विशेष बना दिया। उनका व्यवहार इतना सरल और सहयोगपूर्ण था कि उन्होंने हमें अपने परिवार के सदस्य जैसा महसूस कराया। हमारी हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखा और बच्चों की इच्छाओं का भी पूरा सम्मान किया। उनकी देखरेख में...

मोकलसर स्टेशन पर चेन्नई–भगत की कोठी एक्सप्रेस के ठहराव की उठी मांग

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  श्रद्धालुओं की सुविधा, धार्मिक पर्यटन व क्षेत्रीय विकास को लेकर ग्रामीणों की एकजुट आवाज मोकलसर सिवाना। चेन्नई सेंट्रल से भगत की कोठी के बीच चलने वाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20625/20626) का ठहराव मोकलसर रेलवे स्टेशन पर करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। सिवाना उपखंड क्षेत्र सहित मोकलसर, रमणिया, बालवाड़ा, रायथल, भवरानी, खंडप, थापन, मुठली, पादरु, आसोत्रा, जसोल, बालोतरा, असाड़ा, टापरा आदि गांवों के ग्रामीणों ने एक स्वर में रेल प्रशासन से यह मांग रखी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कि रेलवे इसे गंभीरता से लेकर जनभावना का सम्मान करे। ग्रामीणों ने बताया कि मोकलसर स्टेशन के नजदीक  प्रसिद्ध धार्मिक स्थल असोतरा ब्रह्माजी मंदिर, जसोल माजीसा धाम,  हिंगलाज माता और श्री नाकोड़ा जैन तीर्थ जैसे स्थल स्थित हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचते हैं। विशेषकर दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में भक्त नाकोड़ा तीर्थ आते हैं। वर्तमान में उन्हें जोधपुर, लूणी या जालौर जैसे दूरस्थ स्टेशनों पर उतरकर सड़क मार्ग से लंबा सफर करना पड़ता है। यदि चेन्नई–भगत की कोठी ट्रेन का ठहराव मोकलसर पर हो जाता...

“जनसंख्या नहीं, जनाधार चाहिए!”

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  दिनेश देवड़ा धोका देश में कानून तो बहुत बनते हैं, लेकिन उनका असर सिर्फ उन पर पड़ता है जो कानून मानने की आदत रखते हैं। सरकार कहती है, जनसंख्या नियंत्रण ज़रूरी है। संसाधन सीमित हैं, इसलिए दो बच्चों से ज़्यादा हुए तो सरकारी नौकरी नहीं, स्थानीय चुनाव नहीं। सबने सर झुका कर स्वीकार भी कर लिया। लेकिन जैसे ही कोई ये बोले कि हमें विधायक बनना है, संसद में जाना है, तो वही सरकार कान में रुई ठूंस लेती है और आंखों पर काले चश्मे चढ़ा लेती है। फिर कोई बच्चा गिनने वाला नहीं रहता। परिवार जितना बड़ा, उतनी बड़ी उम्मीदवारी। पंचायत चुनाव के लिए दो बच्चों से ज़्यादा होना अपराध है, लेकिन लोकसभा में जाने के लिए बच्चे जितने ज्यादा हों, उतना ही नेता महान माना जाता है। सरकारी नौकरी के लिए अगर आदमी तीन बच्चों का बाप है, तो वो देश पर बोझ बन जाता है। पर वही आदमी अगर टिकट मांगता है, तो कहा जाता है कि देखो, ये तो खुद में एक चलता-फिरता वोट बैंक है। ऐसे उम्मीदवार की काबिलियत वोटों की संख्या से तय होती है, और उसका पूरा परिवार एक चुनावी अभियान की तरह व्यवस्थित हो जाता है। नेता जी के घर को देखिए, लगता है जैसे चुनाव...

पहलगाम हमले के बाद कराची बेकरी के नाम पर विरोध तेज: युवाओं ने की नाम बदलने की मांग

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हैदराबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद  देशभर में गुस्से और राष्ट्रभाव की लहर दौड़ पड़ी है। इसी माहौल में हैदराबाद की प्रसिद्ध 'कराची बेकरी' एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है  इस बार उसके नाम को लेकर। युवाओं और विभिन्न संगठनों ने यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया है कि 'कराची' जैसा नाम, जो पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है, देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब पूरा देश आतंकी घटनाओ के प्रति संवेदना और गुस्से से भरा है, पाकिस्तान से जुड़ा कोई भी प्रतीक या नाम स्वीकार्य नहीं हो सकता। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रगौरव से जुड़ा मुद्दा है। “हमें ऐसे नामों की ज़रूरत नहीं जो हमें हमारे दुश्मन की याद दिलाएं,” एक युवा ने विरोध के दौरान कहा। नाम बदलना या नही यह उनका निजी निर्णय हो सकता है पर उधर, युवा वर्ग का मानना है कि बेकरी की पहचान उसकी गुणवत्ता से है, न कि नाम से। एक ग्राहक ने कहा, "अगर नाम बदलने से देश के लोगो की भावना को सुकून मिलता है, तो इसमें कोई नुकसान नहीं।...

माँ भारती के लाल की वाणी :- दिनेश देवड़ा धोका

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  दिनेश देवड़ा धोका न मिट सके जो इतिहास से,  वो जज़्बा हममें आज भी है, हर शत्रु की आँखों में खटकें,  वो रौब हमारी लाज भी है। ना झुकेंगे, ना रुकेंगे,  ना थकेंगे इस रणभूमि में, हर साँस तिरंगे की खातिर, हर श्वास बने आवाज भी है। बोलो जयघोष गर्जना से, रण का बिगुल बजा दो अब, माँ के चरणों में शीश धरे, तन-मन-धन सब अर्पण तब। धूल बने जो भारत को छूए, वह घमंड नहीं, धर्म हमारा है, भारत माँ की सेवा करना, सबसे ऊँचा कर्म हमारा है। वन्दे मातरम्! जय हिन्द, जय भारत!

मांँ की ममता का नहीं पार*:- *कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव*

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मांँ की ममता का नहीं पार,उसी ने दिया जीवन संवार। मांँ के आशीर्वाद से ही होगा,सबके जीवन का उद्धार। मांँ ने अपना दूध पिलाया, हमें जग में जीना सिखाया। रात रात भर जाग जागकर,लोरी गाकर हमें सुलाया। खुद गीली चादर पर सोई, हमको सुखे में सुलाया।  खुद भुखे रहकर उसी ने हमें पेट भरकर के खिलाया। हमारी ख़ुशी में ‌वो खुश थी, दुःख में हमारे रोई थी वो। नहीं उसे कभी दुःखी करना, हमारा ही हैं भरोसा जो। नहीं चाहिए धन दौलत मांँ को, उसे आदर मान चाहिए। आकर बैठे पास,बोले मीठे दो बोल,ऐसी संतान चाहिए। मांँ है गंगा,मांँ जमुना है,मांँ हैं सारी नदियों की धार। सारी पृथ्वी की सिंचाई करती, मांँ की ममता हैं अपार। धरती मांँ भी हमे  देती है,धन धान्य, पेड़ो की बहार। पेड़ों से ही आक्सीजन बनती, जिससे जिंदा सारा संसार। मांँ महालक्ष्मी,मांँ सरस्वती, मांँ अम्बे जग में तारणहार। जिनकी कृपा और दया दृष्टि से हो जाता सबका उद्धार। दूध दही और घी से होता है,शरीर में शक्ति का संचार। गौ माता के गोबर मुत्र से, होता कई रोंगो का उपचार। मातृभूमि हमारी भारत माता,  नमन करू मैं बारम्बार। जान से भी प्यारा वतन हमारा, वंदन करे हजारों...

ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने इतिहास नहीं, भविष्य लिखा

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  भारत-पाकिस्तान संबंधों के लंबे और उलझे हुए इतिहास में ऑपरेशन सिंदूर वह मोड़ बन गया, जहाँ प्रतीक्षा खत्म हुई और निर्णायक कार्रवाई का युग आरंभ हुआ। यह मात्र एक सैन्य मिशन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की वह पुकार थी, जिसने दशकों से चले आ रहे आतंक के विरुद्ध अब आर-पार की नीति को जन्म दिया। पाकिस्तान और POK में जिस प्रकार से भारत ने आतंकवाद के केंद्रों को जड़ से उखाड़ा, वह हमारे तीनों सैन्य अंगों  वायुसेना, थलसेना और जलसेना  की एकजुटता, सूझबूझ और अतुलनीय साहस का परिणाम है। भारतीय वायुसेना ने इस अभियान की पहली चिंगारी भरी। अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों ने जब रात के सन्नाटे को चीरते हुए पाकिस्तान की वायुसीमा में प्रवेश किया, तो उनकी सटीकता और साहस ने दुश्मन की पूरी एयर डिफेंस प्रणाली को ध्वस्त कर दिया। स्कैल्प और हैमर मिसाइलों के साथ की गई यह कार्रवाई मात्र 23 मिनट में पूरी हो गई, लेकिन इसने दशकों की आतंकवादी बुनियाद को हिला डाला। वायुसेना ने साबित कर दिया कि भारतीय आकाश अब केवल रक्षा का क्षेत्र नहीं, न्याय की चौखट भी है। थलसेना की भूमिका ने इस ऑपरेशन को रणनीतिक गहराई दी। सी...

ऑपरेशन सिंदूर :- दिनेश दोशी

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  कोई मामूली नहीं, ये है पीड़ा की आह, बहु,बेटी,माताओं की  टूटी हर एक चाह. चुन चुन कर मारेंगे  अब होगा महासंग्राम, दहशत के अड्डों का  करेंगे काम तमाम. मोदी नर मामूली नहीं, लेगा बदला घोर, पाक याद रखेगा सदा, मिट जाएगा सब जोर. जो बोले वो ना करे, न बोले वो करे काम, इज्ज़त का सवाल है   अब आर पार संग्राम. धुआं धुआं करेंगे पाक का, ईंट से ईंट बजाएंगे, तेरे ही घर घुसकर तेरी,  पच्छ लाल कर जाएंगे. दिनेश दोशी चेन्नई

ऑपरेशन सिंदूर — जब माताओं-बहनों के उजड़े सिंदूर का जवाब बना दुश्मन की बर्बादी का सूरज

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  6-7 मई 2025 की रात भारतीय इतिहास में सिर्फ एक सैन्य अभियान के रूप में नहीं, बल्कि स्त्रीशक्ति के प्रचंड प्रतिशोध के रूप में दर्ज हो गई। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित उन आतंकी ठिकानों को, जहाँ वर्षों से भारत के सपूतों के विरुद्ध षड्यंत्र रचे जा रहे थे, भारतीय सेना ने ऑपरेशन 'सिंदूर' के तहत नेस्तनाबूद कर दिया। लेकिन इस बार बंदूकें पुरुषों के कंधे से नहीं चलीं, इस बार निर्णय उन महिलाओं ने लिया जिनकी आँखों ने अपनों के तिरंगे में लिपटे शव देखे थे। इस बार युद्ध के मैदान में नेतृत्व किया देश की दो वीरांगनाओं ने , कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने। वे आतंकी जिन्होंने भारतीय महिलाओं की मांग उजाड़ी थी, जिन्होंने जवानों को शहीद कर स्त्रियों की दुनिया को शोक में डुबोया था, उन्हें इस बार उन्हीं स्त्रियों ने ऐसा उत्तर दिया, जो सदियों तक याद किया जाएगा। कर्नल सोफिया, जिनकी रणनीति से आतंकी बंकरों की नींव हिल गई, और व्योमिका सिंह, जिनके आदेश पर राफेल से निकली आग बरसी और दुश्मन के होश उड़ गए , दोनों ही भारत की नारी शक्ति की वह प्रतीक हैं, जो अब आँसुओं से नहीं, बारूद से ब...

गुजरात का केसर आम: मिट्टी की मिठास, मेहनत का मेवा, और स्वाभिमान की खुशबू

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गर्मी शुरू होते ही जैसे ही बाजारों में आमों की खुशबू उड़ती है, तो एक नाम सबसे पहले ज़ुबान पर आता है   गुजरात का केसर आम । अब ये कोई ऐसा-वैसा आम नहीं, ये तो वो फल है जो कहावत को सच कर देता है   “सौ सुनार की, एक लोहार की।” यानी जितने भी आम खा लो, एक बार केसर का स्वाद चख लिया, तो बाकी सब भुला बैठोगे। गिर की वादियों में पला-बढ़ा ये आम, कोई साधारण फल नहीं, ये तो मिट्टी की मिठास और मेहनत का मेवा है। इसकी केसरिया रंगत सूरज की पहली किरण सी लगती है और स्वाद ऐसा कि जुबान खुद कह उठे   “जो खाए, वो वाह-वाह करे; जो देखे, वो आह-आह करे।” गुजरात की यही धरती है, जहाँ से लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने एकता और अखंडता की मशाल जलायी, और आज इसी धरती पर उगता है ऐसा आम जो भारत को एक नई पहचान देता है। सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया, और आज गुजरात का केसर आम स्वाद के जरिए देश-विदेश में गुजरात की एक अलग ही छवि बना रहा है। “जैसी धरती, वैसी फसल”   ये कहावत यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा दिया, तो उसमें गुजरात के इस...

कदम नहीं रूकने दुंगा...:- स्वरचित:अशोक दोशी

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  सौगंध मुझे इस मिट्टी की     देश नहीं झुकने दुंगा मोदी जी की  जंगी घोषणा   कदम नहीं रूकने दुंगा।   दम  देश के जवानों में है,    जोश भरा जांबाजों में । सुदर्शन का सचोट निशाना     पैनी नजरें बाजों में।  दुश्मन  बुज़दिल पागल कपटी        खुद करता बरबादी है      हम लड़ते अपने भुज बल से           सिद्धांती सच वादी  है।       धर्म युद्ध अपनी नियती में,           कूट नीति से मारेंगे ।       जो भी होयगा विश्व हित में            उसको ही हम मानेंगे         सोच मत की  नहीं कूटेंगे ,          मजा तुमको चखायेंगे ।       परोक्ष हम अपरोक्ष रूप से ,          धूल तुमको चटायेंगे ।        स्वरचित:अशोक दोशी