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भीलड़ी, जालोर, समदड़ी के प्रवासी बंधुओं के लिए बड़ी राहत: दक्षिण भारत से सीधी रेल सेवा शुरू

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  भीलड़ी, जालोर, समदड़ी और आसपास के क्षेत्रों से दक्षिण भारत में बसे प्रवासी बंधुओं के लिए यह गर्मी राहत की सौगात लेकर आई है। चेन्नई, इरोड़, कोयंबटूर से सीधी रेल सेवा की शुरुआत कर दी गई है, जिससे हजारों प्रवासियों को अपने घर लौटने में सहूलियत मिलेगी। यह समर स्पेशल ट्रेन उन लोगों के लिए विशेष राहत लेकर आई है, जो दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से राजस्थान की यात्रा करते हैं। इस सेवा का लाभ केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में बसे प्रवासी बंधुओं के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। इन राज्यों में बसे हजारों राजस्थान प्रवासियों के लिए यह ट्रेन एक नई सुविधा के रूप में सामने आई है, जिससे वे अधिक सहजता से अपने परिवारों से जुड़ सकेंगे। इस सेवा की शुरुआत में जिन-जिन सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रवासी बंधुओं ने प्रयास किए हैं, वे धन्यवाद और बधाई के पात्र हैं। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि यह सुविधा शुरू हो पाई है। लेकिन यह केवल पहला कदम है—अब इसे नियमित सेवा में बदलना हमारा अगला लक्ष्य है। अब जरूरत है ...

जालौर किले के राई ने खोल दिए राज" JALOR FORT, SWARNGIRI FORT

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जालौर का किला – वीरता, बलिदान  और ‘राई का भाव’ की कहानी राजस्थान की धरती वीरता और बलिदान की कहानियों से भरी पड़ी है, लेकिन उनमें भी जालौर का किला अपने अभेद्य स्वरूप और गौरवशाली इतिहास के लिए विशेष स्थान रखता है। इसे "स्वर्णगिरि" या "गोल्डन माउंट" भी कहा जाता है। 13वीं शताब्दी में यह किला सोनगरा चौहान वंश के वीर शासक महाराज कान्हड़देव के अधीन था। उसी समय दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी साम्राज्य विस्तार नीति के तहत इस दुर्ग पर कब्जा करने की योजना बनाई। 1305 से 1314 तक अलाउद्दीन खिलजी ने बार-बार जालौर पर आक्रमण किया, लेकिन हर बार महाराज कान्हड़देव और उनके वीर सैनिकों ने अपने पराक्रम से उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। जालौर का किला अपने समय की सबसे मजबूत और अभेद्य किलाबंदी के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ तक कि खिलजी की विशाल सेना भी इस दुर्ग को सीधे बल प्रयोग से जीत नहीं सकी। लेकिन युद्ध में केवल शक्ति ही नहीं, छल और कूटनीति भी निर्णायक होती है – और यही छल एक ऐतिहासिक कहावत को जन्म देता है – "राई का भाव रात को बीत गया।" एक रात, जब जालौर में सन्नाटा...