पन्यास चंद्रशेखर विजय जी महाराज साहेब: एक युगप्रेरक व्यक्तित्व
गुरुमा को अवतरण दिवस पर सादर नमन पन्यास चंद्रशेखर विजय जी महाराज साहेब (18 फरवरी 1934 – 8 अगस्त 2011) का जीवन एक ऐसा आलोक स्तंभ था, जिसने धर्म, संस्कृति और समाज सेवा की राह को उजागर किया। उन्हें सम्मानपूर्वक "गुरुदेव" और "गुरुमा" के नाम से भी जाना जाता था। उनका जन्म विक्रम संवत 1990, फाल्गुन सुद 5 को मुंबई में हुआ। उनके माता-पिता सुभद्राबेन और कांतिलाल जीवातलाल प्रतापशी थे, जिनकी पारिवारिक जड़ें गुजरात के राधनपुर (बनासकांठा जिला) से जुड़ी थीं। जन्म के समय उनका नाम इंद्रवदन रखा गया था। बचपन से ही उनके भीतर आध्यात्मिकता और समाज के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। इंद्रवदन जी की शिक्षा मैट्रिक तक हुई, लेकिन उनकी दृष्टि संसार की भौतिक सीमाओं से परे थी। आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश उन्हें आचार्य प्रेमसुरी जी महाराज के चरणों तक ले गई। 15 मई 1952 (विक्रम संवत 2008, वैशाख वद 6) को मुंबई के भायखला स्थित मोतीशा जैन ऑडिटोरियम में उन्होंने जैन मुनि की दीक्षा ग्रहण की और उन्हें नया नाम मिला चंद्रशेखर विजय। उनके साधना-पथ की निष्ठा और विद्वत्ता को देखते हुए 2 दि...