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प्रतापगढ़ में 27 नवंबर को पहुँचेगी दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीजी की भव्य रथयात्रा

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  प्रतापगढ़ । ( दिनेश देवड़ा धोका ) प. पू. दादा गुरुदेव श्री राजेन्द्रसूरीजी म.सा. की वर्ष 2027 में मनाई जाने वाली 200वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में, प. पू. डॉ. लाभेश विजयजी म.सा. के मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से आगामी गुरुवार, 27 नवंबर को दादा गुरुदेव की भव्य रथयात्रा प्रतापगढ़ पहुँचेगी। रथयात्रा का आगमन श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर, तालाब परिसर में होगा, जहाँ गुरुदेव के जीवन, तप एवं योगदान से सम्बंधित चित्रों और पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे उद्घाटन के साथ किया जाएगा तथा लगभग 10:30 बजे पधारे हुए गुरु भक्तों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था रखी गई है। इस आयोजन के लाभार्थी जैन संगीतकार संघवी करनपुरिया परिवार हैं, जो जिनशासन के प्रति अपने गहरे अहोभाव, सेवा और समर्पण के लिए समाज में विशेष सम्मान रखते हैं। करनपुरिया परिवार द्वारा पूर्व में आयोजित छ: री पालित संघ एवं जिनशासन के अनेक आयोजित कार्यो  में अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी योगदान रहा है, जो उनकी धर्मनिष्ठा का स्पष्ट प्रमाण है। रथयात्रा समिति एवं लाभार्थी परिवार ने समाजजनों से आग्रह कि...

पालिताना में उपधान तप की भव्य शोभायात्रा, बुधवार को होगा मोक्षमाला विधान*

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  पालिताना ( दिनेश देवड़ा धोका ) पालिताना गिरिराज की पावन भूमि पर प. पू. कल्याणरत्न विजयजी म.सा. की निश्रा में कस्तूरधाम में चल रहे उपधान तप की पूर्णाहुति पर मंगलवार, 25 नवंबर को तपस्वियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें आगे सजाई गई बग्गी में जैन ध्वजा और मोक्षमाला की सुंदर झांकी थी, तथा पीछे-पीछे विभिन्न बग्गियों में तपस्वी रत्नों का तेजस्वी स्वरूप सबको भावविभोर कर रहा था। कई प्रकार के बैंड की मंगल धुनों के साथ यात्रा घाटी दरवाजा, मुख्य बाजार और धार्मिक गलियों से गुजरती हुई आगे बढ़ी, जहां श्रावक-श्राविकाओं ने अक्षत से वधामना कर तपस्वियों का सम्मान किया और साधु-साध्वी भगवंतों की उपस्थिति ने पूरे माहौल को और भी पवित्र बना दिया। स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका इस आयोजन में उपस्थित थे, जिन्होंने यह जानकारी देते हुए बताया कि शोभायात्रा का हर दृश्य न सिर्फ भक्ति से भरा था बल्कि तप की अद्भुत शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव करा रहा था। यात्रा कस्तूरधाम लौटकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और अब बुधवार, 26 नवंबर को सभी उपधान तपस्वियों के मोक्षमाला विधान को लेकर समाज में विशेष उत्साह और श्रद्...

चारित्र भाई, दीपिका बेन और बाल मुमुक्षु शाश्वत की विदाई* *धर्म की ध्वनि से गूंजा शाहिबाग*

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  अहमदाबाद शाहिबाग की धरती आज सचमुच धर्म और भावनाओं से भर उठी, जब 30 नवंबर को सिद्धवड पालिताना में दीक्षा लेने वाले गढ़ सिवाना निवासी अहमदाबाद प्रवासी बागरेचा परिवार के रत्न तीनों मुमुक्षु चारित्र भाई, दीपिका बहन और बाल मुमुक्षु शाश्वत भाई की बंदौली 22 नवंबर को उनके घर से निकली और पूरे इलाके में भक्ति का माहौल छा गया। गिरधर नगर संघ के आदि सुराज बैंड की धुनों के साथ चलती यह यात्रा किसी आम शोभा यात्रा जैसी नहीं लग रही थी, बल्कि ऐसा लगा जैसे पूरा शहर संयम की एक पवित्र यात्रा में शामिल हो गया हो। जसुद बाई चौक पर जब इस बंदौली का समापन्न और भावुक विदाई समारोह हुआ, तब तीनों मुमुक्षुओं ने अपने मन के भाव बताए और वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल छू लिया। चारित्र भाई, जिनके नाम के साथ ही चारित्र जुड़ा है वो 30 नवंबर 1991 को जन्मे थे और उसी तारीख 30 नवंबर 2025 को संयम जीवन में कदम रख रहे हैं यह संयोग नहीं, बल्कि आत्मा की सच्ची पुकार जैसा महसूस हुआ। दीपिका बहन, जिनके नाम मे ही प्रकाश और मार्गदर्शन  है, अपने शांत और दृढ़ निश्चय ही जिनशासन के कई लोगों के मन में नई रोशनी जगा गईं। वहीं शाश्वत भाई, ज...

रिषभ राज संघोत्सव की छ:रीपालित यात्रा पर नाहटा परिवार को संघवी पदवी से सम्मानित किया।

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  गढ़सिवाना – ( दिनेश देवड़ा धोका ) श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ, गढ़सिवाना ने नाहटा परिवार को छ:री पालित पदयात्रा के सफल आयोजन और उत्कृष्ट धर्मसेवा के लिए संघवी पदवी से सम्मानित किया। यह सम्मान गढ़सिवाना में आयोजित विशेष समारोह में पूरे हर्ष और गर्व के साथ प्रदान किया गया। नाहटा परिवार ने विक्रम संवत 2082 में कदंबगिरि से शत्रुंजय महातीर्थ तक रिषभ राज छ:री पालित संघ यात्रा का आयोजन किया, जो श्री वड़ाल, शत्रुंजय डेम, रोहिशाला, हस्तगिरि और सिद्धवड़ तीर्थ से होती हुई 15 नवंबर को शत्रुंजय पहुँची। अगले दिन आचार्यदेव श्रीमद् विजय रविशेखर सूरीश्वरजी म.सा. और आचार्यदेव श्रीमद् विजय ललितशेखरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन उपस्थिति में रंगमंडप में संघमाला विधान सम्पन्न हुआ। परिवार पहले भी धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहा है—हुबली आदिश्वर जिनालय में कायमी ध्वजा, कंचगार गली के शांतिनाथ जिनालय की प्रतिष्ठा, दादावाड़ी में सीमंधर स्वामी भगवान का बिम्ब विराजमान कराना और गढ़सिवाना में कुंथुनाथ जिनालय में स्वर्ण कलश का लाभ—इन सभी सेवाओं ने परिवार की धर्मनिष्ठा को विशेष पहचान दिलाई है। कुलवधू निर्मला देवी...

जब से प्रकृति से दूरी बनाई, बीमारी ने नजदीकी बढ़ाई:- दिनेश देवड़ा धोका

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दिनेश देवड़ा धोका सिवाना -अहमदाबाद पुराने जमाने में लोग सादा खाते थे, मेहनत करते थे, धूप हवा में रहते थे, इसलिए बिना बड़ी बीमारियों के जी लेते थे। दादियाँ परदादियाँ बिना किसी डिग्री के घर पर ही प्रसव करा देती थीं, पहलवान दो दिन में हड्डी जोड़ देता था, नाड़ी वैद्य एक बार नाड़ी पकड़कर बता देते थे कि शरीर में क्या गड़बड़ है और हकीम की एक छोटी सी पुड़िया कई दवाओं से ज्यादा असर कर जाती थी। इलाज सस्ता था, खाना शुद्ध था और जिंदगी में इतना तनाव नहीं था इसलिए जेब भी बचती थी और सेहत भी। आज हालात उलटे हैं। आधुनिक डॉक्टर, मशीनें और बड़े बड़े अस्पताल जरूरत पड़ने पर जान भी बचाते हैं, लेकिन हमारी जीवनशैली इतनी बिगड़ गई है कि छोटी सी परेशानी भी बड़ी बीमारी बन जाती है। जंक फूड, मिलावट, भागदौड़ और तनाव की वजह से बीमारी बढ़ रही है और इलाज का खर्च भी आसमान छू रहा है। टेस्ट, स्कैन, दवाइयाँ और ऑपरेशन सब महंगा हो गया है। अब सवाल यह नहीं कि प्राचीन तरीका सही था या आधुनिक, सवाल यह है कि आज हमारे लिए क्या ठीक है। सच तो यही है कि पुरानी जीवनशैली में सादगी थी, प्रकृति का साथ था और शरीर मजबूत रहता था। आधुनिक जीवनशै...

शुद्ध भोजन अपनाओ मिलावटखोरी को मात दो!

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  आज के समय मे हमारे खाने में मिलावट इतनी बढ़ गई है कि दूध, दही, पनीर, घी–तेल से लेकर मिठाई और फास्ट–फूड तक कुछ भी पूरी तरह भरोसे लायक नहीं रहा। स्वाद, रंग और खुशबू दिखाने के नाम पर ऐसे रसायन और नकली चीज़ें मिलाई जा रही हैं, जो शरीर को धीरे–धीरे बीमार बना देती हैं।हालत यह है कि हम रोज़ अखबारों और सोशल मीडिया पर मिलावटखोरी की खबरें पढ़ते हैं, छापे और सैंपल फेल होने की बातें देखते हैं—लेकिन फिर भी हम उसे इग्नोर कर देते हैं, जैसे यह खतरा हमारे घर तक पहुँच ही नहीं सकता।  हाल ही में राजस्थान स्कूल के ट्रस्टी और जीतो के कोषाध्यक्ष अशोकजी बाफना और स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका के साथ हुई बातचीत का मुख्य विषय भी यही था कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारी युवा पीढ़ी उठा रही है, जो जल्दी,आसानी और लुभावने रिल्स व ट्रैंडिंग के चक्कर में बाहर का खाना ज़्यादा खा रही है। गैस, एसिडिटी, कमजोरी, मोटापा, स्किन की दिक्कतें, बार–बार बीमार पड़ना—यह सब अब युवाओं में आम हो चुका है, और कम उम्र में ही डायबिटीज–बीपी जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। यह बात साफ समझ आई कि समस्या सिर्फ मिलावट करने वालों की ...

शाहिबाग में भक्ति का अद्भुत नज़ारा* *उज्ज्वला का वर्षीदान वरघोड़ा धूमधाम से संपन्न*

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  *अहमदाबाद* (दिनेश देवड़ा धोका) शाहिबाग में रविवार को निकला वर्षीदान का वरघोड़ा ऐसा दृश्य बन गया जिसने वहाँ मौजूद हर व्यक्ति के मन को छू लिया। सिवाना की उज्ज्वला, पुत्री श्री संजय कुमारजी मेहता, जो जल्द ही संयम जीवन अपनाने जा रही हैं। दीक्षा से 51 दिन पहले ही घर-परिवार का मोह छोड़कर अपनी गुरुमा के सान्निध्य में रहकर संयम की राह पर चलने का उनका संकल्प सुनकर हर किसी की आँखों में सम्मान और भावनाओं का मिश्रित भाव दिखा। सच में, उज्ज्वला जी अपने नाम की तरह ही अपने परिवार और जिनशासन दोनों का नाम उज्जवल करने के लिए आगे बढ़ रही हैं। वरघोड़े में साधु-साध्वी महाराज साहेब से लेकर सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएँ भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए। इसी दौरान आयोजन को कवर कर रहे स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका ने भी वहाँ की अनोखी भक्ति और उमंग को बेहद नज़दीक से अनुभव किया। अनेक तरह के बैंड , ढोल की गूंज, नृत्य कलाकारों की ताल, सजी हुई घोड़ा गाड़ियाँ, जैन पताका, घोड़े और भक्तिमय माहौल ने पूरे मार्ग को भव्यता से भर दिया। सबसे मन मोह लेने वाला दृश्य भगवान का रथ था, जिसे पूजा के वस्त्र पहनकर युवा अत्यंत श...

कर्णावती यूनिवर्सिटी में गढ़सिवाना की योगिता (देविका) जैन को गोल्ड मेडल

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  अहमदाबाद। (दिनेश देवड़ा धोका)  कर्णावती यूनिवर्सिटी में हुए दीक्षांत समारोह में गढ़सिवाना की बेटी योगिता (देविका) जैन, पुत्री महेंद्रजी बागरेचा (टाइगर) को यूनिवर्सिटी की ओर से गोल्ड मेडल दिया गया। योगिता ने B.Sc. (Computer Science) में Artificial Intelligence और Machine Learning विषय में पढ़ाई करते हुए पूरे कोर्स में पहला स्थान हासिल किया। AI और Machine Learning जैसे कठिन विषय में टॉप करना योगिता की मेहनत और लगन का नतीजा है। उनकी इस सफलता से गढ़सिवाना और जैन समाज, दोनों का नाम रोशन हुआ है। परिवार और समाज के लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि योगिता ने साबित किया है कि मेहनत और हिम्मत से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

*खाने में समझौता नहीं — शुद्धता ही सर्वोपरि* :- अशोक बाफना

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  मित्रों, आज कई होटल और रेस्टोरेंट ऐसे हैं जहाँ वेज और नॉनवेज भोजन एक ही किचन में, एक ही प्लेटफॉर्म पर और एक ही तवे पर तैयार किया जाता है, जो हर शाकाहारी व्यक्ति की भावनाओं और विश्वास पर सीधा आघात है। हमारे लिए भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शुद्धता, संस्कार और जीवनशैली की पहचान है। अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि किसी शाकाहारी व्यक्ति को गलती या लापरवाही से नॉनवेज परोस दिया गया और बाद में होटल वाले थोड़ा जुर्माना देकर या एक सॉरी बोलकर बच जाते हैं, जबकि उस व्यक्ति और उसके परिवार के मन पर वह घटना जीवनभर पछतावे और पीड़ा के रूप में रह जाती है। आज की युवा पीढ़ी होटल-रेस्टोरेंट की चकाचौंध, इंस्टा-रील्स की दुनिया और ट्रेंडिंग के नाम पर ऐसे स्थानों पर जा रही है जहाँ उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि उनके प्लेट में क्या परोसा जा रहा है माहौल और आकर्षण में वे अनजाने में वह खा आते हैं जो उनके संस्कारों और जीवन मूल्यों के बिल्कुल विपरीत होता है। शुद्ध वेज का अर्थ सिर्फ शाकाहारी व्यंजन नहीं, बल्कि अलग किचन, अलग तवा, अलग बर्तन और बिना किसी मिलावट या क्रॉस-कंटैमिनेशन के बनाया गया भोजन...

श्री सिवांची मालानी जैन संगठन समस्त आंध्र प्रदेश का पंचम स्नेह मिलन सम्मेलन सम्पन्न*

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  श्री सिवांची मालानी जैन संगठन समस्त आंध्र प्रदेश का पंचम स्नेह मिलन समारोह विजयवाड़ा नगर के पास अरिहंत धाम तीर्थ पर 2-नवम्बर 25 रविवार को हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में समस्त आंध्र प्रदेश के विभिन्न नगरों से जिसमें गुंटूर विजयवाड़ा तेनाली करनूल  राजमहेन्दरी भीमावरम  कडप्पा अनंतपुर कोतागुडम खम्मम चिलकुरीपेटा  आदि नगरों से काफी संख्या में सम्मेलन में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले सभी सदस्य बाजते गाजते सामुहिक रूप से मंदिरजी परमात्मा के दर्शन करने गये और चैत्यवंदन करके समारोह कक्ष में प्रवेश किया। सम्मेलन का उद्घाटन इस बार रंगारंग क्लासिकल डांस कलाकारों द्वारा गणेश वंदना और नवकार वंदना से किया।  सभी नगरों के गणमान्य प्रतिनिधियों को मंचासिन करके परमात्मा को माल्यार्पण धूप दीप करके सम्मेलन का आगाज किया। सभी सदस्यों ने आपस में एक दुसरे को दिपावली पर्व व नववर्ष की शुभकामनाएं दी। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने संबोधन में संगठन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। तपस्वीयों व प्रतिभाशाली बच्चों का बहुमान किया गया एवं  दोपहर में महिलाओं और बच्चों के ...

विश्व विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बधाई देती कविता :कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव

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  *************************************  भारतीय महिला क्रिकेट टीम, विश्व विजेता ताज। हर भारतवासी को है आज, इन बेटियों पर नाज। नीली जर्सी नीला अम्बर नीला सम्पूर्ण स्टेडियम, लहर लहर लहराया तिरंगा, जो बन गया सरताज। विश्व विजेता ये भारतीय बेटियां, बेटों से कम नहीं। कोई रोक सके इनके कदम अब किसी में दम नहीं। जो देखा था बरसों से सपना,आज वो पूरा हो गया। हार कर सीखा है जीतना,उस हार का कोई ग़म नहीं। श्री कृष्ण ने गीता में कहा था, हमें कर्म करते जाना है। मेहनत का फल है मीठा,समय रहते मिल ही जाना है । लगन बल पराक्रम के साथ एकता की ताकत कितनी, पल पल में बदलती जीत की खुशी को हमने माना हैं। विश्व विजेता महिला क्रिकेट टीम को, मुथा देता बधाई शुभकामना। भारत का नाम विश्र्व में रोशन करो, ये  ही हमारी मंगल भावना। ************************** * कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव* *मुम्बई*

भारत की बेटियों ने रचा इतिहास — पहली बार जीता महिला क्रिकेट विश्वकप 2025

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नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में 2 नवंबर 2025 का दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत की महिला क्रिकेट टीम ने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से पराजित कर पहली बार आईसीसी महिला क्रिकेट विश्वकप अपने नाम किया। यह जीत केवल क्रिकेट की नहीं, बल्कि देश की हर उस बेटी की जीत है जो सपने देखने और उन्हें साकार करने की हिम्मत रखती है। फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 298 रन बनाए और साउथ अफ्रीका को 246 रन पर रोक दिया। युवा ओपनर शफाली वर्मा ने 87 रनों की दमदार पारी खेली और गेंदबाजी में भी 2 विकेट हासिल कर “प्लेयर ऑफ द मैच” का खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली दीप्ति शर्मा को 22 विकेट और 215 रनों के साथ “प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट” घोषित किया गया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपने शांत, दृढ़ और प्रेरक नेतृत्व से टीम को इतिहास रचने की दिशा में आगे बढ़ाया। 36 वर्ष की उम्र में हरमनप्रीत विश्वकप जीतने वाली सबसे उम्रदराज महिला कप्तान बन गईं, जबकि 21 वर्षीय शफाली वर्मा सबसे युवा “प्लेयर ऑफ द मैच” रहीं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरा देश जश्न...

भाषा समझने का ज़रिया है, झगड़े का कारण नहीं - दिनेश देवड़ा धोका

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दिनेश देवड़ा धोका (लेखक- स्वतंत्र पत्रकार )   आजकल अक्सर सुनने में आता है कि लोग भाषा को लेकर झगड़ रहे हैं। कोई कहता है हिंदी बोलो, कोई कहता है अपनी मातृभाषा बोलो, तो कोई अंग्रेज़ी को ही सही मानता है। लेकिन ज़रा सोचिए, भाषा का असली मतलब क्या है? भाषा तो सिर्फ बात समझने और समझाने का ज़रिया है। इसका काम लोगों को जोड़ना है, बाँटना नहीं। अगर दो लोग एक-दूसरे की बात समझ पा रहे हैं, तो फिर फर्क क्या पड़ता है कि वो हिंदी में बोल रहे हैं या अंग्रेज़ी में, तमिल में या मराठी में। असली मायने तो समझ में आने के हैं, न कि शब्दों में उलझ जाने के। मुसीबत तब होती है जब हम भाषा को अपनी पहचान या अहंकार का मुद्दा बना लेते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि हर भाषा में एक संस्कृति की खुशबू होती है, एक समाज की कहानी छिपी होती है। कोई भाषा ऊँची नहीं होती, कोई नीची नहीं होती, बस सबकी अपनी-अपनी मिठास होती है। अगर हम हर भाषा को बराबर सम्मान देना सीख लें, तो समाज में न तो दीवारें रहेंगी और न ही दूरियाँ। क्योंकि जब बात दिल से की जाती है, तो ज़ुबान का फर्क मायने नहीं रखता। इसलिए ज़रूरत है कि हम भाषा को संवाद का सेत...