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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, मदुरै का भव्य स्नेहमिलन समारोह अपार उत्साह के साथ संपन्न

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  मदुरै, 30 मार्च 2025 – श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मदुरै द्वारा आयोजित भव्य समारोह की शुरुआत श्रमण भगवान महावीर स्वामी एवं गुरु भगवंतों की गूंजती जयघोष के साथ हुई। इस अवसर पर संघ के मंत्री शांतिलालजी गुलेच्छा ने समारोह में उपस्थित समस्त अतिथियों एवं परिवारों का आत्मीय स्वागत किया। आयोजन में संघ संरक्षक श्रीमान तिलोकचंदजी हरण, नेमीचंदजी बाफना, अध्यक्ष विजयराजजी श्रीश्रीमाल, मंत्री शांतिलाल गुलेच्छा, कोषाध्यक्ष पारसमलजी कंकु चोपड़ा एवं संगठन व प्रचार प्रसार मंत्री दिनेश सालेचा का तिलक, माला पहनाकर अभिनंदन पत्र एवं मोमेंटो देकर भव्य सम्मान किया गया। श्री लीला देवी भवन में आयोजित इस भव्य आयोजन में मदुरै श्वेताम्बर संघ, तेरापंथ सभा एवं श्री सिवांची ओसवाल जैन संघ सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वालों में प्रमुख रूप से जवेरीलाल बाफना, नेनमल कोठारी, मोहनलाल गुलेच्छा, उम्मेदमल गुलेच्छा, भागचंद बाफना, बाबुलाल सुराणा, धनराज चौपड़ा, प्रकाशमल गुलेच्छा, रतनलाल भंडारी, दिलीप हरण, शांतिलाल लुंकड़, राजेश घोड़ा, अशोक जीरावला, श्रेण...

गढ़ सिवाना में होगा चातुर्मास का ऐतिहासिक संगम: प्रमुख पदाधिकारियों की घोषणा

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  गढ़ सिवाना नगर के धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में यह एक स्वर्णिम अवसर है। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, गढ़ सिवाना की विनती स्वीकार कर पूज्य ज्ञान गच्छाधिपति श्रुतधर पंडित 1008 श्री प्रकाशमुनीजी महाराज साहब ने इस वर्ष के चातुर्मास के लिए गढ़ सिवाना को चुना है। यह नगर के धर्म प्रेमी समाजजनों के लिए एक गौरवशाली क्षण है कि वे इस पावन अवसर के साक्षी बनेंगे। चातुर्मासिक वर्षावास के दौरान नगर में आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिक अनुष्ठान, स्वाध्याय, तपस्या और प्रवचन की अविरत धारा प्रवाहित होगी। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए समाज के प्रतिष्ठित और समर्पित व्यक्तियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। मुख्य संयोजक के रूप में श्री राजमलजी कानूंगा (सूरत) की नियुक्ति की गई है, जबकि सह संयोजक की जिम्मेदारी श्री किशनजी छाजेड़ (अहमदाबाद) और श्री गणपतजी बागरेचा (हैदराबाद) को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष पद पर श्री खीमराजजी जिन्नानी (अहमदाबाद) तथा मंत्री पद पर श्री सुरेशकुमारजी चोरड़िया (सूरत) अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इन समर्पित समाज सेवकों के नेतृत्व में यह चात...

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मदुरै की नई कार्यकारिणी का गौरवशाली गठन विजराज श्रीश्रीमाल बने अध्यक्ष, शांतिलाल गुलेच्छा को मंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

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  मदुरै, तमिलनाडु। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मदुरै के तत्वावधान में रविवार को वार्षिक आम सभा का भव्य आयोजन हुआ। सभा का शुभारंभ परम मंगलकारी नमस्कार महामंत्र के पवित्र उच्चारण से हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। संघ प्रवक्ता दिनेश सालेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि सभा में वर्तमान अध्यक्ष नेमीचंदजी बाफना ने सभी संघजनों का आत्मीय स्वागत किया, वहीं कोषाध्यक्ष धनराजजी चौपड़ा ने संघ की वित्तीय स्थिति का संपूर्ण लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिससे संघ की आर्थिक मजबूती का परिचय मिला। सभा का संचालन बड़ी कुशलता और गरिमामय ढंग से वर्तमान मंत्री बाबूलालजी सुराणा द्वारा किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर वर्ष 2025-26 के लिए संघ की नई कार्यकारिणी के गठन की घोषणा हुई, जिसमें सर्वसम्मति से समाज के समर्पित और योग्य पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। संघ के संरक्षक के रूप में तिलोकचंदजी एवं नेमीचंदजी बाफना को मनोनीत किया गया, जबकि अध्यक्ष पद का गौरवशाली उत्तरदायित्व विजराजजी श्रीश्रीमाल को सौंपा गया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सायरमलजी भंडारी और उपाध...

संप्रदाय से नहीं, जैन धर्म से हो हमारी पहचान #JAIN #JAINISM

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 संप्रदाय नहीं जैनत्व  प्राथमिकता हो जैन समुदाय में एकता और सद्भाव की भावना सदैव से रही है। जैन धर्म अपनी अहिंसा, करुणा और सत्य के सिद्धांतों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यह धर्म न केवल आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग दिखाता है, बल्कि समाज में प्रेम और एकता का भी संदेश देता है। समय के साथ, जैन धर्म विभिन्न संप्रदायों में विभाजित हुआ, जिनमें श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी, तेरापंथी आदि प्रमुख हैं। इन सभी संप्रदायों की अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और धार्मिक दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन इनका मूल आधार एक ही है—अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह। वर्तमान समय में यह देखा गया है कि विभिन्न जैन संप्रदायों के विचारक, साधु-साध्वी, तथा साहित्यकार कभी-कभी अपने विचारों को स्थापित करने के प्रयास में अन्य संप्रदायों की आलोचना कर देते हैं। इससे श्रावकों के मन में द्वेष और असहमति की भावना जन्म ले सकती है। किन्तु हमें यह समझना चाहिए कि जैन धर्म का मूल तत्व अनेकांतवाद है, जो हमें सिखाता है कि सत्य के विभिन्न पक्ष हो सकते हैं। भगवान महावीर ने अनेकांतवाद का संदेश दिया था, जिसका अर्थ है कि सत्य एक ही हो ...