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धुएं वाली ट्रेन से बुलेट तक का सफर

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  16 अप्रैल है, यानी रेलवे दिवस। इस दिन की अपनी अलग ही कहानी है  आज ही के दिन, साल 1853 में देश की पहली ट्रेन ने मुंबई से ठाणे तक 34 किलोमीटर का सफर तय किया था। उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ये धुएं वाली सीटी एक दिन देश को बुलेट ट्रेन तक पहुंचा देगी। आज भारतीय रेल सिर्फ एक सफर का जरिया नहीं रही, बल्कि देश की पहचान बन गई है। लाखों लोग हर दिन ट्रेन से सफर करते हैं  कोई काम के लिए, कोई रिश्तेदारों से मिलने, तो कोई घूमने-फिरने। रेल ने हर किसी को जोड़ा है  गांव, शहर, गांव से शहर और दिल से दिल। अब ज़रा सोचिए – पहले भाप के इंजन होते थे, धीमे-धीमे चलने वाली गाड़ियां। फिर डीज़ल इंजन आया, फिर इलेक्ट्रिक। और अब देखिए – वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी चमचमाती, तेज़ रफ्तार ट्रेनें चल रही हैं। जो 160-180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं, AC जैसी ठंडी हवा और मेट्रो जैसी सफाई लेकर। इतना ही नहीं, आने वाले कुछ सालों में देश को पहली बुलेट ट्रेन मिलने वाली है – मुंबई से अहमदाबाद के बीच। जो 320 किमी/घंटा की स्पीड से चलेगी। अब ये कोई सपना नहीं, ये बन रहा है हकीकत। भारतीय रेलवे दुनिय...