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पालिताना सिद्धवट भूमि पर 30 नवम्बर को शाश्वत, चारित्र व दीपिका लेंगे दीक्षा

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  अहमदाबाद, शाहिबाग – संयम की पावन यात्रा ने आज मोनालीसा सोसाइटी से गिरधर नगर संघ तक एक ऐतिहासिक अध्याय रच दिया। भव्य शोभायात्रा में धर्मनिष्ठ मुमुक्षुओं का काफिला जब गाजे-बाजे, श्रद्धा और समर्पण के साथ गिरधर नगर संघ पहुँचा, तो पूरा वातावरण संयम की साधना से सराबोर हो उठा। इस समारोह का आयोजन विशेष रूप से मुमुक्षु शाश्वत भाई, मुमुक्षु चारित्र भाई और मुमुक्षु दीपिका बहन के दीक्षा मुहूर्त प्रदान करने के शुभ उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत परम पूज्य आचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा. और साधु-साध्वियों की निश्रा में हुई। धर्मसभा में विशेष रूप से धैर्य भाई का बहुमान किया गया, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में 5100 से अधिक जैन गाथाएं कंठस्थ कर , जैन धर्म के प्रति अगाध भक्ति का परिचय दिया। यह बहुमान  बाल मुमुक्षु शाश्वत द्वारा किया गया, जो अब संयम जीवन की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। मुमुक्षु विरती बहन का बहुमान बागरेचा पोमानी परिवार द्वारा किया गया, जिन्होंने संयम साधना के पथ पर अडिग रहने का निर्णय लिया है। गुरुदेव आचार्य श्री ने अपने प्रेरक प्रवचन में तीनों मुमुक्ष...

*भाजपा नेता डॉ. सतीश पूनिया का मदुरै लोटस अपार्टमेंट में भव्य स्वागत*

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मदुरै, 30 मई 2025 – राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया का मदुरै में गोल्डन लोटस अपार्टमेंट परिसर में भव्य स्वागत किया गया।  वे श्री अम्बे माताजी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लेने के लिए मदुरै पधारे हैं।  डॉ. पूनिया के आगमन पर लोटस अपार्टमेंट एसोसिएशन के उत्तर भारतीय पदाधिकारियों— श्री दिलीप सिंह शेखावत, सज्जन कुमार गर्ग, महेंद्र कुमार बोथरा, मनोज गिद्रा, अशोक जीरावला, अभिमन्यु,—तथा मदुरै राजपुरोहित समाज के महामंत्री एवं मदुरै ग्रेनाइट एसोसिएशन के संरक्षक, OLC  तमिलनाडु भाजपा प्रदेश सचिव श्री गणपत सिंह राजपुरोहित और गायक कलाकार पुखसिंह ने पारंपरिक तिलक, माला और साल अर्पण कर उनका स्वागत किया। इससे पूर्व मदुरै एयरपोर्ट पर भी श्री राजस्थानी सेवा समाज ट्रस्ट की तरफ से भव्य स्वागत हुआ। इसके पश्चात, राजस्थानी एसोसिएशन के मंत्री श्री अशोक जीरावला के निवास पर आयोजित सम्मान समारोह में डॉ. पूनिया को देवी मीनाक्षी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।  मदुरै को 'मंदिरों की नगरी' के रूप में संबोधित करते हुए, उन्होंने इस सांस्कृतिक नगरी...

*हेलमेट सिर्फ एक चीज़ नहीं, ज़िंदगी की हिफाज़त है*

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  हमारे जीवन में सबसे अनमोल चीज़ क्या है? न संपत्ति, न सफलता  सबसे अनमोल है हमारा जीवन। और जब हम सड़कों पर निकलते हैं, तो यही जीवन सबसे ज्यादा असुरक्षित होता है। तेज़ रफ्तार, अनियंत्रित वाहन, ट्रैफिक की लापरवाही,  सब मिलकर एक छोटी सी चूक को गंभीर दुर्घटना में बदल सकते हैं। ऐसे में हमारी सुरक्षा का सबसे सच्चा साथी बनता है  हेलमेट। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस हेलमेट नाम के पीछे कोई अर्थ भी हो सकता है? दरअसल, HELMET शब्द अपने आप में उन सभी अंगों की रक्षा का प्रतीक है, जिन्हें यह ढकता है और बचाता है। इसका एक अर्थपूर्ण विस्तार इस प्रकार समझा जा सकता है: H यानी Head, E – Eyes, L – Lips, M – Mouth, E – Ears, और T – Teeth। ये सभी चेहरे के वो हिस्से हैं जो किसी भी सड़क दुर्घटना में सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसीलिए इसको HELMET कहा गया  क्योंकि यह सिर से लेकर चेहरे तक, हर जरूरी हिस्से की सुरक्षा करता है। हेलमेट कोई फैशन की चीज़ नहीं, यह जीवनरक्षा का कवच है।  जो हर दिन सड़क पर अपनी और अपनों की उम्मीदें लेकर निकलता है। जब हम हेलमेट पहनते हैं, तो हम...

*संतों और सेवा में लगे लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है*:- दिनेश देवड़ा धोका

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आज सुबह की शुरुआत एक बहुत ही दुखद खबर के साथ हुई। राजस्थान के पाली जिले के जाड़न इलाके में सुबह करीब साढ़े छह बजे जैन धर्म के श्वेतांबर मूर्तिपूजक आचार्य पूंडरिक रत्न सूरीश्वरजी महाराज साहब का विहार के दौरान सड़क हादसे में निधन हो गया। एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी और उनका जीवन यहीं थम गया। दुख की बात ये है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई संतों और साध्वियों की जीवन यात्रा ऐसे ही हादसों में खत्म हो चुकी है। ये वही लोग होते हैं जिन्होंने सब कुछ छोड़ कर संयम और साधना का रास्ता अपनाया होता है। जो समाज को शांति, अहिंसा और धर्म का रास्ता दिखाते हैं, वही संत जब सड़क पर असुरक्षित महसूस करें, तो ये समाज के लिए चिंता की बात है। और बात केवल संतों की ही नहीं है, उनके साथ सेवा में लगे हुए वो श्रद्धालु भी कई बार हादसों के शिकार होते हैं। कई घटनाएं ऐसी भी रही हैं जहां सेवा देने वाले श्रावक  खुद किसी वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए या अपनी जान गंवा बैठे। वे न कोई प्रचार चाहते हैं, न कोई पुरस्कार, बस संतों की सेवा को ही अपनी तपस्या मानते हैं। लेकिन जब कुछ होता ह...

*सांगली में आ.श्री राजरत्न सूरीश्वरजी (भगवान म.सा.) का चातुर्मास प्रवेश 6 जुलाई

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  सांगली (महाराष्ट्र)  श्री जैन श्वेताम्बर अमिझरा पार्श्वनाथ देहरासर ट्रस्ट के तत्वावधान में कलिकुंड तीर्थोद्वारक आ.श्री राजेन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न गच्छाधिपति आ.श्री राजशेखर सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ति प.पू.आ.श्री राजरत्न सूरीश्वरजी भगवान महाराज आदि ठाणा 5 एवं प.पू.साध्वीजी श्री संपुर्णाश्रीजी  म.सा आदि ठाणा 6 का चातुर्मास प्रवेश सांगली नगर की पावन भूमि पर 6 जुलाई रविवार के दिन होगा।  गत वर्ष आचार्य श्री का कोल्हापुर में ऐतिहासिक चातुर्मास संपन्न हुआ, चातुर्मास की संपन्नता के बाद  गुरुदेव सूरत में भव्य दीक्षा समारोह संपन्न कर मुंबई में 387 वर्षी तप के पारणो में निश्रा प्रदान कर पुणे आदि क्षेत्रों की स्पर्शना करते हुए गुरुदेव का सांगली में आगमन होगा। अध्यक्ष सुभाष शाह ने बताया कि गुरुदेव के चातुर्मास को लेकर सांगली के जैन संघ में जोरदार उल्लास उमंग छाया हुआ है। और चातुर्मास की तैयारियां जोरों से चल रही है।

सिवाना-समदड़ी रोड पर आकार ले रहा अद्भुत धार्मिक व सामाजिक संगम – “विहार धाम” व “ओसवाल पैलेस” का सपना हो रहा साकार, 2026 में होगा पूर्ण

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सिवाना (संवाददाता दिनेश देवड़ा धोका): सिवाना-समदड़ी रोड पर मेली गाँव के समीप समाज की आस्था, सेवा और संस्कृति का प्रतीक बनकर “विहार धाम” और “ओसवाल पैलेस” का भव्य निर्माण कार्य तेज़ी से प्रगति पर है। यह भव्य योजना वर्ष 2026 तक पूर्ण होने की संभावना के साथ समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी सिद्ध होने जा रही है। विहार धाम – जैन संतों के मंगल विहार और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए समर्पित यह स्थान आत्मशांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा। यहाँ विराजमान भगवान मुनिसुव्रत स्वामी के भव्य जिनालय की प्रतिष्ठा को 3 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, और अब यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का उज्ज्वल दीप बन चुका है। ओसवाल पैलेस – आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह पैलेस समाज की बहुउद्देशीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तैयार हो रहा है। कुल 108 वातानुकूलित कमरे, 6 छोटे हॉल और 2 विशाल हॉल समाजजनों के विवाह समारोह, पारिवारिक कार्यक्रम, धर्मसभाएं व अन्य विविध आयोजनों के लिए एक आदर्श स्थल बनेंगे। यह परियोजना केवल ईंट और पत्थरों का निर्माण नहीं, अपितु यह समाज की एकता, सेवा, परंपरा और भविष्यदृष्टि का जीवंत उदाहरण है। समाज के लोग इस...

गढ़ सिवाना की चंपावाड़ी में भव्य रजत जयंती पंचान्हिका महोत्सव मनाया जाएगा

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  गढ़ सिवाना – सिवाना शहर और आसपास के जैन समाज व प्रवासी बंधुओ के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। चंपावाड़ी ट्रस्ट मंडल की 24 मई 2025 को हुई मीटिंग में यह तय किया गया है कि गढ़ सिवाना के चंपावाड़ी परिसर में मौजूद श्री सीमंधर स्वामी मंदिर , श्री जिनकुशलसूरी दादावाड़ी और श्री चंपाश्रीजी गुरु मंदिर की 25वीं वर्षगांठ को लेकर भव्य रजत जयंती पंचान्हिका महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह खास महोत्सव 17 जनवरी 2026 से 21 जनवरी 2026 तक पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें धर्म, भक्ति, तप, प्रवचन और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसमें देशभर से साधु-साध्वियों को  निश्रा हेतु विनंती की जाएगा और खास तौर पर सिवाना से दीक्षित हुए साधु साध्वीओ की निश्रा की भी विनंती की जाएगी। सिवाना सिर्फ मंदिरों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए भी खास है क्योंकि यही पर दादा गुरुदेव जिनकुशलसूरीजी का जन्म हुआ था, और समता की प्रतिमा श्री चंपाश्रीजी की समाधि भी यहीं है। वहीं वर्तमान तीर्थंकर श्री सीमंधर स्वामी का मंदिर श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रस्ट ने कमेटी भी बना दी है। मुख्य संयोजक – श्...

सही समय की अहमियत — ब्रांड नहीं, जरूरत बड़ी होती है

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  काम की चीज़ महंगी नहीं, सही वक्त पर सही होनी चाहिए आजकल लोग अकसर ब्रांडेड चीज़ों को ही सबसे अच्छा मानते हैं  महंगे कपड़े, जूते, घड़ियाँ वगैरह। ऐसा लगता है जैसे जो जितना महंगा पहनता है, वो उतना बड़ा इंसान है। लेकिन असल ज़िंदगी में ऐसा हमेशा नहीं होता। आपने भी देखा होगा, जो लोग करोड़ों के कपड़े पहनते हैं, बड़े-बड़े ब्रांड्स के शौकीन होते हैं, वो भी कभी-कभी क्रिकेट मैच में सिर्फ 60-70 रुपये की सादी सी टी-शर्ट पहन कर पहुंच जाते हैं। न कोई लोगो, न कोई नाम  बस सादगी और आराम। इसका मतलब साफ है  हर मौके पर ब्रांड या कीमत की नहीं, ज़रूरत की अहमियत होती है। कई बार हम दिखावे में ही उलझे रहते हैं। सोचते हैं लोग क्या कहेंगे, मैं कौन-सी चीज़ इस्तेमाल कर रहा हूँ, कौन सा ब्रांड पहन रहा हूँ। लेकिन सच ये है कि जिंदगी हर पल हमें ये सिखाती है कि जो काम की चीज़ है, वो ही सही होती है  चाहे सस्ती हो या महंगी। तो अगली बार जब कोई चीज़ खरीदें या पहनें, तो ये सोचें कि क्या ये आपको असल में चाहिए, या सिर्फ दिखावे के लिए है? क्योंकि नाम, शान और पहचान  ये सब कपड़ों से नहीं, आपकी स...

*शांतिदूत आचार्य महाश्रमणजी का ईडर में मंगल प्रवेश, अहिंसा और साधना का दिया संदेश*

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  ईडर, 23 मई (शुक्रवार) – तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उम्मेदगढ़ से विहार करते हुए ईडर के अंजना पाटीदार एच.के.एम. आर्ट्स कॉलेज तक की यात्रा पूरी की। इस मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और जगह-जगह श्रद्धा से स्वागत किया गया। गुरुदेव के आगमन पर महिलामंडल, कन्यामंडल और ज्ञानशाला के बच्चों ने सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें भक्ति, अनुशासन और समर्पण की झलक साफ नजर आई। प्रवचन में आचार्य श्री ने जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले शब्द कहे: "संयम, सदाचार और सेवा ही सच्चे जीवन की आधारशिला हैं।" उनके विचारों ने हर उम्र के श्रोताओं को प्रेरणा दी। यह दिन साधकों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहा, जब उन्होंने न केवल विहार का साक्षी बनने का सौभाग्य पाया, बल्कि आचार्य श्री की वाणी से आत्मिक ऊर्जा भी प्राप्त की। यह जानकारी ललित सालेचा (कावेरी ग्रुप) ने दी।

नाम में है बात — जानिए भारत के सबसे छोटे और सबसे लंबे नाम वाले रेलवे स्टेशन की कहानी

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे सिर्फ ट्रेनों के नेटवर्क या यात्री आंकड़ों के कारण ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे और दिलचस्प स्टेशनों की वजह से भी चर्चा में रहता है। आज हम बात कर रहे हैं दो ऐसे रेलवे स्टेशनों की, जिनके नाम अपने आप में रिकॉर्ड बन गए हैं — एक ऐसा स्टेशन जिसका नाम देश में सबसे छोटा है, और दूसरा, जो अपने सबसे लंबे नाम के कारण चर्चा में रहता है। ओडिशा के झारसुगुड़ा ज़िले के पास स्थित ‘इब’ रेलवे स्टेशन का नाम केवल दो अक्षरों का है — ‘Ib’। यह नाम जितना छोटा है, इसका ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व उतना ही बड़ा है। इसका नाम पास से बहने वाली इब नदी से लिया गया है। 1891 में जब बंगाल नागपुर रेलवे की स्थापना हुई, तो इस क्षेत्र को जोड़ा गया और 1900 में जब इब नदी पर पुल बना, तभी से यह स्टेशन एक औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरने लगा। इब वैली कोलफील्ड की खोज ने इसे और भी महत्त्वपूर्ण बना दिया। इतने वर्षों बाद भी यह स्टेशन न केवल रेल यातायात में, बल्कि भारत की रेल heritages में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वहीं दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर बसा ‘वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा’ स्टेशन एक दिलच...

बिल से इन्हें निकालो बाहर.... अशोक दोशी

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  दुश्मन जो सीमा के बाहर,  उसको तो निपटा देंगे। घर के भीतर हैं जो दुश्मन,  उनसे कैसे निपटेंगे।। सबसे पहले उनसे निपटो,  खेले दुश्मन की गोदी। उनके चेहरों को पहचानो,  कब्र जिन्होंने थी खोदी। बिल से इन्हें निकालो बाहर,  ये तो घर के भेदी हैं।  करो फैसला इनका पहले,  ये विधान विच्छेदी हैं।। जब तक जयचंद है देश में,  कैसे बात बनेगी वो। गौरव पायेगी वे माताएं , देश भक्त जनेगी तो। स्वरचित:अशोक दोशी

अहमदाबाद में श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा का निधन, नेत्रदान कर बनीं समाज के लिए प्रेरणा

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  अहमदाबाद, 23 मई अहमदाबाद में शुक्रवार रात्रि एक श्रद्धेय व्यक्तित्व, श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा (आयु 75 वर्ष) का दुखद निधन हो गया। वे मूलतः राजस्थान के असाड़ा निवासी श्री शंकरलालजी संकलेचा की धर्मपत्नी थीं। उनके निधन की खबर से समाज में शोक की लहर दौड़ गई। दुख की इस घड़ी में संकलेचा परिवार ने अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी कार्य करते हुए दिवंगत श्रीमती जेठीदेवी जी का नेत्रदान करवाया। उनके नेत्र अब दो दृष्टिहीन व्यक्तियों की आंखों की रोशनी बनेंगे। इस नेक कार्य के लिए समाजजनों ने संकलेचा परिवार की खुले दिल से प्रशंसा की। स्व. जेठीदेवी जी अपने सहज स्वभाव, सेवा-भावना और धार्मिक आस्था के लिए समाज में विशेष रूप से सम्मानित रही हैं। उनका जीवन सादगी और समर्पण की मिसाल था। मृत्यु के उपरांत उनके नेत्रदान ने यह सिद्ध किया कि एक व्यक्ति अपने अंतिम समय में भी समाज की सेवा कर सकता है। संकलेचा परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के लिए एक गहरा संदेश है — मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और के जीवन की नई शुरुआत हो सकती है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को चिरशांति प्रदान करे और परिवार को इस पुण्य...

*गढ़सिवाना के ओसवाल न्याति भवन में "चाय पर चर्चा हॉल" का लाभ सिवाना सेवा समिति – अहमदाबाद को मिला*

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*गढ़सिवाना* – श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल समाज, गढ़सिवाना की ओर से बनाए जा रहे ओसवाल न्याति भवन में एक खास और अहम हिस्सा “चाय पर चर्चा हॉल” होगा। इस हॉल का लाभ सिवाना सेवा समिति – अहमदाबाद को मिला है, जो समाज के लिए गर्व की बात है। यह हॉल भवन का ऐसा व्यस्त हिस्सा होगा जहाँ सबसे ज़्यादा समाजजनो आवागमन होगा वहा पर बैठकर आपस में बातचीत करेंगे, अपने विचार साझा करेंगे, और मिल-बैठकर सामाजिक निर्णयो पर चर्चा करेंगे  । यही हॉल समाज की एकता और मेलजोल का प्रतीक बनेगा। इस योगदान के ज़रिए सिवाना सेवा समिति – अहमदाबाद ने यह साबित किया है कि भले ही वे अहमदाबाद में रहते हैं, पर उनका दिल आज भी अपनी मातृभूमि गढ़सिवाना से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह समर्पण और निष्ठा सचमुच प्रेरणादायक है। श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल न्याति भवन ट्रस्ट – गढ़सिवाना ने इस सहयोग के लिए समिति का दिल से आभार जताया है और उम्मीद जताई है कि अन्य प्रवासी समाजबंधु भी इस पुण्य कार्य में आगे आएंगे। *जहाँ अपनेपन का भाव होता है, वहाँ सेवा की राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं।*

*दान का ढोंग*:- कवि_छगनलाल_मुथा-सान्डेराव

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पत्नी बोली सुनो पतिदेव,  बैठे हो तुम अब बेकार। थोड़ी मेरी मदद करो, जाओ सब्जी लेने को बाजार। गोभी आलू प्याज टमाटर केला, अच्छा देखकर लाना। नहीं दूर बाजार है अपना,  चलकर जाना चलकर आना। गये पतिदेव चलकर बाजार में,  थककर वो हो गये चूर। भाव सुनकर महंगी सब्जी का, उतर गया चेहरे का नूर। जैसे तैसे खरीदी सब्जी, फिर निकल पड़े थे घर की ओर। मन में आ रहा था गुस्सा, पर पत्नी के आगे नहीं चलता जोर। रास्ते में चलते देखा सामने से  आ रहा था एक गरीब परिवार। सोचा इनके साथ लूंँ सेल्फी,  फिर छपवा दूंँगा उसे अखबार। ऐसा सेल्फी लिया बढ़िया,  जैसे दान कर रहा हो सब्जी फल। छोटे बच्चे ने हाथ आगे बढाया, अनदेखा करके गया निकल। बहुत लोगों की आदत ऐसी, दान देने का करते हैं दिखावा। दो केले देते हैं दान में, आठ दस लोगों का फोटो निकाला। दान करों, ऐसा करो, एक हाथ दे दूसरे को नहीं पड़े खबर। कौन सही कौन ग़लत है मुथा, सब पर है प्रभु की नजर। ***************** *कवि_छगनलाल_मुथा-सान्डेराव* *मुम्बई*

सेना ने की सटीक सृजरी..... अशोक दोशी

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  सेना ने की सटीक सृजरी,     आपरेशन सिंदूरी से।    ड्रोन विमान दुश्मन  देश‌ के,      मार गिराये दूरी से ।।   जंग हमारी मजबूरी थी,    दुश्मन की बदमाशी थी।   छेड़ा तो फिर कैसे छोड़े,     ललकार वो विनाशी थी ।। कौन प्रबुद्ध   युद्ध चाहेगा,     ये धन  की बर्बादी है।  नहीं शौक ऐसा भी हमको,     बहुत बड़ी ये व्याधी है ।।     स्वाभिमान की सघन सुरक्षा ,     देखो  बहुत जरूरी है ।  देश सुरक्षा का मसला हो     रखनी वो  मगरूरी  है ।।    अभी  कुछ नहीं  कह सकते,       जंग कभी  पूरी होगी।    अंत हो  आंतकी आका का,       माॅंग तभी सिंदूरी होगी।।     विवश किया हमें  अस्त्र उठाने,        पड़ौसी पाक उन्मादी है।        नापाकी  इनके मनसूबे,        उपद्रवी  वो   विवादी  है।...

इतना खर्च मत करो, और अगली पीढ़ी निकम्मी बन जाए इतना पैसा भी मत जोड़ो! — आचार्य यशोवर्मसूरीजी म.सा.

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आज तक पौने दो लाख से ज्यादा साधु-साध्वी भगवंतों को रोज़ सुबह उठकर 30-35 किलोमीटर तक विहार करवाने वाले श्रमण सेवा ग्रुप के जांबाज़ युवाओं ने आज दहानु शहर में एक खास प्रवचन और सामैयिक कार्यक्रम रखा। ये कार्यक्रम हुआ श्रमण सेवा ग्रुप के संस्थापक पूज्य आचार्य यशोवर्मसूरीश्वरजी म.सा., मार्गदर्शक आचार्य भाग्ययशसूरीजी म.सा., प्रेरणा स्त्रोत आचार्य ह्रींकारयशसूरीजी म.सा. की प्रेरणा से। प्रवचन में पूज्य गुरुदेव ने दिल को छू लेने वाली बात कही — "भोजन ज़रूरी है, पर इतना भी मत खाओ कि शरीर पर भारी पड़ जाए। पैसा कमाना ज़रूरी है, लेकिन उसकी कोई सीमा होनी चाहिए। अनलिमिटेड पैसा कभी न कभी नुकसान ज़रूर देता है। अक्सर देखने को मिलता है कि जो ज़्यादा अमीर होते हैं, वही सबसे ज़्यादा माँ-बाप से दूर रहते हैं... जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है, और फिर छोटे-बड़े नशे, बुरी आदतों में इंसान फँस जाता है। कभी-कभी तो यही पैसे वाले लोग दिखावे के चक्कर में अपने संस्कार और पारिवारिक मूल्य भी भुला देते हैं।" गुरुदेव ने साफ कहा — "परिवार के साथ बैठकर खाना, बात करना, समय बिताना — यही असली दौलत है। पर ...

पचास साल का साथ, बच्चों ने खास अंदाज़ में मनाई मम्मी-पापा की शादी की सालगिरह

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18 मई। 2025 रविवार भायंदर मुंबई 18 मई 1975 को शादी के बंधन में बंधे वरिष्ठ कवि छगनलालजी मुथा और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती इन्द्राजी मुथा की शादी को पूरे 50 साल हो गए। इस खास मौके को उनके बच्चों ने कुछ ऐसे अंदाज़ में मनाया कि खुद मम्मी-पापा की आँखें भर आईं और देखने वाले भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके। उनकी बेटी सपना, जो पुणे में रहती है, अचानक मुंबई आ गई। अपनी माँ, जो आँखों से देख नहीं सकतीं, को बहन राखी के साथ मिलकर दुल्हन की तरह सजाया। माँ की आँखें भले न देख सकें, लेकिन चेहरे पर वो खुशी साफ झलक रही थी, जैसे फिर से शादी का दिन जी रही हों। फिर बेटे समीर, राखी और सपना ने मिलकर मम्मी-पापा के पैर धोए, उनका आशीर्वाद लिया, तिलक करके आरती उतारी और शादी के वक्त की एक पुरानी फोटो फ्रेम करवाकर तोहफे में दी। इसके बाद दोनों को सोने की अंगूठियाँ दी गईं, जो उन्होंने प्यार से एक-दूसरे को पहनाईं। वो पल सच में यादगार बन गया। इस मौके पर उनके बेटे जितेन्द्र (बहू शीतल, पोती मान्या) दुबई से और श्रीपाल (बहू दामीना, पोता राघव) ऑस्ट्रेलिया से वीडियो कॉल पर जुड़े। साथ ही दामाद जतीनजी, पुनीतजी और उनके बच्चे लोम...

भारत की सैन्य शक्ति का सुपरसोनिक अभिमान

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नई दिल्ली।  विशेष संवाददाता भारत की रक्षा क्षमताओं में गर्व का प्रतीक बन चुकी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। भारत-रूस की तकनीकी साझेदारी से विकसित यह सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल आज न केवल भारतीय सेना का आत्मविश्वास है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा और सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बन गई है। ‘ब्रह्मोस’ नाम भारतीय ब्रह्मपुत्र और रूसी मॉस्कवा नदी के नामों को जोड़कर रखा गया है, जो दो राष्ट्रों की मैत्रीपूर्ण तकनीकी साझेदारी का प्रतीक है। इसकी विकास यात्रा 1998 में उस समय शुरू हुई जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना की गई। ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति और सटीकता है। यह माक 2.8 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज़ मिसाइलों में स्थान दिलाती है। यह ज़मीन, समुद्र, पनडुब्बी और वायु से दागी जा सकती है, जिससे भारत को त्रि-आयामी प्रतिरोध की अद्वितीय क्षमता प्राप्त हुई है। पाकिस्तान...

चारमीनार के साये में मातम: हैदराबाद में भीषण आग से 17 की मौत, शहर में पसरा सन्नाटा

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  हैदराबाद के दिल चारमीनार के पास रविवार सुबह ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे शहर को हिला दिया। गुलजार हाउस स्थित एक बहुमंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि आग इमारत के निचले हिस्से में मौजूद मोती की दुकान से शुरू हुई और कुछ ही पलों में पूरे ढांचे को अपने आगोश में ले लिया। जब आग लगी, तब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे। धुएं का इतना असर हुआ कि 17 लोगों की मौत दम घुटने से हो गई, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। 10 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 11 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लेकिन तब तक मौत अपना खेल खेल चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार , इमारत में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जिससे हालात और भी भयावह हो गए। धुएं से भरी गलियों में चीख-पुकार मच गई, बचावकर्मियों ने कई लोगों को बेसुध हालत में बाहर निकाला। घटनास्थल पर पहुंचते ही राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद...