सही समय की अहमियत — ब्रांड नहीं, जरूरत बड़ी होती है
काम की चीज़ महंगी नहीं, सही वक्त पर सही होनी चाहिए
आजकल लोग अकसर ब्रांडेड चीज़ों को ही सबसे अच्छा मानते हैं महंगे कपड़े, जूते, घड़ियाँ वगैरह। ऐसा लगता है जैसे जो जितना महंगा पहनता है, वो उतना बड़ा इंसान है। लेकिन असल ज़िंदगी में ऐसा हमेशा नहीं होता।
आपने भी देखा होगा, जो लोग करोड़ों के कपड़े पहनते हैं, बड़े-बड़े ब्रांड्स के शौकीन होते हैं, वो भी कभी-कभी क्रिकेट मैच में सिर्फ 60-70 रुपये की सादी सी टी-शर्ट पहन कर पहुंच जाते हैं। न कोई लोगो, न कोई नाम बस सादगी और आराम।
इसका मतलब साफ है हर मौके पर ब्रांड या कीमत की नहीं, ज़रूरत की अहमियत होती है।
कई बार हम दिखावे में ही उलझे रहते हैं। सोचते हैं लोग क्या कहेंगे, मैं कौन-सी चीज़ इस्तेमाल कर रहा हूँ, कौन सा ब्रांड पहन रहा हूँ। लेकिन सच ये है कि जिंदगी हर पल हमें ये सिखाती है कि जो काम की चीज़ है, वो ही सही होती है चाहे सस्ती हो या महंगी।
तो अगली बार जब कोई चीज़ खरीदें या पहनें, तो ये सोचें कि क्या ये आपको असल में चाहिए, या सिर्फ दिखावे के लिए है?
क्योंकि नाम, शान और पहचान ये सब कपड़ों से नहीं, आपकी सोच और काम से बनती है।
सीधी सी बात है जो चीज़ समय पर काम आ जाए, वही असली ब्रांड है।सही समय की अहमियत — ब्रांड नहीं, जरूरत बड़ी होती है
दिनेश देवड़ा धोका


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