राजभवन में हुआ PYS का 212वां सेशन — आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने दी “ब्लैक बॉक्स” के ज़रिए खुद को समझने की सीख

 


अहमदाबाद, शाहीबाग।

रविवार को शाहीबाग के सरदार पटेल स्मारक राजभवन में एक शानदार और सीख देने वाला कार्यक्रम हुआ। यहाँ परफेक्टिंग यूथ सेशन (PYS) का 212वां सेशन रखा गया, जिसे आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने मार्गदर्शित किया।

इस बार का विषय था “स्टोरी ऑफ ब्लैक बॉक्स”, और आचार्यश्री ने इसे बहुत ही आसान और असरदार तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि जैसे हवाई जहाज़ में एक ब्लैक बॉक्स होता है जो उड़ान के हर पल को रिकॉर्ड करता है, वैसे ही हमारे भीतर भी एक ब्लैक बॉक्स होता है — जो लोगों के व्यवहार, उनकी बातें और हमारे अनुभवों को जमा करता रहता है। अगर इसमें कुछ बुरा भर गया है कोई नाराज़गी, कटुता या गलतफहमी  तो समय रहते उसे बाहर निकाल देना चाहिए, नहीं तो यही चीज़ें हमें अंदर से परेशान करती रहती हैं।

उन्होंने एक और दिलचस्प बात बताई — जैसे हम खाने से पहले उसे देखते हैं, सूंघते हैं, छूते हैं, आवाज़ सुनते हैं और फिर स्वाद लेते हैं, वैसे ही किसी के व्यवहार को भी तुरंत न समझकर थोड़ा सोचकर, समझकर, परखकर आगे बढ़ना चाहिए। तभी रिश्ते मजबूत बनते हैं और गलतफहमियाँ दूर होती हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक गुरुवंदन से हुई, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। फिर ख़ीमराजजी, राजेशकुमारजी  अमितकुमारजी बालर का सम्मान किया गया, जिन्होंने PYS की इस आयोजन का लाभ लिया।

सबसे खास बात ये रही कि जब आचार्य श्री बोल रहे थे, तो पूरा हॉल एकदम शांत था — ऐसा पिन ड्रॉप साइलेंस था कि लगता था जैसे सबकी साँसें थम गई हों। हर कोई ध्यान लगाकर सुन रहा था, सोच रहा था, और अपने मन से जुड़ रहा था।

करीब 1000 से ज़्यादा लोग इस कार्यक्रम में मौजूद थे। मुंबई समेत कई शहरों से भी लोग विशेष रूप से आए थे। सेशन के बाद सभी के लिए स्वादिष्ट और सुंदर भोजन की व्यवस्था भी थी, जिससे सभी के चेहरे पर संतोष और प्रसन्नता साफ नज़र आ रही थी।

इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका ने बताया कि अब हर रविवार को नवंबर महीने तक ऐसे ही सेशन राजभवन में होंगे। हर बार एक नया और ज़रूरी विषय लिया जाएगा — जैसे रिश्तों को कैसे संभालें, गुस्से को कैसे कम करें, समय का सही इस्तेमाल कैसे करें, मन को मज़बूत कैसे बनाएं वगैरह।

ये सेशन सिर्फ सुनने के लिए नहीं हैं — ये अपने आप को समझने, भीतर झाँकने और ज़िंदगी को सही दिशा देने का एक बेहतरीन मौका हैं।

हर युवा, हर विचारशील इंसान के लिए ये सेशन किसी तोहफे से कम नहीं।

अगर आप भी अपने भीतर के ब्लैक बॉक्स को हल्का करना चाहते हैं, तो अगली बार जरूर जुड़ें।

क्योंकि जब सोच बदलती है, तब ज़िंदगी बदलती है।

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