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"विश्व नवकार महामंत्र दिवस" का ऐतिहासिक आयोजन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में गूंजेगा नवकार महामंत्र

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  अहमदाबाद, 3 अप्रैल – जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) के तत्वावधान में 9अप्रैल को विश्वशांति, अहिंसा और मानव कल्याण के पवित्र उद्देश्य को समर्पित "विश्व नवकार महामंत्र दिवस" अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिव्य आयोजन के माध्यम से नवकार महामंत्र की गूंज संपूर्ण विश्व में फैलाकर सकारात्मक ऊर्जा, परोपकार और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया जाएगा। आज अहमदाबाद के प्रतिष्ठित दिनेश हॉल में इस आयोजन के निमित्त कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें गुजरात के गृहमंत्री हर्ष भाई संघवी ने विशेष रूप से सहभागिता की। उन्होंने अपने प्रेरणादायक संबोधन में अहिंसा, परोपकार और आत्मिक उन्नति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जैन धर्म के सिद्धांतों को आधुनिक युग में प्रासंगिक बताया। उनके अनुसार, नवकार महामंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का महामार्ग है, जो आत्मशुद्धि, शांति और सर्वकल्याण का द्योतक है। JITO के इस ऐतिहासिक प्रयास के तहत नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप विश्वभर के 108 देशों में एक साथ किया जाएगा, जिससे संपूर्ण विश्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो...

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, मदुरै का भव्य स्नेहमिलन समारोह अपार उत्साह के साथ संपन्न

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  मदुरै, 30 मार्च 2025 – श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मदुरै द्वारा आयोजित भव्य समारोह की शुरुआत श्रमण भगवान महावीर स्वामी एवं गुरु भगवंतों की गूंजती जयघोष के साथ हुई। इस अवसर पर संघ के मंत्री शांतिलालजी गुलेच्छा ने समारोह में उपस्थित समस्त अतिथियों एवं परिवारों का आत्मीय स्वागत किया। आयोजन में संघ संरक्षक श्रीमान तिलोकचंदजी हरण, नेमीचंदजी बाफना, अध्यक्ष विजयराजजी श्रीश्रीमाल, मंत्री शांतिलाल गुलेच्छा, कोषाध्यक्ष पारसमलजी कंकु चोपड़ा एवं संगठन व प्रचार प्रसार मंत्री दिनेश सालेचा का तिलक, माला पहनाकर अभिनंदन पत्र एवं मोमेंटो देकर भव्य सम्मान किया गया। श्री लीला देवी भवन में आयोजित इस भव्य आयोजन में मदुरै श्वेताम्बर संघ, तेरापंथ सभा एवं श्री सिवांची ओसवाल जैन संघ सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वालों में प्रमुख रूप से जवेरीलाल बाफना, नेनमल कोठारी, मोहनलाल गुलेच्छा, उम्मेदमल गुलेच्छा, भागचंद बाफना, बाबुलाल सुराणा, धनराज चौपड़ा, प्रकाशमल गुलेच्छा, रतनलाल भंडारी, दिलीप हरण, शांतिलाल लुंकड़, राजेश घोड़ा, अशोक जीरावला, श्रेण...

जैन समाज की बेटी याशी जैन ने रचा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

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  छत्तीसगढ़ की बेटी और जैन समाज की गौरव याशी जैन ने अपनी अदम्य साहस और संघर्षशीलता से एक बार फिर भारत का नाम रोशन कर दिया है। पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी याशी ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट कोसियस्ज़को (7,310 फीट) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। इससे पहले उन्होंने माउंट एवरेस्ट, माउंट किलिमंजारो, माउंट एल्ब्रुस और माउंट अकोंकागुआ जैसी विश्व की ऊंची चोटियों पर विजय प्राप्त कर अपनी अद्भुत क्षमता का प्रमाण दिया है। याशी जैन न केवल एक पर्वतारोही हैं, बल्कि साहस, आत्मनिर्भरता और अदम्य इच्छाशक्ति की प्रतीक हैं। अपनी पर्वतारोहण यात्राओं के लिए उन्होंने स्वयं संसाधन जुटाए, एक आईटी कंपनी में कार्यरत रहते हुए कठिन प्रशिक्षण लिया और हर कठिनाई का सामना कर विजय हासिल की। एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान उन्होंने ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ का ध्वज फहराया था, जिसे राज्य के मुख्यमंत्री ने उन्हें सौंपा था। आज जैन समाज की यह बेटी पूरे भारत के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून और समर्पण हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव ...

सम्राट विक्रमादित्य और जैन धर्म:- डा.दिलीप धींग

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  प्रकाशनार्थ :  संदर्भ : भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत् 2082 का प्रारंभ, 30 मार्च, रविवार डॉ. दिलीप धींग  (पूर्व निदेशक : अंतरराष्ट्रीय प्राकृत केन्द्र) भारतीय काल गणना में विक्रम संवत् एक बहुप्रचलित संवत् है । भारतवर्ष के प्रतापी सम्राट  विक्रमादित्य ने इस संवत् का प्रवर्तन किया था। विक्रम संवत् का प्रवर्तन भगवान महावीर निर्वाण  संवत् के 470 वर्ष बाद तथा ईस्वी सन् से 57 वर्ष पूर्व हुआ था। भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर के  साथ शक संवत् और विक्रम संवत् का प्रयोग भी किया जाता है । नेपाल में भी सरकारी कैलेंडर  के रूप में विक्रम संवत् का प्रयोग किया जाता है । यह एक चंद्र कैलेंडर है । इसमें समय के लिए  चंद्रमास और नक्षत्र वर्ष का प्रयोग किया जाता है । अन्य अनेक संवतों के बीच विक्रम संवत् की लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता के अनेक  कारण हैं। इसमें एक कारण राजा विक्रमादित्य का न्यायप्रिय, उदार और उपकारी व्यक्तित्व भी  है । इतिहासकारों, विद्वानों और साहित्यकारों ने अनेक तथ्यों के आधार पर विक्रमादित्य को  जैनधर्मानुयायी सम्राट् बताया है। विक्...

गढ़ सिवाना में होगा चातुर्मास का ऐतिहासिक संगम: प्रमुख पदाधिकारियों की घोषणा

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  गढ़ सिवाना नगर के धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में यह एक स्वर्णिम अवसर है। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, गढ़ सिवाना की विनती स्वीकार कर पूज्य ज्ञान गच्छाधिपति श्रुतधर पंडित 1008 श्री प्रकाशमुनीजी महाराज साहब ने इस वर्ष के चातुर्मास के लिए गढ़ सिवाना को चुना है। यह नगर के धर्म प्रेमी समाजजनों के लिए एक गौरवशाली क्षण है कि वे इस पावन अवसर के साक्षी बनेंगे। चातुर्मासिक वर्षावास के दौरान नगर में आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिक अनुष्ठान, स्वाध्याय, तपस्या और प्रवचन की अविरत धारा प्रवाहित होगी। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए समाज के प्रतिष्ठित और समर्पित व्यक्तियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। मुख्य संयोजक के रूप में श्री राजमलजी कानूंगा (सूरत) की नियुक्ति की गई है, जबकि सह संयोजक की जिम्मेदारी श्री किशनजी छाजेड़ (अहमदाबाद) और श्री गणपतजी बागरेचा (हैदराबाद) को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष पद पर श्री खीमराजजी जिन्नानी (अहमदाबाद) तथा मंत्री पद पर श्री सुरेशकुमारजी चोरड़िया (सूरत) अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इन समर्पित समाज सेवकों के नेतृत्व में यह चात...

नवकार महामंत्र जाप का भव्य समापन: विश्व मंगल की भावना से गूंज उठा कुशल वाटिका प्रांगण

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  अहमदाबाद, 27 मार्च 2025 – विश्व नवकार महामंत्र दिवस के पावन उपलक्ष्य में, जैन समाज की प्रतिष्ठित संस्था जीतो (JITO) अहमदाबाद के मार्गदर्शन में आज कुशल वाटिका , शाहीबाग में एक दिव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। सिवाना सेवा समिति अहमदाबाद और कुशल वाटिका संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस नवकार महामंत्र जाप कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। सैकड़ों श्रद्धालु जब भोर की पावन वेला में एकत्र हुए और नवकार महामंत्र का सस्वर जाप किया , तो पूरा वातावरण दिव्यता से आलोकित हो उठा। सुबह 7 बजे से 8 बजे तक चले इस भक्तिमय आयोजन में जब श्रद्धालु एक स्वर में "णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं..." का जाप करने लगे, तो संपूर्ण प्रांगण मानो जिनशासन के दिव्य स्वरूप का प्रतिबिंब बन गया। मंत्रों की अनुगूंज से हर हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ और वातावरण में विश्व शांति, आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिव्य भावना जाग्रत हो उठी। श्रद्धालुओं ने इस महामंत्र की महिमा को आत्मसात करते हुए, इसे न केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बताया, बल्कि इसे जीवन का आधार बनाने का सं...

गढ़ सिवाना में होगा पूज्य प्रकाश मुनिजी महाराज साहब का चातुर्मास

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  गढ़ सिवाना, 21 मार्च – जैन समाज के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बन गया, जब ज्ञानगच्छाधिपति, श्रुतधर पंडित रत्न, परम पूज्य गुरुदेव 1008 श्री प्रकाश मुनिजी महाराज साहब ने गढ़ सिवाना नगर में इस वर्ष चातुर्मास करने की घोषणा की। इस शुभ समाचार से नगर के जैन समाज में हर्ष और उल्लास की लहर दौड़ गई। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, महावीर मार्ग, गढ़ सिवाना के अध्यक्ष खीमराजजी जिन्नाणी और मंत्री सुरेश चौरड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य गुरुदेव के चातुर्मास को लेकर नगर में भव्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि यह चातुर्मास नगर के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जिसमें धर्म, तप और आराधना की अविरल धारा बहेगी। पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में चार महीने तक गढ़ सिवाना का संपूर्ण वातावरण धर्ममय रहेगा। प्रवचन, स्वाध्याय, तपस्या, आराधना और भक्ति की गूंज से नगर का कोना-कोना आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाएगा। नगरवासी इस अलौकिक संयोग से अभिभूत हैं और चातुर्मास की तैयारियों को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं। गढ़ सिवाना की पावन धरा को इस आध्यात्मिक सौभाग्य की प्राप्ति होने पर सम्प...

आचार्यश्री नवरत्नसागर सूरीश्वरजी का 82वां जन्मोत्सव : गुणानुवाद सभा में गूंजे श्रद्धा और संकल्प के स्वर

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  सोमवार, 17 मार्च को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ आचार्यश्री नवरत्नसागर सूरीश्वरजी का 82वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदसौर में आयोजित मुख्य समारोह में गुरुदेव के पट्टधर युवाचार्यश्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वरजी और मोहनखेड़ा के गच्छाधिपति आचार्यश्री हितेषचंद्र सूरीश्वरजी की दिव्य निश्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित गुणानुवाद सभा में गुरुदेव के तप, त्याग और समर्पण से भरे जीवन को नमन किया गया। आचार्यश्री हितेषचंद्रजी ने कहा कि गुरुदेव सहज, सौम्य और सरल व्यक्तित्व के धनी थे। वे अपने से छोटे साधु-संतों के प्रति भी अपार स्नेह रखते थे। युवाचार्यश्री विश्वरत्नसागरजी ने अपने गुरु के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प व्यक्त किया। सभा में गणीवर्यश्री कीर्तिरत्न सागरजी ने गुरुदेव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। इस भव्य आयोजन में समाज के कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मालवा महासंघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संतोष मेहता, संगठन प्रमुख राजेश जैन मानव, महासचिव वीरे...

मंदसौर में भक्ति का महासागर: 82 कलाकारों की भव्य प्रस्तुति और भक्तों की ऐतिहासिक भीड़!

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  मंदसौर की धरती ने 16 मार्च 2025 रविवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखा। गुरुदेव आचार्य श्री नवरत्न सागरसुरीश्वर जी म.सा. के 82वें जन्मदिन महामहोत्सव के शुभ अवसर पर संजय गांधी उद्यान में आयोजित भव्य भक्ति संध्या में आस्था का सागर उमड़ पड़ा। शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक चले इस दिव्य आयोजन में 5000 से अधिक गुरु भक्तों की उपस्थिति ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक था कि संजय गांधी उद्यान पहली बार छोटा पड़ गया, लेकिन भक्ति की उमंग विशाल होती चली गई। संध्या का मुख्य आकर्षण रहे संघवी दीपक करनपुरिया, जिनकी प्रेरणादायक उपस्थिति और अनुपम प्रस्तुति ने भक्ति की ऊर्जा को और भी बढ़ा दिया। उनके साथ देवेश जैन, देवेन्द्र पंवार, डॉ. सीमा दफ्तरी, प्रेरणा भटनागर, नमन जैन, महावीर जैन, संयम पामेचा, कमलेश सिसोदिया, योगेश जी, श्रेयांश, मोहित जैन, मानव डोसी, आशीष मराठा, यश बागरेचा, लखन भाई, कवि ध्रुव तारा और राजेंद्र परिहार सहित 82 सुप्रसिद्ध कलाकारों ने गुरुभक्ति से सराबोर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर भजन के साथ भाव-व...

२३ वे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ का स्तवन :- रचियता नैनमलजी जैन चेन्नई

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  आज २३ वे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ का च्यवन एवं केवल ज्ञान कल्याणक है। अतः प्रभु जी के  चरणों में दो भक्ति पुष्प समर्पित  हैं। (तर्ज: ओ पवन वेग से उड़नेवाले) तू पारस पावन चरणों में मन रहना, तारक का नाम लेना, श्रद्धा से काम।लेना,  जिन आना दिल धार रे,                      तू ना जरा गम करना चेतन, नैया गर मझधार में, जिन चरणों से बढ़ कर कोई, सुख नहीं संसार में, तारने की नाम में , जिन के अजब तासीर है, आसरे झूठे मिलेंगे, दुनिया के बाजार में, झूठा है साथ जग का, सच्चा है साथ जिनका, पल नहीं प्रभु तू विसार re,                          तू हर कोई उलझा मकान, रोटी कपड़े के जाल में, बचा नही कोई कर्मों से, जल थल नभ पाताल में, कई रंग के कई रूप के धोखे मिलते हैं यहां, नैन नही है कोई तेरा, तारक बिन बदहाल में, फनी है प्रीत जग की, साची है प्रीत जिनकी, जिन का तू कर एतबार रे,                      कर ******************...

गुरुदर्शन यात्रा के सफल समापन पर श्रीश्रीमाल परिवार का भव्य सम्मान

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  मदुरै (तमिलनाडु): श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में सेलम शहर में विराजित पूज्य गुरुदेव श्री नरेशमुनिजी म. सा. एवं युवा मनीषी श्री शालिभद्र मुनिजी म. सा. आदि ठाणा के पावन दर्शनार्थ आयोजित गुरुदर्शन वंदन यात्रा के समापन पर श्रीश्रीमाल परिवार का भव्य सम्मान किया गया। इस यात्रा में लाभार्थी विजराजजी, दिनेशकुमारजी एवं आशीषकुमारजी श्रीश्रीमाल परिवार ने 50 श्रद्धालुओं के साथ गुरुदर्शन वंदन का पुण्य अर्जित किया। इस पावन यात्रा की अनुमोदना स्वरूप श्रावक संघ द्वारा लाभार्थी परिवार का तिलक, माला, साफा, चुनड़ी एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं गणमान्यजनों ने श्रीश्रीमाल परिवार के इस पवित्र कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे आध्यात्मिक समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इस अवसर पर संघ के दीपचंद मोदी, रमेशकुमार कांकरिया, भागचंद बाफना, सुरेश सालेचा, प्रकाशमल गुलेच्छा, पारसमल चौपड़ा, शांतिलाल गुलेच्छा, धनराज चौपड़ा, रतनचंद भंडारी, मुकेशकुमार चौपड़ा, प्रदीप बाबेल, आनंद भंडारी, दिलखुश भंडारी, सुमित सुराणा, दिनेश श्रीश्रीमाल सहित अन...

संप्रदाय से नहीं, जैन धर्म से हो हमारी पहचान #JAIN #JAINISM

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 संप्रदाय नहीं जैनत्व  प्राथमिकता हो जैन समुदाय में एकता और सद्भाव की भावना सदैव से रही है। जैन धर्म अपनी अहिंसा, करुणा और सत्य के सिद्धांतों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यह धर्म न केवल आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग दिखाता है, बल्कि समाज में प्रेम और एकता का भी संदेश देता है। समय के साथ, जैन धर्म विभिन्न संप्रदायों में विभाजित हुआ, जिनमें श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी, तेरापंथी आदि प्रमुख हैं। इन सभी संप्रदायों की अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और धार्मिक दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन इनका मूल आधार एक ही है—अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह। वर्तमान समय में यह देखा गया है कि विभिन्न जैन संप्रदायों के विचारक, साधु-साध्वी, तथा साहित्यकार कभी-कभी अपने विचारों को स्थापित करने के प्रयास में अन्य संप्रदायों की आलोचना कर देते हैं। इससे श्रावकों के मन में द्वेष और असहमति की भावना जन्म ले सकती है। किन्तु हमें यह समझना चाहिए कि जैन धर्म का मूल तत्व अनेकांतवाद है, जो हमें सिखाता है कि सत्य के विभिन्न पक्ष हो सकते हैं। भगवान महावीर ने अनेकांतवाद का संदेश दिया था, जिसका अर्थ है कि सत्य एक ही हो ...