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महंगी शादियाँ, खाली हाथ समाज- दिनेश देवड़ा धोका

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आज अगर हम ईमानदारी से पूरे हालात देखें तो समझ में आता है कि शादियाँ अब खुशी और संस्कार का अवसर कम, और खर्च व दिखावे की मजबूरी ज्यादा बनती जा रही हैं। हमारे आसपास के रिसॉर्ट्स में साल भर में करीब 300 शादियाँ हो जाती हैं, जिनमें रिसॉर्ट का रेंट, इवेंट मैनेजमेंट, सजावट, लाइट-साउंड, फोटो-वीडियो और खासतौर पर खाने-पीने पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। यहीं बात खत्म नहीं होती, इसमें मेहमानों के आने-जाने का किराया, कई दिनों का होटल खर्च और ड्रेसकोड के नाम पर हर परिवार द्वारा खरीदे गए नए कपड़े, जूते और गहने भी जोड़ दिए जाएँ तो यह रकम साल भर में लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये तक पहुँच जाती है। यह पैसा किसी एक घर का नहीं, बल्कि पूरे समाज की मेहनत की कमाई है, जो कुछ दिनों की चकाचौंध में खत्म हो जाती है और समाज के हाथ में कोई स्थायी संपत्ति नहीं बचती। सबसे ज्यादा सोचने वाली बात यह है कि इस दिखावे का बोझ अक्सर मध्यम वर्ग पर पड़ता है। कई परिवार सिर्फ “लोग क्या कहेंगे” के डर से कर्ज लेकर शादियाँ करते हैं, अपनी जरूरी जरूरतें टाल देते हैं और खुशी का अवसर तनाव में बदल जाता है। दूसरी तरफ यह सारा पैस...

*बिना किश्त का स्वास्थ्य बीमा - दिनेश दोशी*

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ये एक सत्यघटना है जो मेरी आंखों के सामने हुई है। भरवाड़ जाति के आपसी सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण मैंने अहमदाबाद के साबरमती में अपनी नजरों से देखा है जब मेरे पिताजी को इंडस हॉस्पिटल में भर्ती किया था। आज आप सबके समक्ष में एक संस्मरण प्रस्तुत कर रहा हूं। मैंने करीब 20 साल पहले मेरे पूज्य पिताजी को दिल का दौरा पड़ने पर अहमदाबाद के साबरमती में Indus Hospital में भर्ती किया था, तब उसी अस्पताल के बाहर भरवाड़ रबारी जाति के लोगों का बहुत बड़ा झुंड देखा था जो उनकी जाति के किसी भाई के किसी ऑपरेशन Surgery पर आए थे, और उनकी नैतिक समझदारी को मैने करीब से देखा और महसूस किया। उसी दिन दिल में एक बात समझ में आ गई थी कि ये लोग अनपढ़ होते हुए भी अपनी नैतिक जवाबदारी को बकायदा समझते है और अपन पढ़ेलिखे होकर भी नहीं। हुआ यूं कि उन्हें मैंने अपनी आंखों के सामने उस समाज के किसी असहाय परिवार के किसी मरीज के लिए काफी बड़ी धनराशि इकठ्ठी करते देखा, हर आदमी अपनी अपनी सामर्थ्य के हिसाब से कुछ न कुछ उस झोले में डाल रहा था, और देखते ही देखते एक बहुत बड़ी राशि जमा हो गई और वो धनराशि मरीज के परिवार को चुपचाप थमा दी और ह...

पावापुरी जीव मैत्रीधाम में शुरू हुआ उपधान तप: देश विदेश से 600 से ज़्यादा आराधक पहुंचे

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  राजस्थान के सिरोही ज़िले में स्थित पावापुरी जीव मैत्रीधाम तीर्थ इन दिनों पूरी तरह आध्यात्मिक और तपोमय वातावरण से भर गया है, क्योंकि आचार्य उदयवल्लभ सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में यहाँ उपधान तप की शुरुआत होने जा रही है। देश-विदेश से 600 से अधिक आराधक इस महान साधना में शामिल होने के लिए पावापुरी पहुँच चुके हैं। पहला प्रवेश 5 दिसंबर और दूसरा प्रवेश 7 दिसंबर को होगा। पावापुरी का शांत, स्वच्छ और नयनरम्य वातावरण, तपकों के अनुरूप तैयार की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाएँ और तीर्थ की दिव्यता हर आराधक को भीतर तक स्पर्श कर रही है। KP संघवी परिवार द्वारा निर्मित इस विशाल तीर्थ में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय, पावापुरी की तर्ज पर बना भगवान महावीर स्वामी का जल मंदिर और 5000 से अधिक गौधन वाली भव्य गौशाला इसकी विशेष पहचान है। उपधान तप की महिमा, गुरुदेव की प्रेरक वाणी और तप क्रियाओं की गहराई को देखते हुए छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ आराधक तक सभी में खास उत्साह है। इस उपधान तप के सम्पूर्ण लाभार्थी मंजुला बेन रमनलाल वाडीलाल शहा – आनंद मंगल परिवार हैं, जिनकी भावना और सेवा से यह आयोजन और भी मंगलमय बन रहा है। स...