*बिना किश्त का स्वास्थ्य बीमा - दिनेश दोशी*
ये एक सत्यघटना है जो मेरी आंखों के सामने हुई है। भरवाड़ जाति के आपसी सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण मैंने अहमदाबाद के साबरमती में अपनी नजरों से देखा है जब मेरे पिताजी को इंडस हॉस्पिटल में भर्ती किया था। आज आप सबके समक्ष में एक संस्मरण प्रस्तुत कर रहा हूं। मैंने करीब 20 साल पहले मेरे पूज्य पिताजी को दिल का दौरा पड़ने पर अहमदाबाद के साबरमती में Indus Hospital में भर्ती किया था, तब उसी अस्पताल के बाहर भरवाड़ रबारी जाति के लोगों का बहुत बड़ा झुंड देखा था जो उनकी जाति के किसी भाई के किसी ऑपरेशन Surgery पर आए थे, और उनकी नैतिक समझदारी को मैने करीब से देखा और महसूस किया। उसी दिन दिल में एक बात समझ में आ गई थी कि ये लोग अनपढ़ होते हुए भी अपनी नैतिक जवाबदारी को बकायदा समझते है और अपन पढ़ेलिखे होकर भी नहीं। हुआ यूं कि उन्हें मैंने अपनी आंखों के सामने उस समाज के किसी असहाय परिवार के किसी मरीज के लिए काफी बड़ी धनराशि इकठ्ठी करते देखा, हर आदमी अपनी अपनी सामर्थ्य के हिसाब से कुछ न कुछ उस झोले में डाल रहा था, और देखते ही देखते एक बहुत बड़ी राशि जमा हो गई और वो धनराशि मरीज के परिवार को चुपचाप थमा दी और हिम्मत बंधाई। कितनी बड़ी इंसानियत की मिसाल, हम लोग पढ़े लिखे होकर भी शायद ऐसा नहीं करते है या नहीं कर पाते है। इससे बड़ा मेडिक्लेम क्या हो सकता है जिसमें कोई किश्त नहीं भरनी पड़ती है। इसी वाक्ये को याद करते हुए मुझे आज ये पोस्ट लिखने का मन हुआ कि क्यूं ना हम भी अपने 2 क्षेत्र या गांव में साधार्मिक बंधुओं के लिए एक ऐसे स्वास्थ्य सुरक्षा फंड की व्यवस्था करें ताकि कोई भी असहाय व्यक्ति इलाज के लिए न तरसे या ना कभी संकोच करे तथा न ही असमय दम तोड़े। अगर अपना समाज भी इसी तरह की सोच बना ले तो शायद किसी को मेडिक्लेम की भी जरूरत नहीं पड़े और सारा इलाज सुचारू रूप से हो जाए। मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप सब आगेवान अपने 2 क्षेत्र में इस विषय को समाज के सामने प्रस्तुत करके चर्चा करवाएंगे और इस नेक काम को साकार करने की भरपूर कोशिश करेंगे। कहावत है वादे अक्सर टूट जाते है मगर कोशिशें हमेशा कामयाब रहती है।
इस पोस्ट को लिखने में कोई अविवेक या असावधानी हुई हो तो क्षमा करे।
धन्यवाद
दिनेश एस दोशी मंडार/चेन्नई
81444 33583
लेखन दिनांक 7 दिसंबर 2025


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