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मेवाड़ के पांच रत्न: शौर्य की ज्योत अनंतकाल तक जलती रहेगी

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  मेवाड़ के पंचशील: शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की अमरगाथा वीरभूमि मेवाड़ केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। इसकी मिट्टी में जन्म लेने वाले हर योद्धा ने यह सिद्ध किया कि पराजय से अधिक सम्मानजनक बलिदान होता है, और स्वतंत्रता से बड़ा कोई सुख नहीं। इस गौरवशाली इतिहास की नींव जिस महापुरुष ने रखी, वह थे बाप्पा रावल, जिनके पराक्रम ने न केवल मेवाड़ बल्कि सम्पूर्ण भारतभूमि की रक्षा की। उन्होंने 734 ईस्वी में गहलोत वंश की स्थापना कर चित्तौड़गढ़ को अपनी राजधानी बनाया और अरब आक्रांताओं को धूल चटाकर यह सिद्ध कर दिया कि यह धरती केवल उन लोगों के लिए है, जो धर्म और न्याय की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। वे केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति के संरक्षक भी थे, जिन्होंने एक ऐसे राज्य की नींव रखी, जो आने वाली कई शताब्दियों तक स्वतंत्रता और स्वाभिमान की मशाल जलाए रखेगा। जब चित्तौड़ पर खिलजी के आक्रमणों से मेवाड़ कमजोर हो गया, तब राणा हमीर ने इसे पुनः स्वतंत्र कराया और खोई हुई प्रतिष्ठा लौटाई। वे बाप्पा रावल के वंशज थे, और उनका पुनरुत्थान मेवाड़ के लिए एक नए स्व...

लाल बहादुर शास्त्री: सादगी, स्वाभिमान और देशभक्ति की जीवंत गाथा

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  लाल बहादुर शास्त्री भारतीय राजनीति के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपने सादगीपूर्ण जीवन, अडिग संकल्प और राष्ट्रभक्ति से देशवासियों को प्रेरित किया। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का उदाहरण है। उन्होंने कभी भी वैभव और पद के पीछे भागने के बजाय जनसेवा को प्राथमिकता दी और देश की अखंडता और आत्मनिर्भरता के लिए कार्य किया। 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री का प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। जब वे मात्र डेढ़ वर्ष के थे, तब उनके पिता शारदा प्रसाद का निधन हो गया। उनकी माता रामदुलारी देवी ने अत्यंत कठिनाइयों के बीच उनका पालन-पोषण किया। बचपन से ही शास्त्री जी के भीतर एक स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व आकार ले रहा था। उनके आत्मसम्मान और साहस का एक उदाहरण उनके बचपन की एक घटना में देखने को मिलता है। एक बार वे अपने मित्रों के साथ एक मेले में गए थे, लेकिन जब घर लौटने का समय आया तो उनके पास नाव का किराया चुकाने के लिए पैसे नहीं थे। किसी से मदद मांगने के बजाय उन्होंने गंगा नदी तैरकर पार करने का निश्चय किया। यह उ...

गुजरात में मौसम का रंग बदलेगा: कहीं लू के थपेड़े, कहीं बरसेगा पानी, तो कहीं आएगी आंधी

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  अहमदाबाद। गुजरात में मार्च भर ताबड़तोड़ गर्मी पड़ी, लेकिन अब मौसम करवट बदलने वाला है। आने वाले दिनों में कहीं लू के थपेड़े लगेंगे, कहीं आसमान से बूंदाबांदी होगी, तो कहीं तेज आंधी-तूफान का डर बना रहेगा। मौसम विभाग ने पोरबंदर में जबरदस्त लू चलने की चेतावनी दी है, वहीं सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर गुजरात के कई जिलों में आंधी के साथ बिजली गिरने की भी संभावना है। पोरबंदर में सोमवार और मंगलवार को भीषण गर्मी पड़ेगी और लू चलेगी, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। दूसरी तरफ, सूरत, नवसारी, वलसाड, तापी, भरूच और डांग जैसे इलाकों में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश गिरने के आसार हैं। अमरेली और भावनगर में भी हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। उत्तर गुजरात के अरावली, खेड़ा, आनंद, पंचमहल, दाहोद और महिसागर जिलों में तेज आंधी-तूफान का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने कहा है कि इन इलाकों में तेज हवा चलेगी और कहीं-कहीं बिजली गिरने की भी संभावना है। हवा की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ गिरने और नुकसान होने का डर रहेगा। अहमद...

स्पाइसजेट फ्लाइट का टायर फटा, पायलट की सूझबूझ से 200 यात्रियों की जान बची

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  रविवार, 30 मार्च 2025 की सुबह जयपुर से चेन्नई जा रही स्पाइसजेट फ्लाइट SG-9046 के टायर में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण चेन्नई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। विमान ने रात 1:55 बजे जयपुर से उड़ान भरी थी, और उसमें 200 यात्री और क्रू मेंबर्स सवार थे। उड़ान के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने पायलट को सूचना दी कि विमान के टायर में खराबी है। यह सुनते ही पायलट ने तुरंत सतर्कता बरतते हुए चेन्नई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। सुबह 4:55 बजे एयरपोर्ट पर आपातकाल घोषित कर दिया गया, और सुरक्षा इंतजामों के बीच विमान को सुबह 5:46 बजे सुरक्षित लैंड करा लिया गया। लैंडिंग के बाद जब विमान की जांच की गई, तो पता चला कि इसके दूसरे मुख्य पहिए के टायर की एक परत गायब थी, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्य से, सभी यात्री सुरक्षित हैं, और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यात्रियों के अनुसार, उड़ान के दौरान एक तेज धमाके जैसी आवाज आई, जिससे कुछ देर के लिए घबराहट फैल गई। हालांकि, क्रू मेंबर्स ने सूझबूझ से स्थिति संभाली और यात्रियों को शांत किया। विमान के सुरक्षित लैंड होने के...

"तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन की वापसी! नए चेहरे के साथ मचने वाली है धूम"

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  मुंबई: गोकुलधाम सोसाइटी में फिर गूंजेगी "टप्पू के पापा..."? जी हां! मीडिया सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में दयाबेन के किरदार को नया चेहरा मिल गया है! वर्षों से दर्शक इस किरदार की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, और अब वह घड़ी आ गई है जब शो में फिर से दयाबेन का हंसता-मुस्कुराता अंदाज देखने को मिलेगा। खबरों की मानें तो नई दयाबेन के लिए चयन पूरा हो चुका है, और उनके साथ मॉक शूट भी किया गया है। हालांकि, मेकर्स अभी तक नाम को गुप्त रख रहे हैं, जिससे फैंस की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। लेकिन एक बात तय है—जल्द ही दर्शकों को दयाबेन का वही चुलबुला, नटखट और एनर्जी से भरपूर अवतार नए अंदाज में देखने को मिलेगा! शो के निर्माता असित मोदी ने कई बार कहा था कि वह दयाबेन को वापस लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। दिशा वकानी की वापसी अब संभव नहीं लग रही थी, क्योंकि वह अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। लेकिन अब, नई दयाबेन के आते ही गोकुलधाम सोसाइटी में फिर से हलचल मचने वाली है! क्या जेठालाल फिर से अपनी दया को देखकर खुशी से झूम उठेंगे? ...

म्यांमार में विनाशकारी भूकंप, 1000 से अधिक मौतें, भारतीय भी फंसे

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  म्यांमार और थाईलैंड में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में केंद्रित इस भूकंप के झटके थाईलैंड, बांग्लादेश और भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों तक महसूस किए गए। इस आपदा में अब तक म्यांमार में 1,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, मृतकों की संख्या 10,000 तक पहुंच सकती है। भूकंप के कारण कई ऐतिहासिक इमारतें और पुल ध्वस्त हो गए हैं, जबकि बिजली और इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। म्यांमार में एक प्राचीन बौद्ध मठ पूरी तरह से ढह गया, जिसके मलबे में कई श्रद्धालु दब गए हैं। इसी तरह, एक छोटे बांध के क्षतिग्रस्त होने से कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। बचाव कार्यों में बाधा पहुंचाने वाली एक और बड़ी चुनौती है संचार प्रणाली का ठप हो जाना, जिससे राहतकर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जहां एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत गिरने स...

शुभमन गिल का रिकॉर्ड: सबसे तेज 1000 IPL रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज

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  गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इतिहास रच दिया है। वह इस मैदान पर सबसे तेज 1000 IPL रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि मात्र 20 पारियों में हासिल की, जो IPL में किसी भी भारतीय बल्लेबाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस लिस्ट में सबसे तेज 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल के नाम है, जिन्होंने बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में मात्र 19 पारियों में यह कारनामा किया था। गिल ने इस रिकॉर्ड को मुंबई इंडियंस के खिलाफ IPL 2025 के अपने दूसरे मुकाबले के दौरान चौथे ओवर में हासिल किया। गिल ने अहमदाबाद में अब तक 60.23 की औसत और 160.25 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं। 2023 सीजन में उन्होंने इस मैदान पर 572 रन बनाए थे, जिसमें दो शानदार शतक शामिल थे। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें अहमदाबाद के मैदान का बेताज बादशाह बना दिया है और IPL में उनकी निरंतरता को दर्शाया है। गिल के अलावा, डेविड वॉर्नर (22 पारियां, राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम, हैदराबाद), शॉन मार्श (26 पारियां, मोहाली) और सूर्यकुमार याद...

राजस्थान स्कूल, शाहिबाग, अहमदाबाद में श्री झाबरमलजी भोजनगरवाला मेमोरियल कॉन्फ्रेंस हॉल का भव्य उद्घाटन

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  अहमदाबाद, 30 मार्च: राजस्थान स्कूल, शाहिबाग में आज श्री झाबरमलजी भोजनगरवाला (संस्थापक अध्यक्ष) मेमोरियल कॉन्फ्रेंस हॉल का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर परम आदरणीय दानवीर श्री रमाकांतजी भोजनगरवाला ने हॉल का उद्घाटन किया। यह स्मृतिसभागार उनके स्वनामधन्य परम पूज्य पिताश्री झाबरमलजी भोजनगरवाला की पुण्यस्मृति को समर्पित है। इस अवसर पर राजस्थान स्कूल के ट्रस्टियों, नगर के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों एवं समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में राजस्थान सेवा समिति की ओर से विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे श्री रमाकांतजी भोजनगरवाला एवं उनके परिवार का हार्दिक अनुमोदन किया गया। उनके सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण और दानवीरता की सराहना की गई। श्री रमाकांतजी भोजनगरवाला का व्यक्तित्व अनुकरणीय एवं गौरवशाली रहा है। वे सदैव समाजहित में अपने बहुमूल्य समय और आर्थिक सहयोग के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में संलग्न रहते हैं। विद्यालय के नवनिर्माणाधीन भवन योजनाओं को साकार करने में भामाशाहों द्वारा उदारतापूर्वक सहयोग राशि प्रदान की गई, जिससे राजस्थान स्कूल की आ...

93 वर्ष की उम्र में पानी देवी का कमाल: बीकानेर की दादी ने बैंगलोर में जीता मेडल

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  बीकानेर की 93 वर्षीय पानी देवी ने यह साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है। उन्होंने बैंगलोर में आयोजित नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल जीतकर न केवल बीकानेर बल्कि पूरे राजस्थान को गौरवान्वित किया है। उनका यह साहसिक कारनामा बुजुर्गों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। पानी देवी का जीवन हमेशा से संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल रहा है। युवावस्था से ही वे खेल और फिटनेस के प्रति जागरूक रही हैं और आज भी उनकी ऊर्जा और समर्पण देखते ही बनता है। बैंगलोर में हुई इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने अपने हौसले से सभी को चौंका दिया और साबित किया कि इच्छाशक्ति और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मेडल जीतने के बाद पानी देवी ने कहा कि उम्र कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर जज़्बा और मेहनत साथ हो। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शहरवासियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाइयाँ दीं। उनकी जीत ने यह संदेश दिया कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है, चाहे उम्र कोई भी हो।

जीतो का पावन अभियान – नवकार महामंत्र का गुणगान

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  नौ अप्रैल का शुभ प्रभात, लेकर आया पावन बात। जीतो का संकल्प महान, विश्व कल्याण का अरमान।। 108 देशों में गूंजेगा नाम, नवकार मंत्र का होगा गान। शुद्ध भावना, निर्मल ध्यान, शांति से भर जाए जहान।। मंत्र ये पावन, मंत्र ये शुभ, हर कण-कण में लाए अनुराग। आत्मा जागे, विकार मिटे, अहिंसा का हो हर मन में राग।। जीतो का यह दिव्य प्रयास, लाए जग में नई मिठास। धर्म, शांति, प्रेम का दीप, नवकार से मिटें संताप।। दिनेश देवड़ा धोका की शुभकामनाएं, हर मन में नव ऊर्जा आएं। विश्व शांति का दीप जलाएं, सकल जगत में मंगल छाए।। चलो सभी मिल साथ जुड़ें, नवकार का प्रकाश बढ़े। जीतो संग नवकार गाएं, विश्व में शुभता की गूंज उठाएं।। दिनेश देवड़ा धोका अहमदाबाद

राजस्थान दिवस: शौर्य, संस्कृति और स्वाभिमान का पर्व

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  राजस्थान, जिसे वीरों की भूमि कहा जाता है, अपनी गौरवशाली परंपराओं, समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के लिए संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। यह केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की जीवंत गाथा है। हर वर्ष 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है, जो इस धरती के एकीकरण की ऐतिहासिक घड़ी की याद दिलाता है। 30 मार्च 1949 को विभिन्न रियासतों के संगम से राजस्थान के आधुनिक स्वरूप का निर्माण हुआ, और तभी से यह दिन प्रदेशवासियों के लिए गौरव और उत्सव का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता से पहले राजस्थान अनेक रियासतों में विभाजित था। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, मेवाड़ और मारवाड़ जैसे राज्यों का अपना अलग अस्तित्व था। भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन के प्रयासों से इन रियासतों का एकीकरण किया गया। 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को मिलाकर 'ग्रेटर राजस्थान' की स्थापना हुई, जिससे राजस्थान का स्वरूप पूर्ण हुआ और इस वीरभूमि की गरिमा और अधिक उज्ज्वल हुई। राजस्थान की संस्कृति इसका वास्तविक श्रृंगार है। यहाँ के लोकगीतों क...

जैन समाज की बेटी याशी जैन ने रचा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

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  छत्तीसगढ़ की बेटी और जैन समाज की गौरव याशी जैन ने अपनी अदम्य साहस और संघर्षशीलता से एक बार फिर भारत का नाम रोशन कर दिया है। पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी याशी ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट कोसियस्ज़को (7,310 फीट) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। इससे पहले उन्होंने माउंट एवरेस्ट, माउंट किलिमंजारो, माउंट एल्ब्रुस और माउंट अकोंकागुआ जैसी विश्व की ऊंची चोटियों पर विजय प्राप्त कर अपनी अद्भुत क्षमता का प्रमाण दिया है। याशी जैन न केवल एक पर्वतारोही हैं, बल्कि साहस, आत्मनिर्भरता और अदम्य इच्छाशक्ति की प्रतीक हैं। अपनी पर्वतारोहण यात्राओं के लिए उन्होंने स्वयं संसाधन जुटाए, एक आईटी कंपनी में कार्यरत रहते हुए कठिन प्रशिक्षण लिया और हर कठिनाई का सामना कर विजय हासिल की। एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान उन्होंने ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ का ध्वज फहराया था, जिसे राज्य के मुख्यमंत्री ने उन्हें सौंपा था। आज जैन समाज की यह बेटी पूरे भारत के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून और समर्पण हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव ...

बाड़मेर में 29-30 मार्च को गूंजेगा वाणी उत्सव – 500 से अधिक कलाकार देंगे भव्य प्रस्तुतियाँ

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  राजस्थान की लोकधरा एक बार फिर भक्ति और लोक संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गूंजेगी, जब वाणी उत्सव 2025 का भव्य आयोजन 29 और 30 मार्च को द हवेली रिसॉर्ट, बाड़मेर में होगा। ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान और रूमा देवी फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस अनूठे आयोजन में 500 से अधिक वाणी गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। यह महोत्सव न केवल संगीत का संगम होगा, बल्कि हमारी लोक परंपरा, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी होगी। इस बार वाणी उत्सव में एक विशेष पहल के तहत मातृशक्ति के लिए हरजस गायन का एक अलग मंच तैयार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से गूंजती इस अद्भुत कला को एक नई पहचान मिलेगी। राजस्थान और गुजरात के पारंपरिक लोक कलाकारों के साथ-साथ देशभर के ख्यातिनाम कलाकार इस मंच पर अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। इस प्रतिष्ठित आयोजन में पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया (मध्यप्रदेश), कच्छ के प्रसिद्ध वाणी गायक मुरालाला मारवाड़ा, जैसलमेर के महेशाराम, इंदौर के राजमल मालवीय, जालौर के जोगभारती, सांचौर के सुरेश लोहार, थराद के ज...

गर्मियों में यात्रियों को बड़ी राहत: भारतीय रेलवे ने गुजरात और राजस्थान के लिए विशेष ट्रेनें चलाईं

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  गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने गुजरात और राजस्थान से जुड़ी कई समर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इस फैसले से यात्रियों को आरामदायक और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा। अहमदाबाद-पुरी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (09453/09454) अहमदाबाद से वडोदरा, सूरत, जलगांव, नागपुर, रायपुर होते हुए पुरी तक जाएगी, जिसमें 20 स्लीपर क्लास डिब्बे होंगे। अहमदाबाद-हुब्बल्लि स्पेशल (07314/07313) अहमदाबाद से वडोदरा, सूरत, वसई रोड, पुणे होते हुए हुब्बल्लि पहुंचेगी, जिसमें थर्ड एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के कोच होंगे। मुंबई सेंट्रल-खातीपुरा (जयपुर) त्रि-साप्ताहिक स्पेशल (09001/09002) मुंबई से वडोदरा, पालनपुर, अजमेर होते हुए जयपुर पहुंचेगी, जो रात 10:20 बजे रवाना होकर सुबह 4:40 बजे जयपुर पहुंचेगी और इसमें 16 डिब्बे (एसी व स्लीपर) होंगे। उदयपुर सिटी-पटना साप्ताहिक स्पेशल (09651/09652) उदयपुर से अजमेर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज होते हुए पटना जाएगी, जो मंगलवार को उदयपुर से और गुरुवार को पटना से रवाना होगी, इसमें 22 डिब्बे (एसी, स्लीपर, जनरल) होंगे। इसके अलावा, पश्चिम ...

राजस्थान-गुजरात के बीच 116 किमी लंबी नई रेल लाइन, 15 स्टेशनों और 13 सुरंगों का होगा निर्माण

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  राजस्थान से गुजरात की यात्रा को और सुगम बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने 116 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। यह रेलमार्ग न केवल यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। अंबाजी-आबूरोड-तारंगा हिल के बीच इस रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस परियोजना की लागत करीब 28 अरब रुपये है और इसके तहत सिविल व ट्रैक कार्यों के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। परियोजना के अंतर्गत 13 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई 13 किलोमीटर होगी। ये सुरंगें उधमपुर-कटरा रेल परियोजना की तरह अत्याधुनिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) से बनाई जाएंगी। इसके अलावा, आबूरोड ब्लॉक के सुरपगला गांव के पास देश के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में से एक 80 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण होगा। रेलवे की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से राजस्थान के सिरोही और गुजरात के मेहसाणा, साबरकांठा व बनासकांठा जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। धार्मिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। अंबाजी शक्तिपीठ, तारंगा हिल और आबूरोड जैसे तीर्थस्थलों को रेल क...

बिजली के झटके नहीं, अब मुनाफे की चमक! पावर कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल

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  भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों पावर सेक्टर की कंपनियां निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दे रही हैं। बिजली की बढ़ती मांग, सरकार की ऊर्जा नीतियों और कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के चलते एनटीपीसी, पावर ग्रिड, टाटा पावर, अडानी पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और एनएचपीसी जैसी कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी देखी जा रही है। एनटीपीसी के शेयरों ने गुरुवार को 1.88% की छलांग लगाकर ₹360.80 का स्तर छू लिया, जबकि सोमवार को इसमें 4.61% की शानदार बढ़त दर्ज की गई, जिससे इसका शेयर ₹367.35 पर बंद हुआ। यह अभी भी अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹448.30 से कुछ नीचे है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इसमें और उछाल देखने को मिल सकता है। इसी तरह, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के शेयर भी जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को इसका शेयर 1.22% की बढ़त के साथ ₹294.90 पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को इसमें 3.14% की वृद्धि हुई। हालांकि यह अब भी अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर ₹366.20 से थोड़ा पीछे है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को अभी और मुनाफा मिलने की उम्मीद है। टाटा पावर भी इस...

रिलायंस पावर के निवेशकों को बंपर मुनाफा! 5 साल में 1 लाख से 37 लाख तक पहुंची रकम

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  अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर के शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर चौंका दिया है। बीते पांच सालों में इस स्टॉक में 3695% की बेतहाशा तेजी आई है, जिसने इसे मल्टीबैगर बना दिया है। गुरुवार को बीएसई पर यह 8% उछलकर 42.88 रुपये पर बंद हुआ। खास बात यह है कि रिलायंस पावर अब स्टैंडअलोन आधार पर कर्ज मुक्त हो चुकी है, जिससे इसमें निवेशकों का भरोसा और बढ़ गया है। अगर किसी ने 27 मार्च 2020 को रिलायंस पावर के शेयरों में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, जब यह सिर्फ 1.13 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, तो आज उसकी वैल्यू 37.94 लाख रुपये हो चुकी होती। इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप 17,224 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले दो सालों में भी रिलायंस पावर के शेयरों ने 331% की उछाल दर्ज की है। 31 मार्च 2023 को 9.94 रुपये पर मिलने वाला यह स्टॉक 27 मार्च 2025 को 42.88 रुपये पर पहुंच चुका है। सिर्फ पिछले एक महीने में ही इसमें 23% से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है, जब 27 फरवरी 2025 को यह 34.77 रुपये पर था। रिलायंस पावर के शेयरों का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 54.25 रुपये और न्यूनतम स्तर 23.26 रुपये रहा ...

"अल्फ़ाज़ से परे एक रिश्ता":- दिनेश दोशी चेन्नई

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  आधी पौनी हकीकत आधी पाव फसाना बन जाए गर हकीकत तो आला है नज़राना मेरी कमियों को वो कुछ इस कदर छुपा लेती थी,जैसे लिहाफ़ पे ग़िलाफ बेपनाह मोहब्बत करता था मैं भी उससे,उसका करती थी लिहाज़ कैसे करूं उसके दिली,अंदरूनी प्यार का ज़िक्र करती थी हर लम्हा मेरी फ़िक्र,पर कभी न जुबां पे ज़िक्र मेरे हर एब पर डालती थी पर्दा, कभी न किया मुझे बेपर्दा समंदर सा गहरा है उसका प्यार, आसमां के भी उस पार कभी ना टोका कभी रोका,उसे भरोसा था अपने प्यार पर बेपार पता था उसे कभी न करूंगा,उसके साथ बेवफाई लिहाज़ा वो चाहती रही,जिंदगी भर मुझे बेइंतहाई निहाल है नसीब मेरा ऐसी संगिनी पाकर,सबको मिले ऐसी ही परछाई मुझे फख्र है उसकी शोहरदारी पर,ज़विंदा रहे उसकी अच्छाई ✒️दिनेश दोशी काश हर किसी की ज़िंदगी में ये हकीकत होती तो सबकी ज़िंदगी जन्नत होती

सम्राट विक्रमादित्य और जैन धर्म:- डा.दिलीप धींग

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  प्रकाशनार्थ :  संदर्भ : भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत् 2082 का प्रारंभ, 30 मार्च, रविवार डॉ. दिलीप धींग  (पूर्व निदेशक : अंतरराष्ट्रीय प्राकृत केन्द्र) भारतीय काल गणना में विक्रम संवत् एक बहुप्रचलित संवत् है । भारतवर्ष के प्रतापी सम्राट  विक्रमादित्य ने इस संवत् का प्रवर्तन किया था। विक्रम संवत् का प्रवर्तन भगवान महावीर निर्वाण  संवत् के 470 वर्ष बाद तथा ईस्वी सन् से 57 वर्ष पूर्व हुआ था। भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर के  साथ शक संवत् और विक्रम संवत् का प्रयोग भी किया जाता है । नेपाल में भी सरकारी कैलेंडर  के रूप में विक्रम संवत् का प्रयोग किया जाता है । यह एक चंद्र कैलेंडर है । इसमें समय के लिए  चंद्रमास और नक्षत्र वर्ष का प्रयोग किया जाता है । अन्य अनेक संवतों के बीच विक्रम संवत् की लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता के अनेक  कारण हैं। इसमें एक कारण राजा विक्रमादित्य का न्यायप्रिय, उदार और उपकारी व्यक्तित्व भी  है । इतिहासकारों, विद्वानों और साहित्यकारों ने अनेक तथ्यों के आधार पर विक्रमादित्य को  जैनधर्मानुयायी सम्राट् बताया है। विक्...

जैन समाज: राष्ट्र निर्माण, सेवा, और पर्यावरण संरक्षण में अविस्मरणीय योगदान

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  दिनेश देवड़ा धोका भारत की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति के उत्थान में जैन समाज का योगदान सदैव अप्रतिम और अनुकरणीय रहा है। सत्य, अहिंसा, परोपकार और सेवा को जीवन का मूल आधार मानने वाला यह समाज न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्रों में बल्कि राष्ट्र निर्माण, विज्ञान, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, जीवदया और पर्यावरण संरक्षण जैसे विविध क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से योगदान देता आया है। जैन धर्म के मूल सिद्धांत "परस्परोपग्रहो जीवानाम्" को आत्मसात करते हुए इस समाज ने मानवीय कल्याण की अनूठी परंपरा स्थापित की है। देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए भी जैन समाज का योगदान अविस्मरणीय है। दीवान टोडरमल जैन का बलिदान आज भी सिख समुदाय श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए अपनी संपत्ति और जीवन को दांव पर लगा दिया, क्योंकि उनके लिए धर्म, मानवता और कर्तव्य सर्वोपरि थे। इसी तरह, भामाशाह ने महाराणा प्रताप को अपनी संपूर्ण संपत्ति समर्पित कर मातृभूमि की रक्षा के लिए एक अद्वितीय मिसाल पेश की। स्वतंत्रता संग्राम में भी जैन समाज की भूमिका अत्यंत म...

भामाशाह: जैन समाज का गौरव और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

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  भारत के इतिहास में अनेक ऐसे वीर पुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने बलिदान, त्याग और समर्पण से देश की स्वतंत्रता और अस्मिता को बचाए रखा। इन्हीं में से एक महान विभूति थे भामाशाह, जिनका जन्म राजस्थान के मेवाड़ राज्य में एक प्रतिष्ठित ओसवाल जैन परिवार में हुआ था। भामाशाह केवल एक कोषाध्यक्ष ही नहीं, बल्कि महाराणा प्रताप के अनन्य सहयोगी और मेवाड़ की स्वतंत्रता के रक्षक थे। भामाशाह की देशभक्ति और दानशीलता की गाथा इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। जब मुगल सम्राट अकबर ने मेवाड़ पर आक्रमण किया और महाराणा प्रताप को निरंतर संघर्ष करना पड़ा, तब राज्य की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। धन और संसाधनों के अभाव में सेना का संचालन कठिन हो गया था। ऐसे समय में भामाशाह ने अपनी पूरी संपत्ति महाराणा प्रताप को अर्पित कर दी। यह कोई साधारण दान नहीं था, बल्कि इतना बड़ा योगदान था कि इससे 25,000 सैनिकों को 12 वर्षों तक युद्ध के लिए तैयार रखा जा सकता था। यह दान न केवल आर्थिक सहायता थी, बल्कि राष्ट्र के प्रति एक अटूट निष्ठा और समर्पण का प्रतीक भी था। जैन समाज को प्रायः व्यापार, अहिंसा और आध्यात्मिकता से...

सेठ गुलाबचंद पचपदरा: नमक संघर्ष के अग्रदूत

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  जब भारत के इतिहास में नमक आंदोलन की बात आती है, तो अधिकतर लोग महात्मा गांधी द्वारा 1930 में किए गए नमक सत्याग्रह को याद करते हैं। लेकिन इससे बहुत पहले, राजस्थान में सेठ गुलाबचंद पचपदरा ने नमक के मुद्दे पर ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका संघर्ष न केवल व्यापारिक स्वतंत्रता के लिए था, बल्कि यह ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध एक बड़ा सामाजिक आंदोलन भी बना। राजस्थान का पचपदरा क्षेत्र सदियों से नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ की झीलों से बनने वाला नमक व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इस पर भारी कर लगाकर स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों के हितों को कुचलने का प्रयास किया। सेठ गुलाबचंद जी ने इस अन्याय को सहने के बजाय इसके विरुद्ध आवाज उठाई और स्थानीय व्यापारियों को एकजुट कर अंग्रेजों से सीधे टकराव लिया। उनका यह संघर्ष सिर्फ व्यापार की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि उस आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए था, जिसे अंग्रेज अपने कर कानूनों से नष्ट करना चाहते थे। सेठ गुलाबचंद जी का यह आंदोलन केवल राजस्थान तक सीमित...