बाड़मेर में 29-30 मार्च को गूंजेगा वाणी उत्सव – 500 से अधिक कलाकार देंगे भव्य प्रस्तुतियाँ
राजस्थान की लोकधरा एक बार फिर भक्ति और लोक संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गूंजेगी, जब वाणी उत्सव 2025 का भव्य आयोजन 29 और 30 मार्च को द हवेली रिसॉर्ट, बाड़मेर में होगा। ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान और रूमा देवी फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस अनूठे आयोजन में 500 से अधिक वाणी गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। यह महोत्सव न केवल संगीत का संगम होगा, बल्कि हमारी लोक परंपरा, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी होगी।
इस बार वाणी उत्सव में एक विशेष पहल के तहत मातृशक्ति के लिए हरजस गायन का एक अलग मंच तैयार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से गूंजती इस अद्भुत कला को एक नई पहचान मिलेगी। राजस्थान और गुजरात के पारंपरिक लोक कलाकारों के साथ-साथ देशभर के ख्यातिनाम कलाकार इस मंच पर अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। इस प्रतिष्ठित आयोजन में पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया (मध्यप्रदेश), कच्छ के प्रसिद्ध वाणी गायक मुरालाला मारवाड़ा, जैसलमेर के महेशाराम, इंदौर के राजमल मालवीय, जालौर के जोगभारती, सांचौर के सुरेश लोहार, थराद के जयराम दास, बाड़मेर के शंकर दास, भीलवाड़ा के हिम्मताराम भट, सिरोही के नारायणदास, उदयपुर के गणपतदास, मारवाड़ के वीरमदास, जोधपुर के हरिराम जी और डूंगरपुर के लक्ष्मण भारती जैसे सुप्रसिद्ध कलाकार अपने स्वरों से भक्तिरस की गंगा बहाएँगे।
इस महोत्सव का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य विलुप्त होती वीणा वाद्ययंत्र की परंपरा को पुनर्जीवित करना है। आयोजकों ने वीणा बनाने वाले कारीगरों को विशेष रूप से सम्मानित करने की योजना बनाई है, ताकि इस प्राचीन वाद्ययंत्र की पहचान को जीवंत रखा जा सके। महोत्सव में 10 वर्ष के बाल कलाकारों से लेकर 80 वर्ष तक के वरिष्ठ गायक एक ही मंच पर अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे, जिससे लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को नई ऊर्जा मिलेगी।
इस आयोजन के पीछे प्रमुख भूमिका निभा रही डॉ. रूमा देवी के नेतृत्व में यह उत्सव लोक कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आयोजकों का संकल्प है कि आने वाले वर्षों में वाणी उत्सव को और भी भव्य रूप दिया जाएगा, जिससे यह एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर सके।
बाड़मेर का वाणी उत्सव केवल एक संगीत महोत्सव नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के गौरव, भक्ति संगीत की गूंज और लोक कलाकारों के सम्मान का एक अनुपम महापर्व बनने जा रहा है।


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