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जैन धर्म में आखा तीज की परंपरा और प्रभाव - डॉ. दिलीप धींग

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  भारतीय स्वतंत्रता संग्राम लड़ने में महात्मा गांधी ने अहिंसक प्रतिरोध के रूप में उपवास को भी हथियार बनाया था। जैन समाज में हजारों तपस्वी वर्षीतप और अनेक अन्य तपस्याएं करते हैं। यदि सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टि से देखें तो उनकी तपस्या के फलस्वरूप देश में लाखों टन अनाज की बचत होती है। यह अनाज परोक्ष रूप से भुखमरी से लड़ने में काम आता है। गरीब की रोटी को सस्ता बनाता है। इस प्रकार तपस्या से कई प्रकार के समष्टिगत लाभ भी होते हैं। आज के उपभोक्तावादी युग में हजारों जैन तपस्वियों द्वारा साल दर साल वर्षीतप की आराधना विस्मित करती है। आखा तीज के पारणे के लिए अनेक तपस्वी आदिनाथ परमात्मा को समर्पित प्रसिद्ध तीर्थ शत्रुंजय (पालीतणा) पहुँचते हैं। गुजरात में स्थित इस श्वेताम्बर तीर्थ पर तपस्वियों और उनके परिजनों का मेला लगता है। स्थानकवासी परंपरा में तपस्वी अपने परिजनों के साथ अपने-अपने गुरुदेव के सानिध्य में पारणा करने के लिए पहुँचते हैं। स्थानकवासी परंपरा में इस युगीन शुरुआत का श्रेय मरुधर-केसरी मुनि मिश्रीमलजी महाराज को जाता है। कोई तपस्या कर सके या नहीं कर सके, परन्तु तपस्वी के तप में बाधक नहीं ...

*आतंकवाद का करो सफाया*व:- कवि छगनलाल मुथा

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देख चुकी दुनिया पहलगाम में,  आतंकवाद का असली चेहरा। हर एक भारतवासी के दिल पर,  हो गया एक घाव है गहरा। कितनी बर्बरता से मारे निर्दोषों को, पूछ-पूछ कर धर्म तुम्हारा। अब करना उनका जड़ से सफाया,  यही एक है भाव‌ हमारा। देश हमारा, काश्मीर हमारा,  पहलगाम का ख़ुबसूरत नजारा। हरी-भरी इस ख़ूबसूरत धरा को,  लहू से क्यों लाल कर‌ डाला। क्या बिगाड़ा था इन्होंने तुम्हारा,  दूर परिवार संग घूमने आये। अपनी पत्नी बच्चों के सामने ही,  गोलियों से उन्हें भून डाला। बहुत सहन किया अब नहीं सहेंगे, बदला इसका लेके रहेंगे। बंद करेंगे सिंधु नदी का पानी, वो एक-एक बूँद को तरसेंगे। मिटा दो उसका नामोनिशान, दागकर मिसाईल बम गोले। आतंकवाद का करो सफाया, सारा भारत संग मुथा भी बोले। *जय हिन्द* ********************************* *कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव* *मुम्बई*

तपस्या गीत;- गीतकार नैनमलजी देविचंदजी चेन्नई

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  (तर्ज: चांदी की दीवार न तोड़ीं) तोडा़ तनसे जिसने नाता तपसे जिसने जोड़ दिया  महाभाग बिरलेने कोई  रूख जीवनका मोड़ दिया              तोड़ा  ना तेरा ना मेरा ये जग एक मुसाफ़िरखाना है राही मतवाले अनंतके तेरा कहां ठिकाना है  भुलभुलैया में जगकी लौट नहीं गर आना है रोटी और पानीका झगड़ा  जिसने पीछे छोड़ दिया,           महाभाग -१. तेरा है जो पास में तेरे  पाना है क्या खोना है जल जाता है मैल अगन में कायम रहता सोना है मुंह जो चुराया जिन आणासे भाग्य में तेरे रोना है साधक पद पाए अणाहारी  तपका जिसने जोर किया,          महाभाग -२. सारा जग दुश्मन बन जाए बैरी चाहे जानका सारा जग जड़का दीवाना  तपसी है जिन आणका  सुख का तपमें पता छिपा है समता में जिन थानका बंजारोंकी इस बस्ती में तपसी ने नैन ठौर लिया             महाभाग-३.

सुराणा आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के मंत्री बने

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  अहमदाबाद। आचार्य श्री महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति अहमदाबाद द्वारा आचार्यश्री के चातुर्मास को भव्य तथा गरिमामय रुप से ऐतिहासिक बनाने के के लिए व्यवस्था समिति के सभी पदाधिकारी तथा सदस्य समर्पित रुप से तैयारियों को अंतिम रुप देने में लगे है। व्यवस्था को कारगर बनाने तथा आपसी समन्वय को सुदढ़ बनाने के लिए व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री अरविंदकुमार संचेती ने तेरापंथ समाज तथा सिवांची-मालाणी समाज के अग्रणी श्री विजयराज सुराणा को व्यवस्था समिति का सचिव तथा कार्यालय समन्वयक मनोनीत किया है। २६ अप्रेल को प्रेक्षा विश्व अकादमी प्रांगण में आयोजित समिति की बैठक में श्री संचेती ने श्री सुराणा के मनोनयन की घोषणा की। श्री सुराणा के मनोनयन से सम्पूर्ण सिवांची-मालाणी समाज में खुशी की लहर छा गई।

पहलगाम घटना पर कठोर निर्णय ले सरकार, मानवाधिकार संगठनों के दबाव में न आए

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पहलगाम की दुखद घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अब केवल निंदा, चिंता या औपचारिक शोक व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा। निर्दोष नागरिकों के खून की कीमत पर देश को कमजोर करने वालों के खिलाफ अब निर्णायक और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव या भ्रम के, जनता की भावनाओं के अनुरूप मजबूत कदम उठाए। आज कुछ मानवाधिकार संगठन, जिनकी भूमिका मूलतः मानवता की रक्षा के लिए होनी चाहिए थी, दुर्भाग्यवश देश विरोधी तत्वों के लिए ढाल बनते नजर आ रहे हैं। जब आतंकियों और हिंसा फैलाने वालों के अधिकारों की दुहाई दी जाने लगे, और निर्दोषों के आक्रोश को अनदेखा किया जाने लगे, तब यह समझना चाहिए कि ऐसी सोच न केवल देश की सुरक्षा के लिए, बल्कि मानवता के लिए भी खतरा बन जाती है। सरकार का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व बनता है कि वह देश के नागरिकों के जीवन, सम्मान और भविष्य की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। इस संदर्भ में किसी भी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय दबाव, मानवाधिकार की खोखली दुहाई या राजनीतिक समीकरणों को आड़े नहीं आने देना चाहिए। जब तक अपराधी यह महसूस करते रहेंगे कि उनके पीछे क...

बीजेएस वी.वी. पुरम चेप्टर द्वारा छात्राओं के लिए करियर कम्पास सेशन और सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का भव्य आयोजन

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  बैंगलोर, कर्नाटक। भारतीय जैन संघटना (बीजेएस) वी.वी. पुरम चेप्टर द्वारा हाइक ड्रीम ट्यूटोरियल, चामराजपेट में एक प्रेरणादायक सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एवं करियर कम्पास सेशन का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर  प्रवक्ता श्री दिनेश सालेचा ने बताया कि कार्यक्रम में लगभग 50 छात्र एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। करियर कम्पास सेशन का शुभारंभ शाम 4 बजे हुआ और यह 6 बजे तक चला। सत्र का संचालन श्री हितेश छाजेड़ ने अत्यंत कुशलता से किया। इस सत्र के दौरान छात्रों के साथ सक्रिय और सार्थक संवाद देखने को मिला, जिसमें करियर योजना, आत्मविश्वास निर्माण और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान बीजेएस रीजन हेड श्री सुरेशकुमार कानुगा, चेप्टर अध्यक्ष श्रीमती सारिका लुंकड़, सचिव श्रीमती रेशमा बडोला तथा प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर्स श्रीमती मोनिका पालरेचा, श्रीमती स्नेहा गौरव संचेती और श्रीमती ईशा बोहरा की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह के समापन पर बीजेएस परिवार की ओर से श्री प्रवीण लुंकड़ एवं हाइक ड्रीम ट्यूटोरियल के श्री पर्वेश जैन का आभार व्यक्त किया गया, जिन्...

पहलगाम अटैक पर दोहे द्वारा अभिव्यक्ति :- चिराग जैन चैतन्य

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 दोहे (पहलगाम अटैक) पहलगाम के कृत्य से,  धधकी है जो ज्वाल। लाएगी वह शीघ्र ही,  इंतिक़ाल का काल।।१।। समझ रहा है जो हमें,  अतिसंवेदनशील। करवा देंगें अब उसे,  हम पौरुषता फील।।२।। धर्म पूछकर जो किया,  तूने कार्य निषिद्ध। विश्वपटल पर कर रहा,  तुझे नपुंसक सिद्ध।।३।। ज्ञात तुझे हम बाप है,  फिर भी किया बवाल। नीच-लाल तू जान से,  होगा त्वरित हलाल।।४।। सोच रहा आतंक से,  कर देंगे भयभीत। याद रहे डरते नहीं,  किंचित भी रणजीत।।५।। चिराग़ जैन 'चैतन्य' भरूच (गुजरात)

*नीम्बू राजा*

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  **---***---****---******-****"***** सुन रे मानव,सुन अज्ञान, अब तो ले ले तूँ संज्ञान। समय किसी का नहीं एक सा, इस बात को ले तूँ जान। मैं हूंँ नीम्बू छोटा अदना, गोल मटोल हरा या पीला। तूने मेरी कदर नहीं जानी, मुझे नहीं तुझसे कोई गिला। कमजोरी मे काम मैं आया, जादू टोना मुझसे कराया। नजर लगे नहीं किसी को, मिर्ची के साथ मुझे लटकाया। कई तरह के इलाज में तूने, मेरा ही उपयोग कराया। अपनो की नजर उतरवाने, चार रास्ते मुझे फिकवाया। मैं हूंँ रसोईघर का राजा, मेरे बिना नहीं स्वाद दाल का। मेहंदी में भी मिलाकर देखो, आ जाता है रंग लाल सा। आज गर्व है मुझे अपने पर, मेरा भी अब बढ़ गया है मान। जिसके घर में दो चार नीम्बू , उस घर की बढ गई है शान। पहले रूपए के दस मिलते थे, आज दस रुपए का एक। बडी इज्जत है आज तो मेरी, नहीं कोई देता रास्ते में फेक। नहीं किसी को कमजोर समझना, इसी बात से ले तूँ ज्ञान। समय एक सा नहीं कभी मुथा, छोटे बड़े सबको देना मान। ******************************************** *कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव*   *मुम्बई*

डॉ. दिलीप धींग के शोधग्रंथ की समीक्षा

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  आगमिक अर्थव्यवस्था व जनजीवन की झाँकी है 'मूल्यात्मक अर्थशास्त्र'                               -   • संजीव जैन, करनाल (हरियाणा) भगवान महावीर के 2550वें निर्वाण कल्याणक वर्ष के उपलक्ष्य में अभुषा फाउंडेशंस, चेन्नई   द्वारा प्रकाशित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, जैन जगत के प्रमुख व प्रथम श्रेणी के साहित्यकारों में शुमार डॉ. दिलीप धींग द्वारा लिखित 'मूल्यात्मक अर्थशास्त्र' नामक पुस्तक स्वयं लेखक ने गोहाना  (हरियाणा) में बहुश्रुत जयमुनि की निश्रा में आयोजित प्राकृत संगोष्ठी (अक्टूबर - 2024 ) में मुलाकात   के दौरान मुझे हस्ताक्षरित करके दी थी । जैन आगम साहित्य के आलोक में आर्थिक मीमांसा करने वाली यह पुस्तक लेखक की धर्म, समाज व देश को अनुपम भेंट है। यह पुस्तक उनके पीएच.डी. के शोधग्रंथ का संवर्धित रूप है,   जो आगमिक अर्थशास्त्र को नए आलोक, नए संदर्भ, नए परिप्रेक्ष्य एवं चिंतन के नए पहलुओं में   समझाने के अपने उद्देश्य व प्रयास में पूर्णतः सफल रही है। डॉ. दिलीपजी जैसी उच्चक...

संस्कार शाला, धार्मिक पाठशाला जीवन में है आवश्यक*

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   आज के इस भौतिक युग में धर्म के संस्कारों का लोप होता जा रहा है, भौतिक पढ़ाई हेतु कई विद्यालय मौजूद है, उनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ने के अवसर भी पा रहे हैं, पर क्या शांत, निर्मल, स्वच्छ, सुंदर जीवन, तनाव रहित जीवन का भी ज्ञान पाया।     आज धर्म संस्कारों के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी बिना कई बच्चे धर्म से विमुख होते जा रहे हैं धर्मनिष्ठ संस्कारों से आत्मा को पल्लवित किए बिना धर्म में जीवन संभव नहीं धार्मिक शिक्षण के बिना संस्कारों का शुद्धिकरण संभव नहीं।  *जिस शक्कर में मिठास नहीं, वह शक्कर नहीं*  *जिस पुष्प में सुवास नहीं, वह पुष्प नहीं*  *जिस औषधि में गुण नहीं, वह औषधि नहीं*  *और जिस मानव में संस्कार नही वह मानव नहीं*   संस्कारों की धारा से आप्लावित  व्यक्ति अपने घर को प्रेम मंदिर बनाता है, जीवन जीने की कला सिखाती है *संस्कारशाला*– *धार्मिक पाठशाला* हमारी पाठशाला में सुसंस्कार, धर्म के मूल सिद्धांत, नैतिक जीवन व शिष्ठाचार की शिक्षा मिलती है, जिससे बच्चे का जीवन पथ सुगम सहज बनता है। ...

मुंबई को 34 साल बाद मिलेगा नया रेलवे टर्मिनस, जोगेश्वरी से चलेंगी वंदे भारत और तेजस ट्रेनें

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मुंबईकरों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शहर में 34 साल बाद एक नया रेलवे टर्मिनस बनने जा रहा है, और वो भी जोगेश्वरी में। ये टर्मिनस राम मंदिर और जोगेश्वरी स्टेशनों के बीच बनाया जा रहा है और इसका काम तेजी से चल रहा है। अभी तक करीब 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है और उम्मीद की जा रही है कि सितंबर 2025 तक ये पूरी तरह तैयार होकर चालू भी हो जाएगा। ये टर्मिनस पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां से वंदे भारत और तेजस जैसी लंबी दूरी की प्रीमियम ट्रेनें चलाने की योजना है। यानी अब पश्चिम उपनगरों के लोगों को मुंबई सेंट्रल, दादर या बांद्रा भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जोगेश्वरी से ही लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करना आसान हो जाएगा। इस टर्मिनस पर एक साथ दो ट्रेनें खड़ी रह सकेंगी और लंबाई इतनी होगी कि 24 कोच की ट्रेनें भी आसानी से खड़ी हो सकें। यात्रियों के लिए AC वेटिंग एरिया होगा, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग की सुविधा भी दी जाएगी। रेलवे का मानना है कि इससे पुराने टर्मिनलों पर दबाव घटेगा और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा। खास बात ये है कि अंधेरी, गोरेगांव और मालाड जैसे इलाकों के लोगों को अब लंब...

चेन्नई की गर्मी में राहत की सांस: शुरू हुई पहली एसी लोकल ट्रेन, किराया महज ₹35 से

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  चेन्नईवासियों के लिए दक्षिण रेलवे ने गर्मी में बड़ी राहत दी है। शनिवार सुबह चेन्नई बीच से चेंगलपट्टू के बीच पहली बार पूरी तरह वातानुकूलित उपनगरीय इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा की शुरुआत की गई। सुबह 7 बजे रवाना हुई इस एसी लोकल ट्रेन ने 8:35 बजे चेंगलपट्टू स्टेशन पर पहुंचकर इस नई सेवा की सफल शुरुआत की। इस ऐतिहासिक मौके पर यात्रियों ने जहां राहत की सांस ली, वहीं रेलवे प्रशासन को भी इस सुविधा के लिए यात्रियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। करीब 12 कोच वाली इस आधुनिक ट्रेन में न्यूनतम किराया ₹35 और अधिकतम ₹105 तय किया गया है, जो सुविधाजनक होने के साथ-साथ आम जनता की जेब पर भी हल्का है। यह ट्रेन सेवा सप्ताह में रविवार को छोड़कर प्रतिदिन उपलब्ध रहेगी। चेन्नई के उपनगरीय रूट पर पहली बार चल रही एसी लोकल ट्रेनें न सिर्फ आरामदायक हैं, बल्कि तेज़, साफ-सुथरी और पूरी तरह ऊर्जा कुशल भी हैं। रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन चेन्नई बीच से एग्मोर, माम्बलम, गिंडी, सेंट थॉमस माउंट, तिरुसुलम, तांबरम, पेरुंगलथुर, गुडुवनचेरी, पोथेरी, सिंगापेरुमल कोइल और परनूर होते हुए चेंगलपट्टू तक का सफर तय करेगी। वहीं वापसी ...

जैन एकता की लहर: धर्मरक्षा के संग्राम में समाज हुआ एकजुट

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विले पार्ले से मध्यप्रदेश तक उठी चेतना की गूंज, सरकार तक पहुँची आवाज मुंबई के विले पार्ले में बीएमसी द्वारा एक प्राचीन जैन मंदिर को गिराने की कार्रवाई ने पूरे जैन समाज को झकझोर कर रख दिया। यह केवल एक संरचना का विध्वंस नहीं था, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात था। परंतु जो सबसे उल्लेखनीय रहा, वह था समाज की प्रतिक्रिया — एकजुट, संयमित और सशक्त। जैन समाज ने मर्यादाओं के भीतर रहते हुए जिस तरह से इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि अब वह अपने धर्म, धरोहर और संतों के सम्मान के लिए संगठित होकर खड़ा है। उसी समय मध्यप्रदेश में जैन संतों पर हुए हमले ने समाज की चेतना को और भी आंदोलित कर दिया। किन्तु यह पीड़ा आक्रोश में नहीं, बल्कि संगठन और सजगता में बदली। देशभर में प्रदर्शन हुए, ज्ञापन सौंपे गए, मीडिया के माध्यम से संतों के सम्मान की मांग उठाई गई और यह बताया गया कि संतों पर आघात केवल एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे धर्म पर प्रहार है। इन दुखद घटनाओं के समानांतर, समाज ने महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव और नवकार महामंत्र दिवस जैसे आयोजनों में जिस उत्साह और सहभागिता का...

जैनविद्या और प्राच्यविद्या के उपासक डॉ. धर्मचंद जैन -

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संदर्भ : श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन सभा, कोलकाता द्वारा पांच लाख का 'आचार्य जवाहर जैन ज्योति   पुरस्कार' जैनविद्या और प्राच्यविद्या के उपासक डॉ. धर्मचंद जैन - डॉ. दिलीप धींग (पूर्व निदेशक : अंतरराष्ट्रीय प्राकृत केन्द्र) पुरस्कार प्राप्ति के बाद  विचार व्यक्त करते हुए पांच लाख का आचार्य जवाहर पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ. धर्मचंद जैन  सदी में जिन संतों ने विद्वानों की आवश्यकता और उनके निर्माण पर काफी ध्यान दिया, उनमें युगमनीषी आचार्य श्री हस्तीमलजी महाराज एक प्रमुख नाम है। हिंदी, राजस्थानी और जैन दर्शन के विद्वान डॉ. नरेन्द्र भानावत और जोधपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति साहित्यकार प्रो. कल्याणमल लोढ़ा का मानना था कि उनके शैक्षणिक और अकादमिक जीवन की प्रगति में आचार्य हस्तीमलजी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद का बहुत बड़ा संबल रहा था। ऐसे ही एक मनीषी हमारे बीच है डॉ. धर्मचन्द जैन, जिनके जीवन निर्माण में आचार्य हस्तीमलजी महाराज का मंगल आशीर्वाद जुड़ा है। साधक, मनीषी और चिंतक पंडित कन्हैयालालजी लोढ़ा डॉ. धर्मचंदजी के गुरु रहे । आचार्य हस्ती आध्यात्मिक शिक्षण संस्थान, जय...

शांति का अपमान, सेवा का अनादर – कब तक सहेंगा जैन समाज?

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दिनेश देवड़ा धोका विले पार्ले में स्थित जैन मंदिर को दो दिन पहले कोर्ट के आदेश के तहत बिना किसी पूर्व सूचना के ढहा दिया गया। यह सिर्फ एक संरचना का नष्ट होना नहीं, बल्कि उस धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अपमान है, जो इस समाज की पहचान और आस्था का प्रतीक है। जैन समाज हमेशा से शांति, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चला है, परंतु इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि एक अहिंसक और शांतिप्रिय समाज को दबाया जाता है, जबकि हिंसा या उग्रता के मार्ग पर चलने वाले समाजों को प्रशासन अधिक गंभीरता से सुनता है। अगर यही घटना किसी अन्य समुदाय का धार्मिक स्थल होता, तो क्या प्रशासन इतनी जल्दी यह निर्णय लेता? क्या कोर्ट रात के समय भी उनकी आस्था और अधिकारों की रक्षा के लिए नही खुलता? यह वह समाज है जिसने सदियों से अहिंसा के सिद्धांत को न केवल जीवन में अपनाया है, बल्कि देश की प्रगति में अपने योगदान से समाज को प्रेरित किया है। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, और दान के क्षेत्र में जैन समाज ने कभी भी कोई शोर-शराबा नहीं किया, लेकिन इस देश की प्रगति में उसका योगदान अत्यधिक है। लेकिन जब बात अपनी आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता की आती...

जापान देगा भारत को दो बुलेट ट्रेन फ्री में, दोस्ती और तरक्की की नई मिसाल

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जापान और भारत की दोस्ती एक और बड़ा कदम आगे बढ़ी है। जापान ने भारत को दो हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सेट Shinkansen E5 और E3 सीरीज बिल्कुल मुफ्त देने का फैसला किया है। इन ट्रेनों का इस्तेमाल मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे बुलेट ट्रेन ट्रैक पर ट्रायल और जांच के लिए किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। इतना ही नहीं जापान भारत को कुल 24 बुलेट ट्रेन सेट देगा। इनमें से 6 ट्रेनें भारत में ही बनाई जाएंगी जिससे 'मेक इन इंडिया' को भी बढ़ावा मिलेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 81 प्रतिशत पैसा जापान देगा वो भी 0.1 प्रतिशत की बेहद कम ब्याज दर पर 50 साल के लिए लोन और पहले 15 साल तक कुछ चुकाना भी नहीं होगा। इस कदम से भारत को दुनिया की सबसे तेज और सुरक्षित ट्रेन तकनीक मिलेगी। ये सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं बल्कि भारत और जापान की मजबूत दोस्ती भरोसे और तरक्की की नई मिसाल है। जब बुलेट ट्रेन भारत की धरती पर दौड़ेगी तो ये हर भारतीय के लिए गर्व का पल होगा।

नेपाल कॉफी फेस्टिवल में चमकी बेंगलौर निवासी पूजा जैन की उपलब्धि

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काठमांडू, नेपाल – 5 अप्रैल 2025: नेपाल में 3 से 5 अप्रैल तक हुए नेपाल कॉफी फेस्टिवल 2025 का समापन बड़े ही धूमधाम से हुआ। इस तीन दिन के कार्यक्रम में देश-विदेश के कॉफी प्रेमी, किसान, एक्सपर्ट्स और रोस्टर शामिल हुए। इस पूरे फेस्टिवल का सबसे खास पल तब आया, जब Curly Brew की फाउंडर पूजा जैन को "Excellence in Coffee Journalism & Storytelling" अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पूजा ये सम्मान पाने वाली पहली भारतीय बनीं, जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पूजा मदुराई की रहने वाली हैं और फिलहाल बेंगलौर में रहकर कॉफी इंडस्ट्री से जुड़ा शानदार काम कर रही हैं। उन्होंने नेपाल की उभरती हुई कॉफी संस्कृति को दुनियाभर में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई — खासतौर पर वहां के किसानों, रोस्टर्स और बारिस्टा को एक नई आवाज़ देने का काम किया। उनकी इस सफलता पर उनके पिता श्री विनोदजी घीया और मदुराई जैन समाज को बेहद गर्व है। समाज की इस होनहार बेटी ने दिखा दिया कि लगन और मेहनत से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। यह सम्मान उन्हें नेपाल सरकार के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के कार्यक...

अहमदाबाद: जैन संतों पर हमले के खिलाफ निकली ऐतिहासिक मौन रैली, शहर भर में दिखी समाज की एकता और आक्रोश

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  अहमदाबाद 18 अप्रैल शुक्रवार 13 अप्रैल को मध्यप्रदेश के नीमच ज़िले में तीन जैन संतों पर जो बर्बर हमला हुआ, उसने हर जैन के मन को हिला कर रख दिया। उसी दर्द और गुस्से को आवाज़ देने के लिए आज अहमदाबाद में सकल जैन समाज ने एक बड़ी और ऐतिहासिक मौन रैली निकाली। ये रैली सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि संतों की सुरक्षा, अहिंसा की भावना और धर्म की रक्षा का संकल्प थी  और पूरे शहर ने देखा कि जैन समाज जब चुप भी रहता है, तब भी उसकी आवाज़ बहुत बुलंद होती है। शुक्रवार सुबह 8 बजे शाहीबाग के तेरापंथ भवन से शुरू हुई रैली घेवर, केदार, आदेश्वर टावर, कल्पवृक्ष और ऑर्चिड ग्रीन होते हुए फिर तेरापंथ भवन पर ही समाप्त हुई। पुरुष सफेद कपड़ों में, महिलाएं लाल चुनरी की साड़ियों में, और साथ में छोटे-छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग  हर कोई शांत भाव से, लेकिन अंदर से बेहद दृढ़ संकल्प के साथ इस रैली में चला। कोई नारे नहीं, कोई भाषण नहीं — बस मौन में बसी एक चीख, जो कह रही थी कि संतों पर हमला मतलब हमारे पूरे धर्म पर हमला है, और इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। रैली में अहमदाबाद के कई जाने-माने जैन श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्त...

#इन्सान_का_स्वभाव

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इन्सान_का_स्वभाव खुश रहना अपने जीवन में, जो भी तूने बिन मांँगे पाया। फिर क्यों कोसें उस  ईश्वर को, जो सारी सृष्टि में समाया। जब भी मिली तूझे खुशी तरक्की, याद नहीं उसे कर पाया।  जब भी आया दुःख या विपदा, उसी को तूने मोहरा बनाया। नहीं तूझे कोई सहनशक्ति,  नहीं तूझे कोई सच्ची भक्ति। अपनी गरज के हिसाब से,  ही करता है दीया अगरबत्ती। भले लगाओ तख्ती नाम की, समाज के उद्धार का सोचो। जो असहाय निर्धन समाज में, उनको जाकर के खोजो। मन में रखना दान दया का, जीवन सफल हो जायेगा। अपने हाथों से कर ले दान तू, वरना पीछे पछतायेगा। धन दौलत कोठी बंगला मुथा,  कोई साथ न आयेगा। मेरा मेरा करते करते बंदे, राम नाम सत्य हो जायेगा। ***************************************" *कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव* *मुम्बई*

कटरा से श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन टला, अब नई तारीख का इंतज़ार

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नई दिल्ली/श्रीनगर। जिस ऐतिहासिक ट्रेन का सबको बेसब्री से इंतजार था – कटरा से श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस – उसका उद्घाटन अब थोड़ा और टल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 19 अप्रैल को इसका उद्घाटन करना था, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से ये कार्यक्रम फिलहाल के लिए रद्द कर दिया गया है। अब ये उद्घाटन अप्रैल के आख़िर या मई की शुरुआत में हो सकता है। यह ट्रेन देश की बहुत ही खास और बड़ी रेल परियोजना का हिस्सा है – उधमपुर से श्रीनगर होते हुए बारामुला तक की रेल लाइन, जिसे USBRL परियोजना कहा जाता है। ये लाइन अब पूरी तरह बनकर तैयार है और इसका मतलब है कि अब कटरा से सीधे ट्रेन श्रीनगर तक जाएगी। इस रूट पर कई रिकॉर्ड तोड़ चीजें बनी हैं – जैसे कि चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज और अंजी नदी पर बना भारत का पहला केबल-स्टे ब्रिज। इन दोनों को देखने के लिए प्रधानमंत्री जी को वहां जाना था, लेकिन बारिश और बर्फबारी की चेतावनी के चलते अब ये दौरा टाल दिया गया। सबसे अच्छी बात ये है कि ये वंदे भारत ट्रेन कटरा से श्रीनगर का सफर सिर्फ 3 घंटे में तय करेगी, जबकि अभी गाड़ी या बस से ये...

धुएं वाली ट्रेन से बुलेट तक का सफर

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  16 अप्रैल है, यानी रेलवे दिवस। इस दिन की अपनी अलग ही कहानी है  आज ही के दिन, साल 1853 में देश की पहली ट्रेन ने मुंबई से ठाणे तक 34 किलोमीटर का सफर तय किया था। उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ये धुएं वाली सीटी एक दिन देश को बुलेट ट्रेन तक पहुंचा देगी। आज भारतीय रेल सिर्फ एक सफर का जरिया नहीं रही, बल्कि देश की पहचान बन गई है। लाखों लोग हर दिन ट्रेन से सफर करते हैं  कोई काम के लिए, कोई रिश्तेदारों से मिलने, तो कोई घूमने-फिरने। रेल ने हर किसी को जोड़ा है  गांव, शहर, गांव से शहर और दिल से दिल। अब ज़रा सोचिए – पहले भाप के इंजन होते थे, धीमे-धीमे चलने वाली गाड़ियां। फिर डीज़ल इंजन आया, फिर इलेक्ट्रिक। और अब देखिए – वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी चमचमाती, तेज़ रफ्तार ट्रेनें चल रही हैं। जो 160-180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं, AC जैसी ठंडी हवा और मेट्रो जैसी सफाई लेकर। इतना ही नहीं, आने वाले कुछ सालों में देश को पहली बुलेट ट्रेन मिलने वाली है – मुंबई से अहमदाबाद के बीच। जो 320 किमी/घंटा की स्पीड से चलेगी। अब ये कोई सपना नहीं, ये बन रहा है हकीकत। भारतीय रेलवे दुनिय...

ओम बिरला ने निभाया वादा, शहीद की बेटी की शादी में भराया मायरा – इंसानियत और रिश्तों की मिसाल बने लोकसभा अध्यक्ष

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कोटा, 12 अप्रैल 2025 राजनीति में अक्सर वादे किए तो जाते हैं, पर निभाए बहुत कम जाते हैं। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक ऐसा वादा निभाया, जिसने न सिर्फ दिल छू लिया बल्कि समाज के सामने इंसानियत और रिश्तों की एक बेमिसाल मिसाल रख दी। 6 साल पहले पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए कोटा जिले के सांगोद निवासी सीआरपीएफ जवान हेमराज मीणा की अंतिम यात्रा में शामिल होते समय ओम बिरला ने शहीद की पत्नी को अपनी बहन मानते हुए कहा था – "जब भी आपकी बेटी की शादी होगी, भाई बनकर मायरा भरने जरूर आऊंगा।" वक्त बदला, दिन बदला, पर ओम बिरला का वो वादा नहीं बदला। 12 अप्रैल 2025 को जब शहीद की बेटी के विवाह की घड़ी आई, तो ओम बिरला ना केवल स्वयं पहुंचे, बल्कि एक सगे भाई की तरह पूरे रीति-रिवाज के साथ ‘मायरे’ की रस्म निभाई। यह नजारा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक वचन की पूर्णता, एक रिश्ता निभाने की पराकाष्ठा और एक राजनेता के भीतर बसे संवेदनशील इंसान की झलक थी। ओम बिरला का यह कार्य बताता है कि सच्चा नेतृत्व केवल कुर्सियों से नहीं, कर्मों से पहचाना जाता है। मायरे की इस रस्म ने न सिर्फ शहीद परिवार की आंखें ...