#इन्सान_का_स्वभाव
इन्सान_का_स्वभाव
खुश रहना अपने जीवन में,
जो भी तूने बिन मांँगे पाया।
फिर क्यों कोसें उस ईश्वर को,
जो सारी सृष्टि में समाया।
जब भी मिली तूझे खुशी तरक्की,
याद नहीं उसे कर पाया।
जब भी आया दुःख या विपदा,
उसी को तूने मोहरा बनाया।
नहीं तूझे कोई सहनशक्ति,
नहीं तूझे कोई सच्ची भक्ति।
अपनी गरज के हिसाब से,
ही करता है दीया अगरबत्ती।
भले लगाओ तख्ती नाम की,
समाज के उद्धार का सोचो।
जो असहाय निर्धन समाज में,
उनको जाकर के खोजो।
मन में रखना दान दया का,
जीवन सफल हो जायेगा।
अपने हाथों से कर ले दान तू,
वरना पीछे पछतायेगा।
धन दौलत कोठी बंगला मुथा,
कोई साथ न आयेगा।
मेरा मेरा करते करते बंदे,
राम नाम सत्य हो जायेगा।
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*कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव*
*मुम्बई*

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