पहलगाम अटैक पर दोहे द्वारा अभिव्यक्ति :- चिराग जैन चैतन्य
दोहे (पहलगाम अटैक)
पहलगाम के कृत्य से,
धधकी है जो ज्वाल।
लाएगी वह शीघ्र ही,
इंतिक़ाल का काल।।१।।
समझ रहा है जो हमें,
अतिसंवेदनशील।
करवा देंगें अब उसे,
हम पौरुषता फील।।२।।
धर्म पूछकर जो किया,
तूने कार्य निषिद्ध।
विश्वपटल पर कर रहा,
तुझे नपुंसक सिद्ध।।३।।
ज्ञात तुझे हम बाप है,
फिर भी किया बवाल।
नीच-लाल तू जान से,
होगा त्वरित हलाल।।४।।
सोच रहा आतंक से,
कर देंगे भयभीत।
याद रहे डरते नहीं,
किंचित भी रणजीत।।५।।
चिराग़ जैन 'चैतन्य'
भरूच (गुजरात)

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