तपस्या गीत;- गीतकार नैनमलजी देविचंदजी चेन्नई
(तर्ज: चांदी की दीवार न तोड़ीं)
तोडा़ तनसे जिसने नाता
तपसे जिसने जोड़ दिया
महाभाग बिरलेने कोई
रूख जीवनका मोड़ दिया
तोड़ा
ना तेरा ना मेरा ये जग
एक मुसाफ़िरखाना है
राही मतवाले अनंतके
तेरा कहां ठिकाना है
भुलभुलैया में जगकी
लौट नहीं गर आना है
रोटी और पानीका झगड़ा
जिसने पीछे छोड़ दिया,
महाभाग -१.
तेरा है जो पास में तेरे
पाना है क्या खोना है
जल जाता है मैल अगन में
कायम रहता सोना है
मुंह जो चुराया जिन आणासे
भाग्य में तेरे रोना है
साधक पद पाए अणाहारी
तपका जिसने जोर किया,
महाभाग -२.
सारा जग दुश्मन बन जाए
बैरी चाहे जानका
सारा जग जड़का दीवाना
तपसी है जिन आणका
सुख का तपमें पता छिपा है
समता में जिन थानका
बंजारोंकी इस बस्ती में
तपसी ने नैन ठौर लिया
महाभाग-३.

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