अहमदाबाद: जैन संतों पर हमले के खिलाफ निकली ऐतिहासिक मौन रैली, शहर भर में दिखी समाज की एकता और आक्रोश
अहमदाबाद 18 अप्रैल शुक्रवार
13 अप्रैल को मध्यप्रदेश के नीमच ज़िले में तीन जैन संतों पर जो बर्बर हमला हुआ, उसने हर जैन के मन को हिला कर रख दिया। उसी दर्द और गुस्से को आवाज़ देने के लिए आज अहमदाबाद में सकल जैन समाज ने एक बड़ी और ऐतिहासिक मौन रैली निकाली। ये रैली सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि संतों की सुरक्षा, अहिंसा की भावना और धर्म की रक्षा का संकल्प थी और पूरे शहर ने देखा कि जैन समाज जब चुप भी रहता है, तब भी उसकी आवाज़ बहुत बुलंद होती है।
शुक्रवार सुबह 8 बजे शाहीबाग के तेरापंथ भवन से शुरू हुई रैली घेवर, केदार, आदेश्वर टावर, कल्पवृक्ष और ऑर्चिड ग्रीन होते हुए फिर तेरापंथ भवन पर ही समाप्त हुई। पुरुष सफेद कपड़ों में, महिलाएं लाल चुनरी की साड़ियों में, और साथ में छोटे-छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग हर कोई शांत भाव से, लेकिन अंदर से बेहद दृढ़ संकल्प के साथ इस रैली में चला। कोई नारे नहीं, कोई भाषण नहीं — बस मौन में बसी एक चीख, जो कह रही थी कि संतों पर हमला मतलब हमारे पूरे धर्म पर हमला है, और इसे अब सहन नहीं किया जाएगा।
रैली में अहमदाबाद के कई जाने-माने जैन श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने रैली को और खास बना दिया। माहौल बेहद अनुशासित था, लेकिन हर चेहरे पर दुख और संकल्प साफ झलक रहा था। हर कदम एक संदेश दे रहा था जैन समाज शांति से जीता है, लेकिन अन्याय के खिलाफ हमेशा खड़ा होता है।
रैली खत्म होने पर समाज की तरफ से शहर की मेयर श्रीमती प्रतिभा बेन जैन और असरवा-शाहीबाग की विधायक दर्शना बेन को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि जैन संतों की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त कदम उठाए और नीमच में जो हुआ उसके जिम्मेदारों को सज़ा दी जाए।
इस पूरी रैली की जानकारी हमारे संवाददाता दिनेश देवड़ा धोका ने दी। उन्होंने बताया कि ये रैली भले ही बिना शोर के थी, लेकिन उसका असर बहुत गहरा था। ये समाज का शांत लेकिन ताक़तवर जवाब था — और एक याद दिलाने वाला पल कि जब धर्म पर संकट आता है, तो जैन समाज एकजुट होकर खड़ा होता है।





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