ओम बिरला ने निभाया वादा, शहीद की बेटी की शादी में भराया मायरा – इंसानियत और रिश्तों की मिसाल बने लोकसभा अध्यक्ष
कोटा, 12 अप्रैल 2025
राजनीति में अक्सर वादे किए तो जाते हैं, पर निभाए बहुत कम जाते हैं। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक ऐसा वादा निभाया, जिसने न सिर्फ दिल छू लिया बल्कि समाज के सामने इंसानियत और रिश्तों की एक बेमिसाल मिसाल रख दी।
6 साल पहले पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए कोटा जिले के सांगोद निवासी सीआरपीएफ जवान हेमराज मीणा की अंतिम यात्रा में शामिल होते समय ओम बिरला ने शहीद की पत्नी को अपनी बहन मानते हुए कहा था –
"जब भी आपकी बेटी की शादी होगी, भाई बनकर मायरा भरने जरूर आऊंगा।"
वक्त बदला, दिन बदला, पर ओम बिरला का वो वादा नहीं बदला।
12 अप्रैल 2025 को जब शहीद की बेटी के विवाह की घड़ी आई, तो ओम बिरला ना केवल स्वयं पहुंचे, बल्कि एक सगे भाई की तरह पूरे रीति-रिवाज के साथ ‘मायरे’ की रस्म निभाई। यह नजारा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक वचन की पूर्णता, एक रिश्ता निभाने की पराकाष्ठा और एक राजनेता के भीतर बसे संवेदनशील इंसान की झलक थी।
ओम बिरला का यह कार्य बताता है कि सच्चा नेतृत्व केवल कुर्सियों से नहीं, कर्मों से पहचाना जाता है। मायरे की इस रस्म ने न सिर्फ शहीद परिवार की आंखें नम कीं, बल्कि वहां मौजूद हर दिल को छू लिया।
इस अवसर ने यह सिद्ध किया कि जब नेता जनसेवा को व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़ते हैं, तो राजनीति भी रिश्तों की सौंधी खुशबू बिखेरती है।

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