संस्कार शाला, धार्मिक पाठशाला जीवन में है आवश्यक*
आज के इस भौतिक युग में धर्म के संस्कारों का लोप होता जा रहा है, भौतिक पढ़ाई हेतु कई विद्यालय मौजूद है, उनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ने के अवसर भी पा रहे हैं, पर क्या शांत, निर्मल, स्वच्छ, सुंदर जीवन, तनाव रहित जीवन का भी ज्ञान पाया।
आज धर्म संस्कारों के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी बिना कई बच्चे धर्म से विमुख होते जा रहे हैं धर्मनिष्ठ संस्कारों से आत्मा को पल्लवित किए बिना धर्म में जीवन संभव नहीं धार्मिक शिक्षण के बिना संस्कारों का शुद्धिकरण संभव नहीं।
*जिस शक्कर में मिठास नहीं, वह शक्कर नहीं*
*जिस पुष्प में सुवास नहीं, वह पुष्प नहीं*
*जिस औषधि में गुण नहीं, वह औषधि नहीं*
*और जिस मानव में संस्कार नही वह मानव नहीं*
संस्कारों की धारा से आप्लावित व्यक्ति अपने घर को प्रेम मंदिर बनाता है, जीवन जीने की कला सिखाती है *संस्कारशाला*– *धार्मिक पाठशाला* हमारी पाठशाला में सुसंस्कार, धर्म के मूल सिद्धांत, नैतिक जीवन व शिष्ठाचार की शिक्षा मिलती है, जिससे बच्चे का जीवन पथ सुगम सहज बनता है।
बच्चों का जीवन मार्ग प्रशस्त करने वाली ऐसी संस्कार शालाओं, धार्मिक पाठशाला में अपने बच्चों को भेज कर संस्कारमय भविष्य का निर्माण करें।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें