राजस्थान-गुजरात के बीच 116 किमी लंबी नई रेल लाइन, 15 स्टेशनों और 13 सुरंगों का होगा निर्माण
राजस्थान से गुजरात की यात्रा को और सुगम बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने 116 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। यह रेलमार्ग न केवल यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। अंबाजी-आबूरोड-तारंगा हिल के बीच इस रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस परियोजना की लागत करीब 28 अरब रुपये है और इसके तहत सिविल व ट्रैक कार्यों के टेंडर जारी कर दिए गए हैं।
परियोजना के अंतर्गत 13 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई 13 किलोमीटर होगी। ये सुरंगें उधमपुर-कटरा रेल परियोजना की तरह अत्याधुनिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) से बनाई जाएंगी। इसके अलावा, आबूरोड ब्लॉक के सुरपगला गांव के पास देश के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में से एक 80 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण होगा। रेलवे की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से राजस्थान के सिरोही और गुजरात के मेहसाणा, साबरकांठा व बनासकांठा जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
धार्मिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। अंबाजी शक्तिपीठ, तारंगा हिल और आबूरोड जैसे तीर्थस्थलों को रेल कनेक्टिविटी मिलने से श्रद्धालुओं को यात्रा में बड़ी सुविधा होगी। गुजरात के अंबाजी में इस परियोजना के तहत छह मंजिला यात्री विश्रामालय का निर्माण किया जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
रेलवे इस रेल मार्ग पर कुल 15 नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण कर रहा है, जिससे दोनों राज्यों के बीच संपर्क और मजबूत होगा। इसके साथ ही, इस परियोजना के चलते आबूरोड, कुई, चंद्रावती, सियावा समेत कई क्षेत्रों में भूमि समतलीकरण, पेड़ों की कटाई और मिट्टी परीक्षण जैसे कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। सियावा के मालियावास क्षेत्र में एक बेस कैंप भी स्थापित किया गया है, जहां से पूरे निर्माण कार्य की निगरानी की जा रही है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ ने हाल ही में आबू रोड-अंबाजी रेलखंड का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से परियोजना को पूरा करने के निर्देश दिए। यह नई रेल परियोजना न केवल राजस्थान और गुजरात के विकास को नई दिशा देगी, बल्कि तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगी।


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