पावापुरी जीव मैत्रीधाम में शुरू हुआ उपधान तप: देश विदेश से 600 से ज़्यादा आराधक पहुंचे
राजस्थान के सिरोही ज़िले में स्थित पावापुरी जीव मैत्रीधाम तीर्थ इन दिनों पूरी तरह आध्यात्मिक और तपोमय वातावरण से भर गया है, क्योंकि आचार्य उदयवल्लभ सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में यहाँ उपधान तप की शुरुआत होने जा रही है। देश-विदेश से 600 से अधिक आराधक इस महान साधना में शामिल होने के लिए पावापुरी पहुँच चुके हैं। पहला प्रवेश 5 दिसंबर और दूसरा प्रवेश 7 दिसंबर को होगा। पावापुरी का शांत, स्वच्छ और नयनरम्य वातावरण, तपकों के अनुरूप तैयार की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाएँ और तीर्थ की दिव्यता हर आराधक को भीतर तक स्पर्श कर रही है। KP संघवी परिवार द्वारा निर्मित इस विशाल तीर्थ में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय, पावापुरी की तर्ज पर बना भगवान महावीर स्वामी का जल मंदिर और 5000 से अधिक गौधन वाली भव्य गौशाला इसकी विशेष पहचान है। उपधान तप की महिमा, गुरुदेव की प्रेरक वाणी और तप क्रियाओं की गहराई को देखते हुए छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ आराधक तक सभी में खास उत्साह है। इस उपधान तप के सम्पूर्ण लाभार्थी मंजुला बेन रमनलाल वाडीलाल शहा – आनंद मंगल परिवार हैं, जिनकी भावना और सेवा से यह आयोजन और भी मंगलमय बन रहा है। सभी तपस्वियों का मोक्ष माला रोहन 26 जनवरी 2026 को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
इसी बीच, पावापुरी में मौजूद स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पावापुरी का अद्भुत वातावरण, व्यवस्था की पारदर्शिता, आराधकों की तपशक्ति और तीर्थ की दिव्यता ऐसी है जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। उनके अनुसार, यहाँ आकर यह महसूस होता है कि पावापुरी सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि जैन साधना की धड़कन है, जहाँ हर कदम पर श्रद्धा, सेवा और अध्यात्म की अनुभूति होती है। इन सबके साथ पावापुरी जीव मैत्रीधाम आज सचमुच तप, अनुशासन और भक्ति की जीवंत तपोभूमि बनकर सिरोही जिले का गौरव बढ़ा रहा है।



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