२३ वे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ का स्तवन :- रचियता नैनमलजी जैन चेन्नई
आज २३ वे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ
का च्यवन एवं केवल ज्ञान कल्याणक है। अतः प्रभु जी के
चरणों में दो भक्ति पुष्प समर्पित
हैं।
(तर्ज: ओ पवन वेग से उड़नेवाले)
तू पारस पावन चरणों में मन रहना,
तारक का नाम लेना,
श्रद्धा से काम।लेना,
जिन आना दिल धार रे,
तू
ना जरा गम करना चेतन,
नैया गर मझधार में,
जिन चरणों से बढ़ कर कोई,
सुख नहीं संसार में,
तारने की नाम में ,
जिन के अजब तासीर है,
आसरे झूठे मिलेंगे,
दुनिया के बाजार में,
झूठा है साथ जग का,
सच्चा है साथ जिनका,
पल नहीं प्रभु तू विसार re,
तू
हर कोई उलझा मकान,
रोटी कपड़े के जाल में,
बचा नही कोई कर्मों से,
जल थल नभ पाताल में,
कई रंग के कई रूप के
धोखे मिलते हैं यहां,
नैन नही है कोई तेरा,
तारक बिन बदहाल में,
फनी है प्रीत जग की,
साची है प्रीत जिनकी,
जिन का तू कर एतबार रे,
कर
***********************
(तर्ज: डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली)
तेरी जय हो पारस भव पार करें,
तेरी जय हो,
मेरे मन घर में नाथ निवास करें,
तेरी जय हो,
भोर चरणों में तेरे मेरी शाम हो,
इन होटों पे मेरे तेरा नाम हो,
हर सांस मेरी नाथ तुझ से चले,
ध्यान दिल में तेरा आठों याम हो,
तेरी जय हो
ये मेरी जिंदगी है अमानत तेरी,
दौर गम में खुशी है इनायत तेरी,
तेरी किरपा से मुक्ति के द्वार खुले,
गूंजे कानों में अरिहंत आहट तेरी,
तेरी जय हो
नैन नजरों को तेरा नजारा मिले,
तुझ से मुक्ति का मोहे इशारा मिले
मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे
संघ जयवंत तारक तिहारा मिले,
तेरी जय हो

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें