नाम में है बात — जानिए भारत के सबसे छोटे और सबसे लंबे नाम वाले रेलवे स्टेशन की कहानी


नई दिल्ली। भारतीय रेलवे सिर्फ ट्रेनों के नेटवर्क या यात्री आंकड़ों के कारण ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे और दिलचस्प स्टेशनों की वजह से भी चर्चा में रहता है। आज हम बात कर रहे हैं दो ऐसे रेलवे स्टेशनों की, जिनके नाम अपने आप में रिकॉर्ड बन गए हैं — एक ऐसा स्टेशन जिसका नाम देश में सबसे छोटा है, और दूसरा, जो अपने सबसे लंबे नाम के कारण चर्चा में रहता है।

ओडिशा के झारसुगुड़ा ज़िले के पास स्थित ‘इब’ रेलवे स्टेशन का नाम केवल दो अक्षरों का है — ‘Ib’। यह नाम जितना छोटा है, इसका ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व उतना ही बड़ा है। इसका नाम पास से बहने वाली इब नदी से लिया गया है। 1891 में जब बंगाल नागपुर रेलवे की स्थापना हुई, तो इस क्षेत्र को जोड़ा गया और 1900 में जब इब नदी पर पुल बना, तभी से यह स्टेशन एक औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरने लगा। इब वैली कोलफील्ड की खोज ने इसे और भी महत्त्वपूर्ण बना दिया। इतने वर्षों बाद भी यह स्टेशन न केवल रेल यातायात में, बल्कि भारत की रेल heritages में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

वहीं दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर बसा ‘वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा’ स्टेशन एक दिलचस्प रिकॉर्ड रखता है। अंग्रेजी में इसके नाम में कुल 28 अक्षर होते हैं, जो इसे भारत का सबसे लंबा एकल शब्द वाला रेलवे स्टेशन बनाते हैं। स्टेशन कोड VKZ वाले इस स्टेशन पर केवल पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन इसका नाम यात्री के मन में ऐसा असर छोड़ता है, जो किसी एक्सप्रेस ट्रेन से कम नहीं। स्थानीय लोग इसे श्रद्धा से "श्री वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा" कहकर बुलाते हैं, जिससे नाम और भी लंबा हो जाता है। यह नाम एक समृद्ध परंपरा और भाषा की जड़ें दर्शाता है।

हालांकि, चेन्नई सेंट्रल स्टेशन को 2019 में नया नाम मिला — “पुरच्चि थलैवर डॉ. एम. जी. रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन”। इस नाम में कुल 57 अक्षर हैं और यह औपचारिक रूप से भारत का सबसे लंबा नाम बन गया है, लेकिन यह कई शब्दों से मिलकर बना है, जबकि वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा आज भी सबसे लंबा एकल शब्द वाला नाम है।

ये दोनों स्टेशन केवल रेलवे मानचित्र पर बिंदु नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के प्रतीक हैं। एक तरफ 'इब' की संक्षिप्तता में निहित सरलता और औद्योगिक विरासत है, तो दूसरी तरफ 'वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा' में भाषा, परंपरा और गौरव का विस्तार समाया है। भारतीय रेलवे की इस अनूठी विशेषता को जानना न केवल जानकारीपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि हमारे देश की विविधता किस तरह हर कोने में झलकती है — चाहे वह ट्रेन की सीट हो, स्टेशन का प्लेटफॉर्म, या फिर सिर्फ नाम की पट्टिका ही क्यों न हो।

दिनेश देवड़ा धोका



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