सेना ने की सटीक सृजरी..... अशोक दोशी
सेना ने की सटीक सृजरी,
आपरेशन सिंदूरी से।
ड्रोन विमान दुश्मन देश के,
मार गिराये दूरी से ।।
जंग हमारी मजबूरी थी,
दुश्मन की बदमाशी थी।
छेड़ा तो फिर कैसे छोड़े,
ललकार वो विनाशी थी ।।
कौन प्रबुद्ध युद्ध चाहेगा,
ये धन की बर्बादी है।
नहीं शौक ऐसा भी हमको,
बहुत बड़ी ये व्याधी है ।।
स्वाभिमान की सघन सुरक्षा ,
देखो बहुत जरूरी है ।
देश सुरक्षा का मसला हो
रखनी वो मगरूरी है ।।
अभी कुछ नहीं कह सकते,
जंग कभी पूरी होगी।
अंत हो आंतकी आका का,
माॅंग तभी सिंदूरी होगी।।
विवश किया हमें अस्त्र उठाने,
पड़ौसी पाक उन्मादी है।
नापाकी इनके मनसूबे,
उपद्रवी वो विवादी है।।
हम चाहतें चैन शांति अमन ,
वे बर्बर जल्लादी है ।
हम प्रगतिशील आशावादी
वे निरे नामुरादी है।
स्वरचित:अशोक दोशी


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