*संतों और सेवा में लगे लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है*:- दिनेश देवड़ा धोका
आज सुबह की शुरुआत एक बहुत ही दुखद खबर के साथ हुई। राजस्थान के पाली जिले के जाड़न इलाके में सुबह करीब साढ़े छह बजे जैन धर्म के श्वेतांबर मूर्तिपूजक आचार्य पूंडरिक रत्न सूरीश्वरजी महाराज साहब का विहार के दौरान सड़क हादसे में निधन हो गया। एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी और उनका जीवन यहीं थम गया।
दुख की बात ये है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई संतों और साध्वियों की जीवन यात्रा ऐसे ही हादसों में खत्म हो चुकी है। ये वही लोग होते हैं जिन्होंने सब कुछ छोड़ कर संयम और साधना का रास्ता अपनाया होता है। जो समाज को शांति, अहिंसा और धर्म का रास्ता दिखाते हैं, वही संत जब सड़क पर असुरक्षित महसूस करें, तो ये समाज के लिए चिंता की बात है।
और बात केवल संतों की ही नहीं है, उनके साथ सेवा में लगे हुए वो श्रद्धालु भी कई बार हादसों के शिकार होते हैं। कई घटनाएं ऐसी भी रही हैं जहां सेवा देने वाले श्रावक खुद किसी वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए या अपनी जान गंवा बैठे। वे न कोई प्रचार चाहते हैं, न कोई पुरस्कार, बस संतों की सेवा को ही अपनी तपस्या मानते हैं। लेकिन जब कुछ होता है, तो कई बार समाज की ओर से उनके लिए कोई विशेष ध्यान या संवेदना नहीं दिखती।
हम हर बार ऐसी घटनाओं पर दुख जताते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं, कुछ जगहों पर गुणानुवाद सभा करते हैं, संकल्प भी लेते हैं कि अब ऐसा नहीं होने देंगे। लेकिन कुछ दिन बीतते ही फिर सब पहले जैसा हो जाता है, और अगली बार जब कोई और हादसा होता है, तब फिर वही चर्चा शुरू हो जाती है।
अब समय है सिर्फ दुख जताने का नहीं, ठोस कदम उठाने का। हर जैन संघ और समाज को मिलकर विहार सेवा की एक मजबूत और सुरक्षित व्यवस्था बनानी होगी। विहार सेवा में लगे युवाओं को बेसिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। संतों के मार्ग का पहले से निरीक्षण हो, खतरे वाली जगहों से बचा जाए, और कोशिश की जाए कि सूर्योदय से पहले या तेज़ रफ्तार वाले हाइवे पर विहार न किया जाए।
जरूरत इस बात की भी है कि विहार सेवा में लगे लोगों को समाज की तरफ से सुरक्षा उपकरण दिए जाएं जैसे रिफ्लेक्टिव जैकेट्स, हेलमेट और प्राथमिक चिकित्सा का सामान। उन्हें सिर्फ सेवा करने वाले न समझें, उन्हें धर्म की रक्षा करने वाला मानें, क्योंकि वास्तव में वो हमारे धर्मदूतों की रक्षा के लिए आगे आते हैं।
अब और देर नहीं की जा सकती। जितनी जल्दी हम जागरूक होंगे, संगठित होंगे, और व्यवस्था मजबूत करेंगे, उतनी ही जल्दी हम अपने संतों और उनके साथ सेवा में लगे लोगों की जान को इन हादसों से बचा पाएंगे।
जिनशासन की रक्षा सिर्फ प्रवचन सुनने से नहीं होगी, उसके रक्षकों की रक्षा से होगी।
जय जिनशासन
*दिनेश देवड़ा धोका अहमदाबाद*
*9442086990*

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