पालिताना सिद्धवट भूमि पर 30 नवम्बर को शाश्वत, चारित्र व दीपिका लेंगे दीक्षा
अहमदाबाद, शाहिबाग – संयम की पावन यात्रा ने आज मोनालीसा सोसाइटी से गिरधर नगर संघ तक एक ऐतिहासिक अध्याय रच दिया। भव्य शोभायात्रा में धर्मनिष्ठ मुमुक्षुओं का काफिला जब गाजे-बाजे, श्रद्धा और समर्पण के साथ गिरधर नगर संघ पहुँचा, तो पूरा वातावरण संयम की साधना से सराबोर हो उठा।
इस समारोह का आयोजन विशेष रूप से मुमुक्षु शाश्वत भाई, मुमुक्षु चारित्र भाई और मुमुक्षु दीपिका बहन के दीक्षा मुहूर्त प्रदान करने के शुभ उद्देश्य से किया गया था।
कार्यक्रम की शुरुआत परम पूज्य आचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा. और साधु-साध्वियों की निश्रा में हुई। धर्मसभा में विशेष रूप से धैर्य भाई का बहुमान किया गया, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में 5100 से अधिक जैन गाथाएं कंठस्थ कर, जैन धर्म के प्रति अगाध भक्ति का परिचय दिया। यह बहुमान बाल मुमुक्षु शाश्वत द्वारा किया गया, जो अब संयम जीवन की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।
मुमुक्षु विरती बहन का बहुमान बागरेचा पोमानी परिवार द्वारा किया गया, जिन्होंने संयम साधना के पथ पर अडिग रहने का निर्णय लिया है।
गुरुदेव आचार्य श्री ने अपने प्रेरक प्रवचन में तीनों मुमुक्षुओं – शाश्वत, चारित्र और दीपिका – के नामों की गूढ़ व्याख्या करते हुए संयम जीवन की महिमा को अत्यंत हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से शाश्वत की भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि “शाश्वत अब शाश्वत जीवन की दिशा में अग्रसर हैं, और पालिताना की सिद्धवट भूमि पर दीक्षा लेकर जिनशासन को गौरवान्वित करेंगे।”
सभा में घोषणा की गई कि जो भी श्रद्धालु भव आलोचना प्राप्त करना चाहते हैं, वे बंद लिफाफे में आलोचना पात्र भरकर गुरुदेव को समर्पित करें। गुरुदेव द्वारा व्यक्तिगत रूप से आलोचना दी जाएगी तथा संयमी परिवार द्वारा उनका बहुमान किया जाएगा।
तीनों मुमुक्षुओं ने भी मंच पर अपने मनोभाव प्रकट करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने गुरुकुल जीवन में रहकर संयम की दिनचर्या को जाना, और अंततः संयम जीवन को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में बागरेचा-पोमानी परिवार ने गुरुदेव से दीक्षा मुहूर्त की विनती की। गुरुदेव ने घोषणा की कि मिगसर सुद 10, 30 नवम्बर 2025 को पालिताना की सिद्धवट भूमि पर यह ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव संपन्न होगा।
कार्यक्रम के पश्चात आयोजित स्वामी वात्सल्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया।
यह आयोजन न केवल तीन मुमुक्षुओं की संयम यात्रा का प्रतीक था, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए संयम, साधना और सेवा की एक अमिट प्रेरणा बनकर इतिहास में अंकित हो गया है।





टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें