पचास साल का साथ, बच्चों ने खास अंदाज़ में मनाई मम्मी-पापा की शादी की सालगिरह



18 मई। 2025 रविवार

भायंदर मुंबई

18 मई 1975 को शादी के बंधन में बंधे वरिष्ठ कवि छगनलालजी मुथा और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती इन्द्राजी मुथा की शादी को पूरे 50 साल हो गए। इस खास मौके को उनके बच्चों ने कुछ ऐसे अंदाज़ में मनाया कि खुद मम्मी-पापा की आँखें भर आईं और देखने वाले भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके।

उनकी बेटी सपना, जो पुणे में रहती है, अचानक मुंबई आ गई। अपनी माँ, जो आँखों से देख नहीं सकतीं, को बहन राखी के साथ मिलकर दुल्हन की तरह सजाया। माँ की आँखें भले न देख सकें, लेकिन चेहरे पर वो खुशी साफ झलक रही थी, जैसे फिर से शादी का दिन जी रही हों।

फिर बेटे समीर, राखी और सपना ने मिलकर मम्मी-पापा के पैर धोए, उनका आशीर्वाद लिया, तिलक करके आरती उतारी और शादी के वक्त की एक पुरानी फोटो फ्रेम करवाकर तोहफे में दी। इसके बाद दोनों को सोने की अंगूठियाँ दी गईं, जो उन्होंने प्यार से एक-दूसरे को पहनाईं। वो पल सच में यादगार बन गया।

इस मौके पर उनके बेटे जितेन्द्र (बहू शीतल, पोती मान्या) दुबई से और श्रीपाल (बहू दामीना, पोता राघव) ऑस्ट्रेलिया से वीडियो कॉल पर जुड़े। साथ ही दामाद जतीनजी, पुनीतजी और उनके बच्चे लोमस, प्रिया, पर्ल और जिहान भी मम्मी-पापा का आशीर्वाद लेने मौजूद थे।

सुबह से ही रिश्तेदारों, दोस्तों, साहित्यिक साथियों और जान-पहचान वालों के फोन, मैसेज, शुभकामनाएं लगातार आ रही थीं। मुथा जी ने सबको दिल से धन्यवाद कहा और ढेरों आशीर्वाद भी दिए।

इस मौके पर मुथा जी ने कहा, “भगवान से यही दुआ है कि हर माँ-बाप को ऐसी संतान मिले जो बुढ़ापे में उन्हें प्यार, सुकून और सम्मान दे।”

ये सालगिरह सिर्फ एक जश्न नहीं थी, बल्कि ये दिखा गई कि सच्चे रिश्ते, अच्छे संस्कार और बच्चों का प्यार जिंदगी को कितना सुंदर बना सकते हैं। मुथा परिवार ने जो किया, वो हर घर के लिए एक मिसाल बन गया।

रिपोर्ट : दिनेश देवड़ा धोका

(फोटो और जानकारी: मुथा परिवार के सौजन्य से)





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