बिल से इन्हें निकालो बाहर.... अशोक दोशी

 



दुश्मन जो सीमा के बाहर, 

उसको तो निपटा देंगे।

घर के भीतर हैं जो दुश्मन, 

उनसे कैसे निपटेंगे।।


सबसे पहले उनसे निपटो, 

खेले दुश्मन की गोदी।

उनके चेहरों को पहचानो, 

कब्र जिन्होंने थी खोदी।


बिल से इन्हें निकालो बाहर, 

ये तो घर के भेदी हैं। 

करो फैसला इनका पहले, 

ये विधान विच्छेदी हैं।।


जब तक जयचंद है देश में, 

कैसे बात बनेगी वो।

गौरव पायेगी वे माताएं ,

देश भक्त जनेगी तो।


स्वरचित:अशोक दोशी



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अहमदाबाद में श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा का निधन, नेत्रदान कर बनीं समाज के लिए प्रेरणा

नाहटा परिवार द्वारा आयोजित "रिषभ राज संघोत्सव" का शुभ मुहूर्त प्रदान

कर्णावती यूनिवर्सिटी में गढ़सिवाना की योगिता (देविका) जैन को गोल्ड मेडल

तेरापंथ युवक परिषद, अहमदाबाद की वार्षिक सभा हुई सम्पन्न,प्रदीप बागरेचा बने नए अध्यक्ष

भाव अशुभ शुभ हो पहले POETRY

मिलावट के खिलाफ जागरूकता की जरूरत :- अशोक बाफना

अग्रवाल समाज का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट: मदुरै स्थित तथनेरी देवभूमि (श्मशान गृह) में वेटिंग हॉल का उद्घाटन 10 मार्च को

राजभवन में हुआ PYS का 212वां सेशन — आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने दी “ब्लैक बॉक्स” के ज़रिए खुद को समझने की सीख

पत्नी की याद में समर्पण की मिसाल: चूरू के व्यापारी निर्मल सेठिया ने यूके में रचा इतिहास

धर्म जड़ नहीं, एक प्रवाह है- आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरीजी म.सा. का गिरधर नगर में प्रेरणादायक प्रवचन