*खाने में समझौता नहीं — शुद्धता ही सर्वोपरि* :- अशोक बाफना

 


मित्रों, आज कई होटल और रेस्टोरेंट ऐसे हैं जहाँ वेज और नॉनवेज भोजन एक ही किचन में, एक ही प्लेटफॉर्म पर और एक ही तवे पर तैयार किया जाता है, जो हर शाकाहारी व्यक्ति की भावनाओं और विश्वास पर सीधा आघात है। हमारे लिए भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शुद्धता, संस्कार और जीवनशैली की पहचान है। अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि किसी शाकाहारी व्यक्ति को गलती या लापरवाही से नॉनवेज परोस दिया गया और बाद में होटल वाले थोड़ा जुर्माना देकर या एक सॉरी बोलकर बच जाते हैं, जबकि उस व्यक्ति और उसके परिवार के मन पर वह घटना जीवनभर पछतावे और पीड़ा के रूप में रह जाती है। आज की युवा पीढ़ी होटल-रेस्टोरेंट की चकाचौंध, इंस्टा-रील्स की दुनिया और ट्रेंडिंग के नाम पर ऐसे स्थानों पर जा रही है जहाँ उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि उनके प्लेट में क्या परोसा जा रहा है माहौल और आकर्षण में वे अनजाने में वह खा आते हैं जो उनके संस्कारों और जीवन मूल्यों के बिल्कुल विपरीत होता है। शुद्ध वेज का अर्थ सिर्फ शाकाहारी व्यंजन नहीं, बल्कि अलग किचन, अलग तवा, अलग बर्तन और बिना किसी मिलावट या क्रॉस-कंटैमिनेशन के बनाया गया भोजन है। मैं पिछले 20–25 वर्षों से ऐसे किसी भी होटल में नहीं गया जहाँ वेज और नॉनवेज साथ बनाया जाता हो, क्योंकि शुद्ध भोजन हमारी आस्था नहीं, हमारा स्वाभिमान है और स्वाभिमान पर कभी समझौता नहीं होता। हम सभी संकल्प लें कि जहाँ भोजन शुद्ध न बने, वहाँ न जाएँ और न अपने परिवार को ले जाएँ, ताकि आने वाली पीढ़ी भी यह समझे कि भोजन वही होना चाहिए जो शरीर को ऊर्जा दे, मन को शांति दे और हमारी भावनाओं का सम्मान करे।

*अशोक बाफ़ना,*

 अहमदाबाद- मोकलसर



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