शाहिबाग में भक्ति का अद्भुत नज़ारा* *उज्ज्वला का वर्षीदान वरघोड़ा धूमधाम से संपन्न*
*अहमदाबाद* (दिनेश देवड़ा धोका)
शाहिबाग में रविवार को निकला वर्षीदान का वरघोड़ा ऐसा दृश्य बन गया जिसने वहाँ मौजूद हर व्यक्ति के मन को छू लिया। सिवाना की उज्ज्वला, पुत्री श्री संजय कुमारजी मेहता, जो जल्द ही संयम जीवन अपनाने जा रही हैं। दीक्षा से 51 दिन पहले ही घर-परिवार का मोह छोड़कर अपनी गुरुमा के सान्निध्य में रहकर संयम की राह पर चलने का उनका संकल्प सुनकर हर किसी की आँखों में सम्मान और भावनाओं का मिश्रित भाव दिखा। सच में, उज्ज्वला जी अपने नाम की तरह ही अपने परिवार और जिनशासन दोनों का नाम उज्जवल करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।
वरघोड़े में साधु-साध्वी महाराज साहेब से लेकर सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएँ भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए। इसी दौरान आयोजन को कवर कर रहे स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका ने भी वहाँ की अनोखी भक्ति और उमंग को बेहद नज़दीक से अनुभव किया। अनेक तरह के बैंड , ढोल की गूंज, नृत्य कलाकारों की ताल, सजी हुई घोड़ा गाड़ियाँ, जैन पताका, घोड़े और भक्तिमय माहौल ने पूरे मार्ग को भव्यता से भर दिया। सबसे मन मोह लेने वाला दृश्य भगवान का रथ था, जिसे पूजा के वस्त्र पहनकर युवा अत्यंत श्रद्धा और समर्पण के साथ चला रहे थे। उनकी चमकती आँखों में भक्ति और गर्व साफ झलक रहा था।
पूरे मार्ग में जय-जयकार की आवाजें गूंजती रहीं। “म्हारी बेन दीक्षा लेशे वाह भाई वाह” और “दीक्षार्थी अमर रहे” जैसे नारे भक्ति गीतों के साथ मिलकर माहौल को और पवित्र बना रहे थे। यह वरघोड़ा सिर्फ एक शोभायात्रा नहीं रहा, बल्कि आत्मिक उत्साह का ऐसा अनुभव बन गया जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को यह एहसास कराया कि वे किसी महान परिवर्तन और पवित्र आरंभ के साक्षी हैं।


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