चारित्र भाई, दीपिका बेन और बाल मुमुक्षु शाश्वत की विदाई* *धर्म की ध्वनि से गूंजा शाहिबाग*

 


अहमदाबाद

शाहिबाग की धरती आज सचमुच धर्म और भावनाओं से भर उठी, जब 30 नवंबर को सिद्धवड पालिताना में दीक्षा लेने वाले गढ़ सिवाना निवासी अहमदाबाद प्रवासी बागरेचा परिवार के रत्न तीनों मुमुक्षु चारित्र भाई, दीपिका बहन और बाल मुमुक्षु शाश्वत भाई की बंदौली 22 नवंबर को उनके घर से निकली और पूरे इलाके में भक्ति का माहौल छा गया। गिरधर नगर संघ के आदि सुराज बैंड की धुनों के साथ चलती यह यात्रा किसी आम शोभा यात्रा जैसी नहीं लग रही थी, बल्कि ऐसा लगा जैसे पूरा शहर संयम की एक पवित्र यात्रा में शामिल हो गया हो। जसुद बाई चौक पर जब इस बंदौली का समापन्न और भावुक विदाई समारोह हुआ, तब तीनों मुमुक्षुओं ने अपने मन के भाव बताए और वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल छू लिया। चारित्र भाई, जिनके नाम के साथ ही चारित्र जुड़ा है वो 30 नवंबर 1991 को जन्मे थे और उसी तारीख 30 नवंबर 2025 को संयम जीवन में कदम रख रहे हैं यह संयोग नहीं, बल्कि आत्मा की सच्ची पुकार जैसा महसूस हुआ। दीपिका बहन, जिनके नाम मे ही प्रकाश और मार्गदर्शन  है, अपने शांत और दृढ़ निश्चय ही जिनशासन के कई लोगों के मन में नई रोशनी जगा गईं। वहीं शाश्वत भाई, जिनके नाम शाश्वत धर्म जुड़ा है वो बचपन से ही धार्मिक भावों से भरे रहे बिना सिखाए उव्वसग्रहम् का पाठ करना और पवित्र जगहों पर दिक्षा-भाव में डूब जाना देखकर कोई भी समझ सकता था कि यह आत्मा पहले से ही मोक्षमार्ग की ओर बढ़ रही है। श्री गिरधर जैन संघ ने तीनों का सम्मान किया और तीनों ने माता-पिता तथा संघ की वधामना कर अपनी कृतज्ञता जताई। यह पूरा दृश्य इतना भावुक और पवित्र था कि जो कोई भी वहां मौजूद था, वह इसे जीवनभर नहीं भूल पाएगा। स्वतंत्र पत्रकार दिनेश देवड़ा धोका, जो इस आयोजन को नजदीक से देख रहे थे, ने कहा संयम को केवल आंख से नहीं देखा जाता, यह दिल में उतर जाता है। चारित्र भाई की चमक, दीपिका बहन की शांति और शाश्वत की जन्म से ही धर्म मे रुचि देखकर लगा कि धर्म आज भी हमारी आंखों के सामने जीता-जागता है।

दीपिका बेन कुल दीपिका से शासन दीपिका बनने जा रही है सच में, आज शाहिबाग के लोगों के मन में एक ही भावना थी—धन्य हैं ये तीनों मुमुक्षु, जिन्होंने दुनिया की भीड़ छोड़कर मोक्ष की राह चुन ली और अपने जीवन से एक नई प्रेरणा दे गए।



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