माँ भारती के लाल की वाणी :- दिनेश देवड़ा धोका

 


दिनेश देवड़ा धोका


न मिट सके जो इतिहास से, 

वो जज़्बा हममें आज भी है,

हर शत्रु की आँखों में खटकें, 

वो रौब हमारी लाज भी है।

ना झुकेंगे, ना रुकेंगे, 

ना थकेंगे इस रणभूमि में,

हर साँस तिरंगे की खातिर,

हर श्वास बने आवाज भी है।


बोलो जयघोष गर्जना से,

रण का बिगुल बजा दो अब,

माँ के चरणों में शीश धरे,

तन-मन-धन सब अर्पण तब।

धूल बने जो भारत को छूए,

वह घमंड नहीं, धर्म हमारा है,

भारत माँ की सेवा करना,

सबसे ऊँचा कर्म हमारा है।


वन्दे मातरम्!

जय हिन्द, जय भारत!



टिप्पणियाँ

  1. सूर्य सी ओजस्वी वाणी जिनकी दिनेश जिनका नाम है
    जैसा नाम वैसा ही काम है
    भारत मां की शान की खातिर
    लिखते आला कलाम है

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