भक्ति और भावना से महका भिलाड़ — पंचधातु श्री शीतलनाथ भगवान की प्रतिष्ठा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

 


भिलाड़, विशेष संवाददाता —
जहाँ भलाई होती है, वहाँ भगवान स्वयं पधारते हैं; और जहाँ बुराई होती है, वहाँ से भगवान वहा से चले जाते हैं  आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा के इन गूढ़ वचनों की अनुभूति तब हुई जब भिलाड़ नगर का फूल-प्रशांतपूजा जैन मंदिर प्रभु श्री शीतलनाथ भगवान की पंचधातु से निर्मित, शिल्पयुक्त, परिकर सहित प्रतिमा की प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन का साक्षी बना। यह कोई सामान्य अनुष्ठान नहीं था, बल्कि श्रद्धा, शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नयन का अनुपम संगम था, जिसमें धर्म, दर्शन और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा।
पूज्य राडपट्टी के धर्मसूर्य आचार्य श्री यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराजा, आचार्य श्री भाग्ययशसूरीजी म.सा., आचार्य श्री भव्ययशसूरीजी म.सा. एवं ह्रींकारयशसूरीजी म.सा. सहित अनेक गुरुभगवंतों की उपस्थिति में यह प्रतिष्ठा महोत्सव एक आध्यात्मिक पर्व बन गया। मंडप में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेवों के  प्रवचनों से अपने हृदय को पावन किया, जिनमें यह संदेश बार-बार प्रतिध्वनित होता रहा कि मोती की उत्पत्ति सदैव शुद्ध और योग्य स्थलों पर होती है  नालियों, खड्डों और गंदगी में नहीं। उसी प्रकार परम तत्व का अवतरण भी केवल उन हृदयों में संभव है जो भावुक और भलामन हैं, जहाँ प्रेम है, जहाँ प्रभु के लिए स्थान है। जहाँ प्रेम है, वहाँ प्रभु हैं  जैसे सूर्य के साथ प्रकाश होता है।
इस अवसर पर भक्ति का भाव इतना प्रगाढ़ था कि हर व्यक्ति की आँखें नम थीं। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित अनेक प्रांतों से पधारे गुरुभक्तों ने इस अनुपम आयोजन को अपनी उपस्थिति से महिमामंडित किया। शंख-ध्वनि, घंटानाद और जयघोषों के बीच जब पंचधातु प्रभु की मूर्ति प्रतिष्ठित हुई, तब ऐसा लगा मानो स्वयं भगवान ने उस मंदिर को अपना निवास बना लिया हो।
साथ ही इस अवसर पर भिलाड़ नगर के रत्नस्वरूप रहे मुनिश्री मोक्षांगयशविजयजी महाराज की दीक्षा तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सांसारिक परिवार द्वारा सामूहिक स्नात्र पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालु भक्तिभाव से भीग गए। यह क्षण केवल श्रद्धा का नहीं, आत्मिक एकात्मता का था, जहाँ हर व्यक्ति स्वयं को प्रभु के निकट अनुभव कर रहा था।
आज ही उमरगाम GIDC संघ में भी ध्वजारोहण का शुभ आयोजन सम्पन्न हुआ, वहीं 31 मई को पावन पुष्य नक्षत्र में गिरनारधाम–विहारधाम का उद्घाटन होना है  यह वही पुण्यभूमि है जहाँ प्रतिवर्ष 3000 से अधिक गुरु भगवंत अपनी उपस्थिति से वातावरण को पवित्र करते हैं। 20 से 25 मई के बीच दहाणु गोपीपुरा में एल.वी.के.एस. संस्था द्वारा विशेष कन्या संस्कार ग्रीष्म कालीन शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना आवश्यक है। इस वर्ष का चातुर्मास नवी मुंबई के वाशी संघ में होगा, जिसका प्रवेश दिवस 7 जुलाई निश्चित हुआ है।
इसके अतिरिक्त पूज्य साध्वी श्री विशांतमालाश्रीजी महाराज की 100वीं ओली का पारणा 13 जून को भायंदर में आयोजित किया जाएगा, वहीं 7 जून को 24 जिनालय में प्रभु प्रवेश और 8 जून को 52 जिनालय के भव्य भूमिपूजन का आयोजन किया जाएगा।
भिलाड़ की यह प्रतिष्ठा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, अपितु यह उस दिव्य अनुभूति का उत्सव था जो जीवन को प्रभुमय बनाती है, हृदय को निर्मल करती है और मन को अध्यात्म की ओर ले जाती है। जहाँ ऐसा सरल हृदय हो, वहाँ परमात्मा का अवतरण स्वाभाविक है।



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