पहलगाम हमले के बाद कराची बेकरी के नाम पर विरोध तेज: युवाओं ने की नाम बदलने की मांग


हैदराबाद

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद  देशभर में गुस्से और राष्ट्रभाव की लहर दौड़ पड़ी है। इसी माहौल में हैदराबाद की प्रसिद्ध 'कराची बेकरी' एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है  इस बार उसके नाम को लेकर।

युवाओं और विभिन्न संगठनों ने यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया है कि 'कराची' जैसा नाम, जो पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है, देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब पूरा देश आतंकी घटनाओ के प्रति संवेदना और गुस्से से भरा है, पाकिस्तान से जुड़ा कोई भी प्रतीक या नाम स्वीकार्य नहीं हो सकता।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रगौरव से जुड़ा मुद्दा है। “हमें ऐसे नामों की ज़रूरत नहीं जो हमें हमारे दुश्मन की याद दिलाएं,” एक युवा ने विरोध के दौरान कहा।

नाम बदलना या नही यह उनका निजी निर्णय हो सकता है पर उधर, युवा वर्ग का मानना है कि बेकरी की पहचान उसकी गुणवत्ता से है, न कि नाम से। एक ग्राहक ने कहा, "अगर नाम बदलने से देश के लोगो की भावना को सुकून मिलता है, तो इसमें कोई नुकसान नहीं।"

सोशल मीडिया पर भी विरोध की लहर देखी जा रही है ।

कराची बेकरी के सामने अब एक स्पष्ट विकल्प है  क्या वह अपनी पहचान को लेकर पुराने नाम पर अड़ी रहेगी या राष्ट्र की भावना को सम्मान देने के लिए बदलाव का रास्ता अपनाएगी?



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अहमदाबाद में श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा का निधन, नेत्रदान कर बनीं समाज के लिए प्रेरणा

नाहटा परिवार द्वारा आयोजित "रिषभ राज संघोत्सव" का शुभ मुहूर्त प्रदान

कर्णावती यूनिवर्सिटी में गढ़सिवाना की योगिता (देविका) जैन को गोल्ड मेडल

तेरापंथ युवक परिषद, अहमदाबाद की वार्षिक सभा हुई सम्पन्न,प्रदीप बागरेचा बने नए अध्यक्ष

भाव अशुभ शुभ हो पहले POETRY

मिलावट के खिलाफ जागरूकता की जरूरत :- अशोक बाफना

अग्रवाल समाज का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट: मदुरै स्थित तथनेरी देवभूमि (श्मशान गृह) में वेटिंग हॉल का उद्घाटन 10 मार्च को

राजभवन में हुआ PYS का 212वां सेशन — आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने दी “ब्लैक बॉक्स” के ज़रिए खुद को समझने की सीख

पत्नी की याद में समर्पण की मिसाल: चूरू के व्यापारी निर्मल सेठिया ने यूके में रचा इतिहास

धर्म जड़ नहीं, एक प्रवाह है- आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरीजी म.सा. का गिरधर नगर में प्रेरणादायक प्रवचन