ऑपरेशन सिंदूर — जब माताओं-बहनों के उजड़े सिंदूर का जवाब बना दुश्मन की बर्बादी का सूरज
6-7 मई 2025 की रात भारतीय इतिहास में सिर्फ एक सैन्य अभियान के रूप में नहीं, बल्कि स्त्रीशक्ति के प्रचंड प्रतिशोध के रूप में दर्ज हो गई। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित उन आतंकी ठिकानों को, जहाँ वर्षों से भारत के सपूतों के विरुद्ध षड्यंत्र रचे जा रहे थे, भारतीय सेना ने ऑपरेशन 'सिंदूर' के तहत नेस्तनाबूद कर दिया। लेकिन इस बार बंदूकें पुरुषों के कंधे से नहीं चलीं, इस बार निर्णय उन महिलाओं ने लिया जिनकी आँखों ने अपनों के तिरंगे में लिपटे शव देखे थे। इस बार युद्ध के मैदान में नेतृत्व किया देश की दो वीरांगनाओं ने , कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने।
वे आतंकी जिन्होंने भारतीय महिलाओं की मांग उजाड़ी थी, जिन्होंने जवानों को शहीद कर स्त्रियों की दुनिया को शोक में डुबोया था, उन्हें इस बार उन्हीं स्त्रियों ने ऐसा उत्तर दिया, जो सदियों तक याद किया जाएगा। कर्नल सोफिया, जिनकी रणनीति से आतंकी बंकरों की नींव हिल गई, और व्योमिका सिंह, जिनके आदेश पर राफेल से निकली आग बरसी और दुश्मन के होश उड़ गए , दोनों ही भारत की नारी शक्ति की वह प्रतीक हैं, जो अब आँसुओं से नहीं, बारूद से बात करती हैं।
ऑपरेशन का नाम 'सिंदूर' केवल एक सैन्य कोड नहीं था, यह उन हर स्त्रियों की चुप चीख का उद्घोष था, जिनके सुहाग आतंक की बलि चढ़े थे। इस बार मांगों से सिंदूर नहीं बहा, इस बार उन मांगों ने दुश्मन के ठिकानों पर कहर बरपाया। यह वही सिंदूर था जो पहले मातम बनता था, अब वही रणशक्ति बन चुका है।
जब यह ऑपरेशन सफल हुआ, और इन दोनों वीरांगनाओं ने विजयी मुस्कान के साथ सेना मुख्यालय में प्रवेश किया, तो हर आंख गर्व से नम थी। भारत की हर बेटी, हर माँ, हर बहन ने अपने भीतर एक शक्ति का अनुभव किया। उन्होंने महसूस किया कि अब वे केवल प्रतीक्षा नहीं करेंगी, अब वे रणभूमि में उतरेंगी।
आज पूरा भारत एक स्वर में कह रहा है जिन्होंने हमारी मांग का सिंदूर मिटाया था, उन्हें जवाब अब उसी सिंदूर की रक्षा में उठी बेटियों ने दिया है। कभी मांग का सिंदूर छीना था तुमने, अब उसी सिंदूर की ज्वाला बन हम आए हैं। जहाँ मातम था हमारी बिंदी का, अब वहीं रण का नगाड़ा बजाए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर अब एक सैन्य कार्रवाई नहीं, एक चेतावनी है कि भारत की स्त्रियाँ अब केवल चूड़ियाँ नहीं पहनतीं, वे कमान भी थामती हैं। उनके आँचल में जहाँ ममता है, वहीं अब मिसाइलों की गरज भी है। यह प्रतिशोध नहीं, यह राष्ट्र रक्षा का वह व्रत है, जिसमें हर स्त्री अब दुर्गा का रूप बन चुकी है।


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