BSF जवान पूर्णम कुमार की सकुशल वापसी: अटारी बॉर्डर पर हुआ शांतिपूर्ण आदान-प्रदान, पत्नी बोलीं - "अगर मोदी हैं, तो सब मुमकिन है"

 


बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम कुमार साहू की सकुशल वापसी ने पूरे देश को राहत की सांस दी है। लगभग तीन हफ्तों तक पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में रहने के बाद आज, 14 मई 2025 की सुबह 10:30 बजे, उन्हें अटारी, अमृतसर स्थित संयुक्त चेक पोस्ट (Joint Check Post) पर भारत को सौंप दिया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और तय प्रोटोकॉल के अंतर्गत संपन्न हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले को उच्च स्तर पर लगातार फॉलो किया जा रहा था और भारतीय एजेंसियों के प्रयासों से यह वापसी संभव हो पाई।

पूर्णम साहू की पत्नी रजनी साहू, जो पश्चिम बंगाल में रहती हैं, अपने पति की वापसी की खबर सुनकर बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "अगर प्रधानमंत्री मोदी हैं, तो सब कुछ मुमकिन है।" रजनी ने यह भी याद किया कि जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, तो मात्र 15-20 दिनों के भीतर भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के ज़रिए कई परिवारों के ‘सुहाग’ का बदला लिया। और उसी संकल्पशक्ति के साथ, मेरे पति को भी वापस लाया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री को हाथ जोड़कर दिल से धन्यवाद व्यक्त किया।

सूत्रों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार संवाद चलता रहा। दोनों देशों के सैन्य और राजनयिक चैनल्स के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि जवान की वापसी शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से हो।

रजनी साहू ने यह भी बताया कि सुबह उन्हें अधिकारियों का फोन आया और थोड़ी देर बाद खुद पूर्णम साहू ने उन्हें वीडियो कॉल किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं और जल्दी ही घर लौटेंगे। रजनी ने कहा कि उनके पति ने कहा, टेंशन मत लेना, मैं बिल्कुल ठीक हूं, और दोपहर में दोबारा बात करने का वादा किया।

पूर्णम साहू की वापसी केवल एक सैनिक की वापसी नहीं है, यह भारत की कूटनीतिक और सैन्य संकल्पशक्ति की स्पष्ट मिसाल है। यह संदेश है उन सभी के लिए, जो भारत की सीमाओं को चुनौती देते हैं  यह देश अपने सपूतों के पीछे चट्टान की तरह खड़ा है। अटारी बॉर्डर पर हुआ यह दृश्य सिर्फ एक सैनिक की घरवापसी नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की प्रतिबद्धता और ताकत का प्रतीक बन गया।

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