गुजरात का केसर आम: मिट्टी की मिठास, मेहनत का मेवा, और स्वाभिमान की खुशबू


गर्मी शुरू होते ही जैसे ही बाजारों में आमों की खुशबू उड़ती है, तो एक नाम सबसे पहले ज़ुबान पर आता है  गुजरात का केसर आम। अब ये कोई ऐसा-वैसा आम नहीं, ये तो वो फल है जो कहावत को सच कर देता है  “सौ सुनार की, एक लोहार की।” यानी जितने भी आम खा लो, एक बार केसर का स्वाद चख लिया, तो बाकी सब भुला बैठोगे।

गिर की वादियों में पला-बढ़ा ये आम, कोई साधारण फल नहीं, ये तो मिट्टी की मिठास और मेहनत का मेवा है। इसकी केसरिया रंगत सूरज की पहली किरण सी लगती है और स्वाद ऐसा कि जुबान खुद कह उठे  “जो खाए, वो वाह-वाह करे; जो देखे, वो आह-आह करे।”

गुजरात की यही धरती है, जहाँ से लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने एकता और अखंडता की मशाल जलायी, और आज इसी धरती पर उगता है ऐसा आम जो भारत को एक नई पहचान देता है। सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया, और आज गुजरात का केसर आम स्वाद के जरिए देश-विदेश में गुजरात की एक अलग ही छवि बना रहा है। “जैसी धरती, वैसी फसल”  ये कहावत यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा दिया, तो उसमें गुजरात के इस केसर आम का नाम भी खुद-ब-खुद जुड़ गया। जब स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की बात आई, तो केसर आम सबसे आगे निकला। मोदी जी ने गुजरात को सिर्फ विकास की मिसाल नहीं बनाया, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और कृषि पहचान को भी दुनिया के सामने रखा। और आज केसर आम, GI टैग के साथ, भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि शान का मीठा चेहरा बन चुका है।

गिर, जूनागढ़, अमरेली और सोमनाथ के खेतों में जब ये आम लहराते हैं, तो लगता है जैसे खेतों में केसर की चादर बिछी हो। किसानों की मेहनत, मौसम की मेहरबानी और गुजरात की मिट्टी  ये तिकड़ी मिलकर तैयार करती है ऐसा स्वाद, जो सीधे दिल में उतरता है।

ये आम सिर्फ एक फल नहीं, ये एक भाव है  गुजरात की धरती से जुड़ा हुआ, सरदार पटेल की सादगी से प्रेरित, और मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करता हुआ।

तो अगली बार जब गर्मी आए और आम की तलाश हो, तो याद रखिए “राजा हो या रंक, केसर आम सबका मन भाए।”
और जब कोई पूछे, "कहाँ से लाए ये अनोखा स्वाद?"
तो गर्व से कहिए  “गुजरात से, उस धरती से जहाँ सरदार का स्वाभिमान और मोदी का विकास, दोनों बसते हैं।”


दिनेश देवड़ा धोका अहमदाबाद



टिप्पणियाँ

  1. ये कोई आम नहीं है ये खास है
    जहां तक मेरा मानना है अगर इसकी ऑर्गेनिक नस्ल खाने को मिल जाए तो रत्नागिरी भी इसके आगे फेल है। बड़ी ही रसीला और स्वाद में मधुरता लिए एक बेजोड़ आम की जाति है खाने के बाद हाथों से कई घंटों तक इसकी खुशबू नहीं जाती हैं।अब तो राजस्थान, कर्नाटक,और तेलंगाना में भी इसकी पैदावार बड़े पैमाने पर हो रही है और हैदराबाद में तो ये अप्रैल में मिलने लग गया है,मेरे गांव मंडार. जिला सिरोही से 7 km दूर एक पटेल भाई ने अपने फार्म में करीब यह हजार से भी ज्यादा केसर आम के वृक्ष लगाए है। वहां से माल अहमदाबाद की मंडी में बिकने जाता है।काफी अच्छी पैदावार होती हैं

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