ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने इतिहास नहीं, भविष्य लिखा

 

भारत-पाकिस्तान संबंधों के लंबे और उलझे हुए इतिहास में ऑपरेशन सिंदूर वह मोड़ बन गया, जहाँ प्रतीक्षा खत्म हुई और निर्णायक कार्रवाई का युग आरंभ हुआ। यह मात्र एक सैन्य मिशन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की वह पुकार थी, जिसने दशकों से चले आ रहे आतंक के विरुद्ध अब आर-पार की नीति को जन्म दिया। पाकिस्तान और POK में जिस प्रकार से भारत ने आतंकवाद के केंद्रों को जड़ से उखाड़ा, वह हमारे तीनों सैन्य अंगों  वायुसेना, थलसेना और जलसेना  की एकजुटता, सूझबूझ और अतुलनीय साहस का परिणाम है।
भारतीय वायुसेना ने इस अभियान की पहली चिंगारी भरी। अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों ने जब रात के सन्नाटे को चीरते हुए पाकिस्तान की वायुसीमा में प्रवेश किया, तो उनकी सटीकता और साहस ने दुश्मन की पूरी एयर डिफेंस प्रणाली को ध्वस्त कर दिया। स्कैल्प और हैमर मिसाइलों के साथ की गई यह कार्रवाई मात्र 23 मिनट में पूरी हो गई, लेकिन इसने दशकों की आतंकवादी बुनियाद को हिला डाला। वायुसेना ने साबित कर दिया कि भारतीय आकाश अब केवल रक्षा का क्षेत्र नहीं, न्याय की चौखट भी है।
थलसेना की भूमिका ने इस ऑपरेशन को रणनीतिक गहराई दी। सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकियों की घुसपैठ की सभी संभावनाओं को बंद करते हुए, सेना ने एलओसी पर सटीक निगरानी और जमीन पर नियंत्रण बनाए रखा। यह साहसिक कार्रवाई केवल गोपनीयता और पराक्रम का नहीं, बल्कि उच्चतम सैन्य अनुशासन और निष्ठा का परिचायक थी।
वहीं जलसेना ने इस पूरे ऑपरेशन में समुद्री सीमाओं की चौकसी कर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी आपूर्ति, समर्थन या पलायन का मार्ग आतंकियों के लिए न बचे। भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों और युद्धपोतों ने अरब सागर के जलक्षेत्र में अदृश्य परंतु दृढ़ उपस्थिति बनाए रखी, जिससे पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियाँ निष्क्रिय रहीं। इसने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत केवल थल और नभ में ही नहीं, जल में भी शत्रु को मुंहतोड़ उत्तर देने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी यह कार्रवाई पाकिस्तान की आम जनता के विरुद्ध नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध थी। भारत ने सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, यह सुनिश्चित करते हुए कि निर्दोष नागरिकों को कोई क्षति न पहुँचे। यह भारत की नैतिकता, संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
इस ऐतिहासिक कार्रवाई के पीछे देश के राजनीतिक और रणनीतिक नेतृत्व की निर्णायक भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट आतंक-विरोधी नीति, गृहमंत्री अमित शाह की साहसिक राजनीतिक इच्छाशक्ति, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अद्भुत रणनीतिक योजना ने इस ऑपरेशन को सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता का घोषणापत्र बना दिया।
ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को बता दिया कि भारत अब केवल शब्दों से नहीं, साहस, सटीकता और सामूहिक शक्ति से जवाब देता है। आज भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब न कोई आतंकवादी सुरक्षित है, न कोई सीमा अभेद्य। यह नया भारत है  जो सहता नहीं, सहमति नहीं माँगता  बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए निर्णय लेता है, और उसे अंजाम तक पहुँचाता है।




टिप्पणियाँ

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  2. आपने एक दम सटीक विश्लेषण किया है तीनों सेनाओं के पराक्रम बहुत ही तुलनात्मक तरीके से संवार कर मोदी,शाह और डोभाल की कूटनीति को बड़े ही शानदार तरीके से उकेरा हैं,इस ऑपरेशन सिंदूर को इतिहास नहीं भारत का सुनहरा भविष्य निर्माण बताया है।जिसे पूरी दुनिया याद रखेगी।दशकों का काम सिर्फ तीन दिन में तमाम कर दुनिया को हिंदुस्तान की ताकत का लोहा मनवाया है।

    दिनेश दोशी

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