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गुरुओं की निश्रा और श्रद्धा की चमक से शाहीबाग में नूतन उपाश्रय मे कुंभ स्थापना संपन्न

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  अहमदाबाद 10 जुन 2025 आज सुबह शाहीबाग के गिरधर नगर जैन संघ के नए उपाश्रय में एक सुंदर रस की तरह बहता हुआ अध्यात्मिक उत्सव देखने को मिला। सुबह 5:15 बजे, जब हल्की रोशनी फैल रही थी और वातावरण में शांति का आलम था, तो विधि-विधान का पालन करते हुए कुंभ स्थापना का कार्य संपन्न हुआ। इस दिन का हर पल ऐसा था मानो आत्मा को छू लेने वाली खुशबू बिखर रही हो। इस पावन अवसर पर श्री प्रेम-भुवनभानुसूरिजी समुदाय के 451 दीक्षा-दानेश्वरी, पूज्य आचार्य श्री गुणरत्नसूरि महाराजा के शिष्यरत्न,  पू. आ. देव श्री रश्मिरत्नसूरि महाराजा, तथा श्री उदयवल्लभसूरि महाराजा और श्री हृदयवल्लभसूरि महाराजा सहित गुरुदेवों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी महत्त्वपूर्ण बना दिया। उनके आने से ऐसा महसूस हुआ मानो मंगलमयी आशीर्वाद सारे उपाश्रय में फैल गए हों। इस समारोह में संघ के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने  हिस्सा लिया। उनकी भक्ति और उमंग ने उस सुबह को एक नया रंग दे दिया। कुंभ स्थापना का यह शुभ अवसर कमला बेन बाबूलालजी लूनावा वाला परिवार के लिए भी खास रहा, जिन्होंने अपने समर्पण से इस आयोजन में चार चाँद लगा दिए। आदिनाथ दादा ...

संयम जीवन के 10 साल पूरे – मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी की संयम दिवस की उजवणी

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  अहमदाबाद 9 जून 2025 सोमवार आज से ठीक 10 साल पहले दिल्ली के बड़े उद्योगपति, 600 करोड़ की संपत्ति के मालिक श्री भंवरलाल दोशी ने सब कुछ छोड़कर दीक्षा ली और मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी बनकर संयम के रास्ते पर चल पड़े। आज उनके इस संयम जीवन को पूरे 10 साल हो गए, और इस मौके पर श्री गिरधर नगर जैन संघ मे एक खास शास्त्रीय सामायिक का आयोजन किया। राजस्थान के सिरोही जिले के मंडार गांव में जन्मे भंवरलालजी ने B.Com तक पढ़ाई की और फिर दिल्ली में व्यापार शुरू किया। मेहनत और ईमानदारी से उन्होंने बड़ा व्यापार खड़ा किया और प्लास्टिक इंडस्ट्री में नाम कमाया। समाज सेवा और धर्म के कामों में भी हमेशा आगे रहे – चाहे दिल्ली की महावीर सभा हो, मंडार संघ या जीरावला ट्रस्ट, हर जगह उनकी अहम भूमिका रही। सिद्धवड़ नवाणु यात्रा से लेकर शंखेश्वर तीर्थ पर 1700 लोगों का उपधान करवाया हर काम में वे सबसे आगे थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, भौतिक चीज़ों की चमक फीकी लगने लगी और अंदर से वैराग्य जागा। सत्संग, स्वाध्याय और गुरुभक्ति से उन्होंने समझ लिया कि असली सफलता तो मुनि बनकर मोक्ष की राह पर चलने में है। और फिर, दस साल पहले अह...

जवान दिल की मौत,सूरत की घटना से जागिए, नहीं तो बहुत देर हो जाएगी

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  आजकल का वक्त बड़ा अजीब हो गया है। जो दिखते हैं सबसे तंदुरुस्त, वही अचानक दिल के दौरे से जिंदगी की जंग हार जाते हैं। जिम जाने वाले, फिट बॉडी रखने वाले, हंसते-खेलते नौजवान भी अब हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। ये सब देखकर मन डर जाता है  क्या अब जवान दिल भी सुरक्षित नहीं रहे? सूरत में कल जो हुआ, उसने सबको झकझोर दिया। एक नौजवान लड़का, जिसकी हाल ही में सगाई हुई थी, अपनी दुकान पर बैठा था। कोई परेशानी नहीं, कोई तनाव नहीं  और तभी अचानक सीने में दर्द उठा। कुछ ही मिनटों में होश गया और कुछ ही देर में सांसें। जब तक अस्पताल पहुंचे, सब खत्म हो चुका था। जिस घर में शादी की प्लानिंग चल रही थी, वहाँ अब रोने की आवाज़ें हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन यह हर किसी के लिए एक चेतावनी है। आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में हमारा शरीर बाहर से तो चमक रहा है, लेकिन अंदर से रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूट रहा है। सुबह उठते ही फोन, रात को सोते वक्त तक स्क्रीन, बीच में जंक फूड, स्ट्रेस, नींद की कमी और जीरो फिजिकल एक्टिविटी — यह सब मिलकर हमारे दिल को चुपचाप थका रहे हैं। फिटनेस का मतलब अब सिर्फ बॉडी दिखाना रह...

जैन संतों की दुर्घटनाओं की आड़ में हो रही निर्मम हत्याओं के विरोध में अहमदाबाद में निकली 'संत सुरक्षा महारैली':

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  वर्ग-विग्रह फैलाने वाले संगठनों पर UAPA के तहत कार्रवाई, हेट स्पीच साहित्य को ब्लॉक करने और संतों के लिए सुरक्षित पदयात्रा मार्ग की मांग — आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी संतों को ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ घोषित करने की भी प्रमुख मांग — आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी “ये घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि योजनाबद्ध targeted killing हैं — ठंडे दिमाग से की गई प्रायोजित हत्या।” अहमदाबाद, 7 जून, 2025 जैन संतों की दुर्घटनाओं के नाम पर हो रही निर्मम हत्याओं के खिलाफ आज अहमदाबाद में हजारों की संख्या में श्वेत वस्त्रधारी जैन श्रद्धालुओं ने गहन पीड़ा, दुःख और आक्रोश के साथ एक विराट 'संत सुरक्षा महारैली' का आयोजन किया। इस रैली का नेतृत्व श्री तपागच्छ श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन महासंघ, अहमदाबाद तथा श्रमणि गणनायक पूज्य आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा., आचार्यश्री राजहंस सूरीजी म.सा., आचार्यश्री वितराग यश सूरीजी म.सा. ने किया। साथ ही आचार्यश्री उदयकीर्ति सागर सूरीजी, आचार्यश्री शीलरत्न सूरीजी, आचार्यश्री भव्यरत्न सूरीजी तथा मुनिश्री धूर्वीर विजयजी और मुनिश्री हंसबोधि विजयजी सहित 200 से अधिक...

मारवाड़ आँचल ने दिया करुणा का संदेश, बकरी ईद पर जीवदया के लिए ₹71,000 की भेंट

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  सूरत, 7 जून। सिवांची मालाणी क्षेत्र की प्रख्यात सामाजिक संस्था "मारवाड़ आँचल" ने बकरी ईद के अवसर पर करुणा और संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सहस्त्राफणा पार्श्वनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट को ₹71,000/- की सहयोग राशि प्रदान की है। यह राशि उस समय दी गई है जब देशभर में बकरी ईद के नाम पर मासूम बकरियों की बलि दी जाती है। ऐसे समय में संस्था द्वारा दी गई यह भेंट न केवल एक आर्थिक सहायता है, बल्कि यह एक सशक्त सामाजिक संदेश भी है कि हमे अबोल प्राणियों के प्रति दया, संवेदना और सुरक्षा का भाव रखना चाहिए। यह राशि ट्रस्ट द्वारा अवैध पशु तस्करी को रोकने, निर्दोष जानवरों को छुड़ाने और उन्हें सुरक्षित आश्रय स्थल में रखकर उनकी देखभाल के लिए उपयोग की जाएगी। सहस्त्राफणा ट्रस्ट पिछले 23 वर्षों से पशु कल्याण, जीवदया और अवैध पशु व्यापार के विरुद्ध जागरूकता फैलाने जैसे क्षेत्रों में सतत सक्रिय है। संस्था द्वारा अब तक सैकड़ों निरीह प्राणियों को बचाकर उन्हें जीवनदान दिया गया है। उनके शेल्टर में आज भी कई पशु सुरक्षित हैं, जिन्हें समय रहते मौत के मुंह से निकाला गया और अब उन्हें चिकित्सा, भोजन और ...

श्री अहमदाबाद कटलरी जनरल मर्चेंट एसोसियेशन द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन सम्पन्न.... थेलेसेमिया पीड़ित बालकों व सैनिकों की सेवार्थ 85 रक्त यूनिट एकत्रित ।

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  अहमदाबाद : नगर के श्री अहमदाबाद कटलरी जनरल मर्चेंट एसोसियेशन व भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान राजमेहता की पोल , टंकशाल में स्थित म्युनिसिपल शाला नंबर 12 में रक्तदान शिविर का आयोजन रखा गया । एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दिनेश जैन ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि एसोसिएशन के द्वारा समय समय पर जन सेवार्थ कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है उसी श्रृंखला में दि. 5 जून , गुरुवार को थेलेसेमिया पीड़ित बालकों के रक्षार्थ व सैनिकों की सेवार्थ रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 85 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर इस कार्यक्रम को सफल बनाया । दिनेश जैन ने बताया कि शिविर के माध्यम से न केवल रक्त एकत्रित किया गया बल्कि लोगों को थेलेसिमिया के प्रति जागरूक भी किया गया । एसोसिएशन के अध्यक्ष लच्छूभाई ने अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में स्वेच्छा से रक्तदान कर रक्त की कमी से ग्रसित बच्चों के जीवन रक्षा में अपना अपेक्षित योगदान देकर अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सजग हो। शिविर को सफल बनाने में अध्यक्ष लच्छूभाई के साथ दीपकभाई बजाज , दीपक किंगर, भरत प्रजापति, शरद भाई , अमितभाई देसाई, तेजशभाई शाह , मनीषभ...

🌳 *पार्क में चर्चा के दौरान जब कविता बनी चेतावनी और चर्चा बनी चुनौती* 🌳

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अशोक दोशी ✳️ संवाद लेखन अभिकल्पना विषय: देशद्रोह – पाकिस्तान की नापाक चालें और भारत की सुरक्षा पर जनचिंतन स्थल: एक हरियाली से भरा पार्क, शांत शाम का समय पात्र: अरविंद, चम्पालाल, बुधमलजी, अशोक, राजेन्द्र, गोयल, जखोटिया, कमलेश, प्रवीण, घेवरचंद, सरदारमल, रमेश अभिकल्पना: अशोक दोशी प्रतिकात्मक तस्वीर (पार्क में टहलने के बाद, बैंच पर बैठे कुछ सजग नागरिको मे चर्चा का दौर शुरु होता है) अरविंद: दोस्तों, देश एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। हालात दिन-ब-दिन तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लेकिन यह संतोष की बात है कि हमारा प्रशासन, हमारे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री और सबसे अहम – हमारी सेना, हर मोर्चे पर मजबूती से डटी हुई है। हर ललकार का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। चम्पालाल: बिलकुल सही कहा, अरविंद। ये पाकिस्तान – हमारा सरफिरा पड़ोसी – घात लगाकर बैठा है। कब, कहां और कैसे वार करे, कुछ कहा नहीं जा सकता। उस पर विश्वास तो दूर, उसकी हर हरकत ही धोखेबाज़ी की मिसाल है। अरविंद: पर हमें अपनी सेना पर अटूट भरोसा है। उनके साहस और समर्पण की मिसालें रोज़ नई ऊंचाई छू रही हैं। वे देश की रक्षा में एक भी आंच नहीं...

जैन साधु-संतों में समय के अनुसार बदलाव की ज़रूरत , एक गंभीर और चिंतनीय विषय

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हम सब जानते हैं कि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। मौसम बदलता है, माहौल बदलता है, इंसान की ज़रूरतें बदलती हैं। पहले का जमाना कुछ और था  गांवों की हवा शुद्ध थी, पानी साफ था, जीवन सरल था। लोग प्रकृति के पास रहते थे, दिन का जीवन दिन में ही पूरा हो जाता था, और शरीर भी साधारण मेहनत में ढल जाता था। पर आज शहरों में सब कुछ उल्टा हो गया है  तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, प्रदूषण, भीड़, गर्मी, भागदौड़ और तरह-तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें। ऐसे में अगर जैन समाज के लोग और बाकी दुनिया समय के साथ कुछ बातें बदल रही है, तो क्या यह सोचने का समय नहीं आ गया कि हमारे साधु-संतों के जीवन में भी कुछ बदलाव हों? यह बात बिल्कुल साफ है  धर्म के मूल सिद्धांत जैसे अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, सत्य  ये छुए नहीं जाने चाहिए। यही जैन धर्म की आत्मा हैं और यही हमें बाकी सबसे अलग भी बनाते हैं। पर व्यवहार में जो बातें समय के अनुसार बहुत कठिन और शरीर पर बोझ बन रही हैं, उस पर क्या थोड़ा सोच-विचार नहीं होना चाहिए? आज साधु-संत भीषण गर्मी में पदयात्रा करते हैं, बार‍िश में कीचड़ से भरे रास्तों पर चलते हैं, और कई बार स्...

नागदा और पँवार को धींग पुरस्कार

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  नागदा और पँवार को  धींग दम्पति उदयपुर।   साहित्यिक संस्था युगधारा के अंतर्गत वर्ष 2025 के कन्हैयालाल धींग राजस्थानी पुरस्कार के लिए साहित्यकार माधव नागदा (नाथद्वारा) एवं उमरावदेवी धींग साहित्योदय पुरस्कार के लिए शिक्षा विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी मीनाक्षी पँवार का चयन किया गया है। युगधारा संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने बताया कि ये प्रतिष्ठित पुरस्कार जैन दर्शन के विद्वान डॉ. दिलीप धींग के पिताजी एवं माताजी की स्मृति में क्रमशः 2005 एवं 2017 से निरंतर दिये जा रहे हैं। कन्हैयालाल धींग पुरस्कार के लिए चयनित नागदा की 15 पुस्तकें प्रकाशित हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी से पुरस्कार भी मिला। युवा श्रेणी में नवसृजन हेतु उमरावदेवी धींग पुरस्कार के लिए चयनित मीनाक्षी की पुस्तक राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित है। माधव नागदा मीनाक्षी पंवार अध्यक्ष किरणबाला ‘किरन’ ने बताया कि सदैव मेवाड़ी पाग धारण करने वाले सरलमना कन्हैयालालजी धींग (बाउसा) साहित्य प्रेमी एवं राजस्थानी भाषा व संस्कृति के आगीवाण थे। लोक परंपराओं की ज्ञाता उमरावदेवी धींग (बाईजी) को राजस्थानी-हि...

योगी आदित्यनाथ: एक संन्यासी से मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री पद के दावेदार तक का सफर

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  (जन्मदिन विशेष लेख) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीवन एक ऐसी कहानी है, जो गांव के एक सीधे-सादे लड़के से शुरू होकर देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री बनने और अब प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे तक पहुँचती है। आज उनका जन्मदिन है, और ये मौका है उनके संघर्ष, उनके फैसलों और उनके व्यक्तित्व को समझने का। योगी आदित्यनाथ का जन्म पांच जून 1972 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव पंचूर में हुआ। बचपन में उनका नाम था अजय सिंह बिष्ट। एक साधारण परिवार में जन्मे अजय बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में अच्छे और अनुशासन पसंद थे। उन्होंने बीएससी तक की पढ़ाई की और उसी दौरान उनका रुझान आध्यात्म की तरफ बढ़ता गया। जब वो गोरखपुर पहुंचे, तब उनकी मुलाकात हुई गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से, जो आगे चलकर उनके गुरु बने। उन्होंने संन्यास लिया और अजय बन गए योगी आदित्यनाथ। फिर शुरू हुआ एक नया सफर — पूजा-पाठ से जनसेवा तक का। अपने गुरु की इच्छा से उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1998 में मात्र 26 साल की उम्र में सांसद बन गए। तब से लेकर 2017 तक वे लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद रहे। योगी की राजनीति ...

शाहीबाग-गिरधरनगर जैन संघ में आदिनाथ जिनालय की 73वीं ध्वजारोहण संपन्न

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  श्री शाहीबाग-गिरधरनगर जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में श्री आदिनाथ जिनालय की 73वीं ध्वजा का समारोह अनेक पूज्य आचार्यों व साधु साध्वी म.सा. की पावन निश्रा में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रवचन देते हुए श्रमणीगणनायक पूज्य आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरिजी म.सा. ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि 72 वर्ष पूर्व संघ के स्थविर पूज्य श्री सिद्धिसूरिजी म.सा. साहब की प्रेरणा से इस जिनालय में आदिनाथ भगवान की प्रतिष्ठा हुई थी।  इस जिनालय को ‘श्री शत्रुंजय अवतार’ के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। धर्मसभा में पूज्य आचार्यश्री ने यह भी बताया कि दीक्षा-दानेश्वरी पूज्य आचार्य श्री गुणरत्नसूरिजी म.सा. की आचार्यपद दीक्षा तिथि और पूज्य पुण्य रेखाश्रीजी म.सा. की 71 वी जन्मतिथि भी आज ही के दिन है।  आगामी 7 जून शनिवार को 'चलो रेवा, जंगम तीर्थ की रक्षा हेतु महारैली ' का आयोजन रखा गया है। आचार्यश्री ने यह भी घोषणा की कि *9* जून को मुनि श्री भव्यरत्नविजयजी म.सा. के संयम जीवन के 10 वर्ष पूर्ण होने पर गिरधरनगर में पहली बार विशेष रूप से वाद्य-गाजे के साथ शास्त्रीय सामायिक का भव...

जैन समाज की पर्यावरण के प्रति नई सोच

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हर साल 5 जून आता है, सब जगह विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। कहीं भाषण होते हैं, कहीं रैली, कहीं सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट डालकर लोग सोचते हैं उन्होंने अपना कर्तव्य निभा दिया। लेकिन जैन समाज ने पर्यावरण को लेकर सोचने के साथ-साथ उसे जीना भी शुरू कर दिया है। अब सिर्फ बातों का नहीं, काम का ज़माना है – और यही करके दिखा रहा है जैन समाज। अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक युवक महासंघ ने एक ऐसा अनोखा अभियान चलाया है जिसने पेड़ लगाने को एक भावना बना दिया है। "एक पेड़, माँ के नाम" सिर्फ एक स्लोगन नहीं, अब यह एक संस्कार बन चुका है। कोई माँ के नाम पेड़ लगा रहा है, कोई बहन के नाम। कोई अपने विवाह की याद में तो कोई किसी की पुण्यतिथि पर। हर पौधा किसी की याद, किसी के प्यार और किसी भावना का प्रतीक बन गया है। शासन गौरव मुकेश चोपडा अहमदाबाद के शासन गौरव व कुल गौरव से सम्मानित समाजसेवी मुकेश चोपड़ा कहते हैं कि अगर पेड़ नहीं बचाए तो साँसें भी नहीं बचेंगी। धर्म का असली स्वरूप वही है जो जीवों के कल्याण में लगे, और पेड़ तो हजारों जीवों की आश्रयभूमि हैं। स्वतंत्र पत्रकार दिनेश सालेचा  मदु...

*कवि छगनलाल मुथा को मिला स्वर्णिम मां शारदा सम्मान*

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आर्या पब्लिकेशन के संपादक श्री सौरभ पाण्डेय द्वारा *स्वर्णिम दर्पण पत्रिका* के वार्षिक विशेषांक 2025 में आयोजित *विश्व के श्रेष्ठ कवि रत्न* में मुथा जी की अलौकिक रचना को स्थान देकर आपको *स्वर्णिम मां शारदा सम्मान* प्रदान किया गया है। मुथा जी ने आर्या पब्लिकेशन का आभार व्यक्त किया है।   मुथा जी ने सिर्फ 4 साल के अपने निवृत्त जीवन में अब तक 300 से भी ज्यादा कविताएं गीत लिख चुके हैं और उनकी सभी रचनाओं में कुछ न कुछ संदेश जरूर होता है।मुथा जी की स्व लिखीत कविता गीत संग्रह *निवृत्ति के पल कविता के संग* पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है जिसमें सभी विषयों पर 200 से ज्यादा कविताएं गीत हैं।

भायंदर में गूंजे ह्रींकारयश सूरीश्वरजी के भावभरे वचन – “संबंध कांच जैसे नाजुक, इंसान अवसरवादी और अंत में केवल बर्बादी”

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भायंदर, 4 जून – भायंदर के प्रतिष्ठित 52 जिनालय में आयोजित प्रवचनमाला के अंतर्गत पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री यशोवर्मा सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञा से उनके शिष्य पूज्य आचार्य श्री ह्रींकारयश सूरीश्वरजी म.सा. ने ऐसा भावपूर्ण प्रवचन दिया कि उपस्थित श्रद्धालु समाज की आंखें नम हो उठीं। उन्होंने अपने प्रवचन में संसार के सभी संबंधों, धन-संपत्ति और भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को उजागर करते हुए कहा कि यह सब कुछ नाशवान है। कब कौन अपना बनकर पीठ दिखा दे, इसका कोई भरोसा नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए छत्तीसगढ़ की हृदयविदारक घटना का उल्लेख किया जिसमें एक बेटे ने महज़ पैसों के लिए अपने ही पिता को गोली मार दी। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति मोह और विश्वास की सीमाएं लांघता है, तब जीवन विनाश की ओर बढ़ता है। एक युवक ने मात्र एक पुरानी चप्पल देखकर आत्महत्या कर ली, यह आधुनिक समाज की मानसिक स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा – “संबंध कांच जैसे नाजुक हैं, इंसान अवसरवादी है और अंत में बस बर्बादी ही शेष रह जाती है।” पूज्य आचार्यश्री ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि सत्ता, संपत्ति और संब...

बागरेचा परिवार को मिला दीक्षा का पावन मुहूर्त, अहमदाबाद शाहीबाग-गिरधरनगर संघ में गूंजी 'जैनम् जयति शासनम्' की गूंज

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  अहमदाबाद के शाहीबाग-गिरधरनगर जैन संघ का प्रांगण मंगलवार, 30 मई 2025 को एक ऐतिहासिक व आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब पूज्य श्रमणी गणनायक आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीजी म.सा. की निश्रा में गढ सिवाना निवासी बागरेचा परिवार को दीक्षा का पावन मुहूर्त प्रदान किया गया। पूज्य आचार्य श्री गुणरत्नसूरीजी म.सा. जैसे 451 दीक्षा दानेश्वरी  के चरणों में समर्पित, सूरी प्रेम-भुवनभानु समुदाय की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, आचार्य रश्मिरत्नसूरीजी म.सा. ने श्री सुरेशभाई पारसमलजी बागरेचा के सुपुत्र मुमुक्षु चारीत्रभाई, पुत्रवधू मुमुक्षु दीपिकाबेन और पौत्र मुमुक्षु शाश्वत को दीक्षा लेने का शुभ मुहूर्त मागसर सुद 10, दिनांक 30 नवम्बर 2025 के लिए प्रदान किया। मुहूर्त-पत्र जैसे ही पढ़ा गया, पूरा संघ “जैनम् जयति शासनम्” के गगनभेदी घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति और भावविभोर वातावरण में 108 युवक-युवतियों ने प्रेरणा पाकर 'भवआलोचना' पुस्तिका को अंगीकार करते हुए आत्मशुद्धि का संकल्प लिया। मुमुक्षु को इस अवसर पर विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया। तीनों मुमुक्षुओं के भावनापूर्ण एवं प्रभावशाली वक्...