जवान दिल की मौत,सूरत की घटना से जागिए, नहीं तो बहुत देर हो जाएगी

 

आजकल का वक्त बड़ा अजीब हो गया है। जो दिखते हैं सबसे तंदुरुस्त, वही अचानक दिल के दौरे से जिंदगी की जंग हार जाते हैं। जिम जाने वाले, फिट बॉडी रखने वाले, हंसते-खेलते नौजवान भी अब हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। ये सब देखकर मन डर जाता है  क्या अब जवान दिल भी सुरक्षित नहीं रहे?
सूरत में कल जो हुआ, उसने सबको झकझोर दिया। एक नौजवान लड़का, जिसकी हाल ही में सगाई हुई थी, अपनी दुकान पर बैठा था। कोई परेशानी नहीं, कोई तनाव नहीं  और तभी अचानक सीने में दर्द उठा। कुछ ही मिनटों में होश गया और कुछ ही देर में सांसें। जब तक अस्पताल पहुंचे, सब खत्म हो चुका था। जिस घर में शादी की प्लानिंग चल रही थी, वहाँ अब रोने की आवाज़ें हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन यह हर किसी के लिए एक चेतावनी है। आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में हमारा शरीर बाहर से तो चमक रहा है, लेकिन अंदर से रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूट रहा है। सुबह उठते ही फोन, रात को सोते वक्त तक स्क्रीन, बीच में जंक फूड, स्ट्रेस, नींद की कमी और जीरो फिजिकल एक्टिविटी — यह सब मिलकर हमारे दिल को चुपचाप थका रहे हैं।
फिटनेस का मतलब अब सिर्फ बॉडी दिखाना रह गया है। जिम में घंटों पसीना बहाने वाले युवा बिना किसी डॉक्टरी सलाह के पाउडर, सप्लीमेंट और स्टेरॉयड ले रहे हैं। दिल पर इनका असर दिखता नहीं, लेकिन एक दिन वो भी चुपचाप जवाब दे देता है।
तनाव की बात करें तो आजकल के युवा हर वक्त किसी न किसी टेंशन में रहते हैं  करियर, रिश्ते, पैसे, सोशल मीडिया पर कौन क्या कर रहा है  यह तुलना की आग अंदर ही अंदर सब जला रही है।
अब वक्त है सोचने का। अभी नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी। ज़िंदगी सिर्फ दिखावे की चीज़ नहीं, यह भीतर से संतुलित रहकर जीने की कला है। सादा खाना, पूरी नींद, रोज़ चलना, मुस्कुराना और तनाव को अलविदा कहना  यही असली फिटनेस है।
जो सूरत में हुआ, वो किसी भी शहर में, किसी भी घर में हो सकता है। इसलिए यह सिर्फ एक दुखद खबर नहीं, एक सीधी चेतावनी है — अपने दिल की सुनिए। अब दिखावे से ज़्यादा ज़रूरी है ज़िंदा रहना।
दिल अब सिर्फ धड़कना नहीं चाहता, वो चाहता है कि आप उसे समझें, उसकी सुनें और उसे वो आराम दें जिसकी उसे ज़रूरत है। क्योंकि अगर आज नहीं सुना, तो कल उसकी आवाज़ हमेशा के लिए बंद हो सकती है।
तो आज ही ठहरिए, सोचिए और संभलिए क्योंकि दिल जब टूटता है, तो बस सन्नाटा बचता है।

*दिनेश देवड़ा धोका




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