संयम जीवन के 10 साल पूरे – मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी की संयम दिवस की उजवणी
अहमदाबाद 9 जून 2025 सोमवार
आज से ठीक 10 साल पहले दिल्ली के बड़े उद्योगपति, 600 करोड़ की संपत्ति के मालिक श्री भंवरलाल दोशी ने सब कुछ छोड़कर दीक्षा ली और मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी बनकर संयम के रास्ते पर चल पड़े। आज उनके इस संयम जीवन को पूरे 10 साल हो गए, और इस मौके पर श्री गिरधर नगर जैन संघ मे एक खास शास्त्रीय सामायिक का आयोजन किया।
राजस्थान के सिरोही जिले के मंडार गांव में जन्मे भंवरलालजी ने B.Com तक पढ़ाई की और फिर दिल्ली में व्यापार शुरू किया। मेहनत और ईमानदारी से उन्होंने बड़ा व्यापार खड़ा किया और प्लास्टिक इंडस्ट्री में नाम कमाया। समाज सेवा और धर्म के कामों में भी हमेशा आगे रहे – चाहे दिल्ली की महावीर सभा हो, मंडार संघ या जीरावला ट्रस्ट, हर जगह उनकी अहम भूमिका रही। सिद्धवड़ नवाणु यात्रा से लेकर शंखेश्वर तीर्थ पर 1700 लोगों का उपधान करवाया हर काम में वे सबसे आगे थे।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, भौतिक चीज़ों की चमक फीकी लगने लगी और अंदर से वैराग्य जागा। सत्संग, स्वाध्याय और गुरुभक्ति से उन्होंने समझ लिया कि असली सफलता तो मुनि बनकर मोक्ष की राह पर चलने में है। और फिर, दस साल पहले अहमदाबाद के ग्राउंड में लाखों लोगों की मौजूदगी में उन्होंने संयम जीवन अपनाया।
उन्होंने दीक्षा लेकर मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी के रूप में नया जीवन शुरू किया। सालों से वे तप, त्याग, स्वाध्याय और साधना में लगे हैं। वर्षीतप, मासक्षमण जैसे कठिन व्रतों को करके उन्होंने आत्मा को निखारा है।
इस खास मौके पर श्री गिरधर नगर जैन संघ में हुआ कार्यक्रम बहुत भावभरा रहा। सभी श्रावक-श्राविकाएं सामायिक के वस्त्र पहनकर आए। आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीजी म.सा. की निश्रा में, चतुर्विध संघ के साथ मुनिश्री भव्यरत्न विजयजी ने अपने दस साल के संयम जीवन की यात्रा सबके साथ साझा की – कैसे वैराग्य जगा, कैसे उन्होंने दीक्षा ली और कैसे आज भी वे उसी तपस्या और साधना में लीन हैं।
उनकी बातों ने सबको छू लिया – यह समझ में आया कि अगर मन में सच्ची भावना हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है, चाहे वो कितनी भी दौलत वाला क्यों न हो।
मुनिश्री का ये 10 साल का सफर हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने दिखा दिया कि सच्चा सुख बाहर नहीं, भीतर है – और संयम, स्वाध्याय, और सत्संग से ही वो सुख पाया जा सकता है।
इस मौके पर पूरा संघ भाव-विभोर हो गया और सभी ने मुनिश्री के संयम जीवन की कोटि-कोटि अनुमोदना की।
समाचार संकलन:- दिनेश देवड़ा धोका





टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें