भायंदर में गूंजे ह्रींकारयश सूरीश्वरजी के भावभरे वचन – “संबंध कांच जैसे नाजुक, इंसान अवसरवादी और अंत में केवल बर्बादी”


भायंदर, 4 जून – भायंदर के प्रतिष्ठित 52 जिनालय में आयोजित प्रवचनमाला के अंतर्गत पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री यशोवर्मा सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञा से उनके शिष्य पूज्य आचार्य श्री ह्रींकारयश सूरीश्वरजी म.सा. ने ऐसा भावपूर्ण प्रवचन दिया कि उपस्थित श्रद्धालु समाज की आंखें नम हो उठीं। उन्होंने अपने प्रवचन में संसार के सभी संबंधों, धन-संपत्ति और भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को उजागर करते हुए कहा कि यह सब कुछ नाशवान है। कब कौन अपना बनकर पीठ दिखा दे, इसका कोई भरोसा नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए छत्तीसगढ़ की हृदयविदारक घटना का उल्लेख किया जिसमें एक बेटे ने महज़ पैसों के लिए अपने ही पिता को गोली मार दी। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति मोह और विश्वास की सीमाएं लांघता है, तब जीवन विनाश की ओर बढ़ता है। एक युवक ने मात्र एक पुरानी चप्पल देखकर आत्महत्या कर ली, यह आधुनिक समाज की मानसिक स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा – “संबंध कांच जैसे नाजुक हैं, इंसान अवसरवादी है और अंत में बस बर्बादी ही शेष रह जाती है।”

पूज्य आचार्यश्री ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि सत्ता, संपत्ति और संबंधों का यदि सदुपयोग किया जाए, तो वह कभी न कभी प्रभु से मिलाने का माध्यम बन सकते हैं। उनके प्रवचन के दौरान पूरे पांडाल में मौन व्याप्त हो गया, मानो हर श्रोता अपने भीतर झाँक रहा हो। इस अवसर पर उन्होंने आने वाले ऐतिहासिक क्षण की भी घोषणा की, जब भायंदर जैन समाज में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अब भायंदर वह पहला नगर बनने की ओर अग्रसर है, जहां शंखेश्वर पार्श्वनाथ दादा के दो-दो 52 जिनालय होंगे। वेंडरमीर संकुल में बनने वाले भव्य, सर्वतोभद्र, चतुर्मुखी 52 जिनालय का भूमिपूजन समारोह 8 जून को संपन्न होगा। इससे एक दिन पूर्व, 7 जून को रत्नमयी 24 तीर्थंकर प्रभुओं की  प्रतिमाओ का मंगल प्रवेश तथा प्रतिष्ठा के चढ़ावे प्लानेटेरिया कॉम्प्लेक्स में संपन्न होंगे।

आगामी दिनों में प्रवचनों की श्रृंखला भी जारी रहेगी, जिसमें 4 जून को सुबह 9 बजे बालाजी कॉम्प्लेक्स, 6 जून को प्रातः 7 बजे श्री सीमंधर स्वामी जिनालय तथा सुबह 9:30 बजे वालचंद दर्शन स्थित श्री महावीर स्वामी जिनालय में प्रवचन होंगे। पूज्य गुरुदेव श्री यशोवर्मा सूरीश्वरजी म.सा. की प्रेरणा से जैन समाज में जो अध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक चेतना उत्पन्न हो रही है, वह अनुकरणीय है। भायंदर जैन समाज की सक्रियता, श्रद्धा और संगठन शक्ति ने इस आयोजन को न केवल भव्य रूप दिया है, बल्कि पूरे भारत के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

– विशेष संवाददाता
दिनेश देवड़ा धोका



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