नागदा और पँवार को धींग पुरस्कार

 नागदा और पँवार को 


धींग दम्पति


उदयपुर।  
साहित्यिक संस्था युगधारा के अंतर्गत वर्ष 2025 के कन्हैयालाल धींग राजस्थानी पुरस्कार के लिए साहित्यकार माधव नागदा (नाथद्वारा) एवं उमरावदेवी धींग साहित्योदय पुरस्कार के लिए शिक्षा विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी मीनाक्षी पँवार का चयन किया गया है। युगधारा संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने बताया कि ये प्रतिष्ठित पुरस्कार जैन दर्शन के विद्वान डॉ. दिलीप धींग के पिताजी एवं माताजी की स्मृति में क्रमशः 2005 एवं 2017 से निरंतर दिये जा रहे हैं। कन्हैयालाल धींग पुरस्कार के लिए चयनित नागदा की 15 पुस्तकें प्रकाशित हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी से पुरस्कार भी मिला। युवा श्रेणी में नवसृजन हेतु उमरावदेवी धींग पुरस्कार के लिए चयनित मीनाक्षी की पुस्तक राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित है।

माधव नागदा
मीनाक्षी पंवार

अध्यक्ष किरणबाला ‘किरन’ ने बताया कि सदैव मेवाड़ी पाग धारण करने वाले सरलमना कन्हैयालालजी धींग (बाउसा) साहित्य प्रेमी एवं राजस्थानी भाषा व संस्कृति के आगीवाण थे। लोक परंपराओं की ज्ञाता उमरावदेवी धींग (बाईजी) को राजस्थानी-हिंदी के सैकड़ों गीत, भजन, लावणियाँ आदि कंठस्थ थे। उनकी विलक्षण श्रद्धा पर आचार्य आनंदऋषि, आचार्य देवेन्द्रमुनि, उपाध्याय कस्तूरचंदजी महाराज आदि अनेक साधु-साध्वी भी प्रमुदित हुए थे। लोक संस्कृति के विद्वान डॉ. महेन्द्र भानावत ने उनकी एक किताब बाईजी को समर्पित की थी। युवाचार्य मधुकरमुनि जन्म शताब्दी वर्ष 2013 में उन्हें जोधपुर में उमरावदेवी को राष्ट्रीय स्तर पर श्राविकारत्न अलंकरण से नवाजा गया था। बाईजी और बाउसा की याद में ये पुरस्कार अब तक 27 साहित्यकारों को समारोहपूर्वक दिए जा चुके हैं। पुरस्कार

उदयपुर।  
साहित्यिक संस्था युगधारा के अंत

र्गत वर्ष 2025 के कन्हैयालाल धींग राजस्थानी पुरस्कार के लिए साहित्यकार माधव नागदा (नाथद्वारा) एवं उमरावदेवी धींग साहित्योदय पुरस्कार के लिए शिक्षा विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी मीनाक्षी पँवार का चयन किया गया है। युगधारा संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने बताया कि ये प्रतिष्ठित पुरस्कार जैन दर्शन के विद्वान डॉ. दिलीप धींग के पिताजी एवं माताजी की स्मृति में क्रमशः 2005 एवं 2017 से निरंतर दिये जा रहे हैं। कन्हैयालाल धींग पुरस्कार के लिए चयनित नागदा की 15 पुस्तकें प्रकाशित हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी से पुरस्कार भी मिला। युवा श्रेणी में नवसृजन हेतु उमरावदेवी धींग पुरस्कार के लिए चयनित मीनाक्षी की पुस्तक राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित है।

अध्यक्ष किरणबाला ‘किरन’ ने बताया कि सदैव मेवाड़ी पाग धारण करने वाले सरलमना कन्हैयालालजी धींग (बाउसा) साहित्य प्रेमी एवं राजस्थानी भाषा व संस्कृति के आगीवाण थे। लोक परंपराओं की ज्ञाता उमरावदेवी धींग (बाईजी) को राजस्थानी-हिंदी के सैकड़ों गीत, भजन, लावणियाँ आदि कंठस्थ थे। उनकी विलक्षण श्रद्धा पर आचार्य आनंदऋषि, आचार्य देवेन्द्रमुनि, उपाध्याय कस्तूरचंदजी महाराज आदि अनेक साधु-साध्वी भी प्रमुदित हुए थे। लोक संस्कृति के विद्वान डॉ. महेन्द्र भानावत ने उनकी एक किताब बाईजी को समर्पित की थी। युवाचार्य मधुकरमुनि जन्म शताब्दी वर्ष 2013 में उन्हें जोधपुर में उमरावदेवी को राष्ट्रीय स्तर पर श्राविकारत्न अलंकरण से नवाजा गया था। बाईजी और बाउसा की याद में ये पुरस्कार अब तक 27 साहित्यकारों को समारोहपूर्वक दिए जा चुके हैं।

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