मारवाड़ आँचल ने दिया करुणा का संदेश, बकरी ईद पर जीवदया के लिए ₹71,000 की भेंट
सूरत, 7 जून।
सिवांची मालाणी क्षेत्र की प्रख्यात सामाजिक संस्था "मारवाड़ आँचल" ने बकरी ईद के अवसर पर करुणा और संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सहस्त्राफणा पार्श्वनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट को ₹71,000/- की सहयोग राशि प्रदान की है। यह राशि उस समय दी गई है जब देशभर में बकरी ईद के नाम पर मासूम बकरियों की बलि दी जाती है। ऐसे समय में संस्था द्वारा दी गई यह भेंट न केवल एक आर्थिक सहायता है, बल्कि यह एक सशक्त सामाजिक संदेश भी है कि हमे अबोल प्राणियों के प्रति दया, संवेदना और सुरक्षा का भाव रखना चाहिए।
यह राशि ट्रस्ट द्वारा अवैध पशु तस्करी को रोकने, निर्दोष जानवरों को छुड़ाने और उन्हें सुरक्षित आश्रय स्थल में रखकर उनकी देखभाल के लिए उपयोग की जाएगी। सहस्त्राफणा ट्रस्ट पिछले 23 वर्षों से पशु कल्याण, जीवदया और अवैध पशु व्यापार के विरुद्ध जागरूकता फैलाने जैसे क्षेत्रों में सतत सक्रिय है। संस्था द्वारा अब तक सैकड़ों निरीह प्राणियों को बचाकर उन्हें जीवनदान दिया गया है। उनके शेल्टर में आज भी कई पशु सुरक्षित हैं, जिन्हें समय रहते मौत के मुंह से निकाला गया और अब उन्हें चिकित्सा, भोजन और सुरक्षा का पूरा वातावरण मिल रहा है।
"मारवाड़ आँचल" का कार्यक्षेत्र केवल अबोल प्राणियों की रक्षा तक सीमित नहीं है, यह संस्था समाज के उन वर्गों के लिए भी कार्य कर रही है जो अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। गर्मियों के मौसम में संस्था द्वारा गरीब बच्चों को चप्पलें वितरित की जाती हैं ताकि उनके नंगे पांवों को राहत मिल सके। त्योहारों के समय निर्धन परिवारों को मिठाई, नमकीन व जरूरत की चीजों से सजे “खुशियों के बॉक्स” दिए जाते हैं, जिससे वे भी त्योहार की रौनक और मिठास का अनुभव कर सकें। यह पहल केवल भौतिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है।
संस्था के प्रेरणास्रोत अरुण कानूंगा ने इस अवसर पर कहा कि हमारे शास्त्रों में जीव मात्र को आत्मा माना गया है, और जीवदया को सर्वोच्च धर्म। जब किसी निरीह जानवर की जान बचाई जाती है, वह किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या दान से कहीं अधिक पुण्यकारी होता है। बकरी ईद जैसे अवसरों पर जहां चारों ओर बलि का वातावरण होता है, वहां यदि एक भी प्राणी की जान बचाई जाए, तो वह सच्चे धर्म का आचरण है।
सहस्त्राफणा ट्रस्ट ने मारवाड़ आँचल संस्था का आभार जताते हुए इस सहयोग राशि को पूर्ण पारदर्शिता के साथ अबोल प्राणियों के कल्याण में उपयोग करने का आश्वासन दिया। ट्रस्ट ने इसे सिर्फ एक राशि नहीं, बल्कि करुणा, दया और अहिंसा का जीवंत प्रतीक बताया।
यह संपूर्ण पहल एक संदेश देती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल बड़े आंदोलनों की आवश्यकता नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संवेदनशील प्रयासों की भी बड़ी भूमिका होती है। मारवाड़ आँचल और अरुण कानूंगा जैसे व्यक्तित्व समाज में उन मूल्यों की अलख जगा रहे हैं जिनसे मानवीयता की लौ हमेशा जलती रहे।
यह कार्य केवल अनुमोदना योग्य नहीं, बल्कि अनुकरणीय है। करुणा जब कर्म में बदलती है, तो वह समाज के चेहरे पर मुस्कान बनकर उभरती है।


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