जैन संतों की दुर्घटनाओं की आड़ में हो रही निर्मम हत्याओं के विरोध में अहमदाबाद में निकली 'संत सुरक्षा महारैली':
वर्ग-विग्रह फैलाने वाले संगठनों पर UAPA के तहत कार्रवाई, हेट स्पीच साहित्य को ब्लॉक करने और संतों के लिए सुरक्षित पदयात्रा मार्ग की मांग — आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी
संतों को ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ घोषित करने की भी प्रमुख मांग — आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी
“ये घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि योजनाबद्ध targeted killing हैं — ठंडे दिमाग से की गई प्रायोजित हत्या।”
अहमदाबाद, 7 जून, 2025
जैन संतों की दुर्घटनाओं के नाम पर हो रही निर्मम हत्याओं के खिलाफ आज अहमदाबाद में हजारों की संख्या में श्वेत वस्त्रधारी जैन श्रद्धालुओं ने गहन पीड़ा, दुःख और आक्रोश के साथ एक विराट 'संत सुरक्षा महारैली' का आयोजन किया। इस रैली का नेतृत्व श्री तपागच्छ श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन महासंघ, अहमदाबाद तथा श्रमणि गणनायक पूज्य आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा., आचार्यश्री राजहंस सूरीजी म.सा., आचार्यश्री वितराग यश सूरीजी म.सा. ने किया। साथ ही आचार्यश्री उदयकीर्ति सागर सूरीजी, आचार्यश्री शीलरत्न सूरीजी, आचार्यश्री भव्यरत्न सूरीजी तथा मुनिश्री धूर्वीर विजयजी और मुनिश्री हंसबोधि विजयजी सहित 200 से अधिक संत- संतावृंद इस गंभीर और भावनात्मक वातावरण में उपस्थित रहे।
यह रैली श्री रेवा जैन संघ, वासणा से प्रारंभ होकर धरनीधर चौराहा, महालक्ष्मी पंचरास्ता, पालड़ी मार्ग होते हुए प्रीतमनगर अखाड़ा में एक विराट सभा में परिणत हुई। सभा के दौरान भारत के माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित विस्तृत ज्ञापन भी प्रस्तुत किया गया, जिसका सार्वजनिक पठन किया गया।
ज्ञापन में यह स्पष्ट कहा गया कि पंचम काल में जब संपूर्ण समाज भोग-विलास की दौड़ में व्यस्त है, ऐसे समय में जैन संत अपने जीवन की समस्त सुविधाओं का त्याग कर जन-जन के कल्याण हेतु कठोर तपस्या, ज्ञान और साधना कर रहे हैं। ऐसे तपस्वी, त्यागी और वैराग्यशील संतों पर हो रही “दुर्घटना के नाम पर हत्याएं” न केवल समाज को व्यथित कर रही हैं, बल्कि समूचे धर्म-प्रेमी जगत को गहरा आघात पहुँचा रही हैं।
रैली को संबोधित करते हुए आचार्यश्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि हाल ही में राजस्थान के पाली जिले में आचार्यश्री पूंडरीकरत्न सूरीजी, गुजरात के बड़ौली में मुनिश्री अभिनंदनजी, भरुच के पास महासतीजी तथा अन्य कई जैन संतों की संदिग्ध दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई। इन सभी घटनाओं में एक जैसी कार्यप्रणाली (modus operandi) देखी गई — चालक को कोई चोट नहीं आती, वाहन को क्षति नहीं होती, और वाहन संत को कुचलकर फरार हो जाता है। ये महज़ दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि targeted killing और योजनाबद्ध sponsored murders हैं।
उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि रैली की प्रमुख मांग है कि भारत सरकार जैन संतों को 'राष्ट्रीय संपत्ति' (National Asset) घोषित करे, जिससे उनकी सुरक्षा हेतु एक सशक्त कानूनी और नैतिक आधार सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा उन्होंने मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन हो, जो इन घटनाओं की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच कर सके।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने हेतु इन मामलों को राज्य की राजधानी में फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए। जैन धर्म व संतों के विरुद्ध घृणा फैलाने वाले संगठनों पर गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की जाए। ऐसे तत्वों के हैंडलर, आर्थिक व तकनीकी समर्थन देने वाले, और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले सभी तत्वों को चिन्हित कर उनके अड्डों को ध्वस्त किया जाए और उनके अकाउंट्स, वेबसाइट्स व डिजिटल सामग्री को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाए।
आचार्यश्री ने यह भी मांग रखी कि पदयात्रा कर रहे संतों की सुरक्षा हेतु अलग और सुरक्षित पदयात्रा मार्ग (Pedestrian Pathways) बनवाए जाएं, जिससे ऐसे जानलेवा हादसों से बचाव हो सके। साथ ही, व्यापक जन-जागरण अभियान चलाकर समाज में यह भावना स्थापित की जाए कि “संत राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी आग्रह किया कि स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में जैन संतों के त्यागमय जीवन और उनके राष्ट्र निर्माण में दिए योगदान को शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि जैन संत न केवल आध्यात्मिक प्रेरणा के स्रोत हैं, बल्कि आपदा राहत, व्यसन मुक्ति, और नैतिकता के प्रचार जैसे अनेकों सेवाकार्य उनके नेतृत्व में संचालित होते हैं। ऐसे मौन राष्ट्रसेवकों की रक्षा करना राष्ट्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अंत में जैन समाज ने सरकार से अपील की कि वह इस अत्यंत गंभीर मामले में तुरंत संज्ञान ले, दोषियों को कठोरतम सजा दिलवाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए।




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