*कुछ लोगो को बड़े कार्यक्रम जाना उचित लगा वहा कमलेशजी को सेवा कार्य ज्यादा जरूरी लगा।*

 



अहमदाबाद:-

भगवान महावीर जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर सिवाना सेवा समिति द्वारा आयोजित जीवदया और मानव सेवा के कार्यों में कमलेश श्रीश्रीमाल का नाम आज एक मिसाल बनकर सामने आया है, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से हर धार्मिक और सामाजिक कार्य में तन, मन और धन से समर्पित रहते आए हैं; इस बार भी उन्होंने पूरे जोश और जिम्मेदारी के साथ सेवा कार्यों को संभाला, लेकिन उनकी सच्ची पहचान तब सामने आई जब एक ओर कोबा स्थित  *म्यूजियम* के भव्य उद्घाटन समारोह में उनका जाना तय था, जहां देश के प्रधानमंत्री सहित कई बड़े और नामी लोग मौजूद रहने वाले थे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उस बड़े मंच, भीड़ और दिखावे से दूर रहकर सेवा के इस छोटे लेकिन पुण्य कार्य को ज्यादा महत्व दिया और समिति के साथ रहकर जीवदया और मानव सेवा में जुटे रहे।



आज के समय में जहां कई लोग बड़े कार्यक्रमों में दिखने और फोटो खिंचवाने को ही अपनी उपलब्धि मान लेते हैं, वहीं ऐसे सेवा कार्यों से दूर रहना ही आसान रास्ता समझते हैं, वहां कमलेश श्रीश्रीमाल का यह निर्णय एक करारा जवाब है कि असली पहचान मंच पर नहीं, बल्कि सेवा में बनती है; असली संतोष तालियों से नहीं, बल्कि किसी के काम आने से मिलता है।



सिवाना सेवा समिति के अध्यक्ष और सचिव ने भी उनके इस समर्पण की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे कार्यकर्ता ही संस्था की असली ताकत होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के हर कार्य को सफल बनाते हैं। कमलेश श्रीश्रीमाल का यह कदम न केवल सराहनीय है, बल्कि उन लोगों के लिए एक आईना भी है, जो सेवा से ज्यादा दिखावे को महत्व देते हैं वास्तव में यह एक ऐसा संदेश है, जिससे सभी को सीख लेने की जरूरत है कि सच्चा धर्म और सच्ची पहचान हमेशा सेवा से ही बनती है।



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