ज्ञान पंचमी पर आचार्य यशोवर्मसूरीजी ने दिया जीवन को दिशा देने वाला संदेश – जो ज्ञान अहंकार मिटाए वही सच्चा ज्ञान है
नवी मुंबई (दिनेश देवड़ा धोका)
नवी मुंबई में पूज्य आचार्य श्रीमद विजय यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में ज्ञान पंचमी का कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के माहौल में संपन्न हुआ। आचार्यश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि ज्ञान का मतलब केवल पढ़ाई या शास्त्रों का रटना नहीं, बल्कि यह समझ होना है कि कब क्या करना चाहिए और कब क्या नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उपाध्याय श्री यशोविजयजी महाराज ने सैकड़ों वर्ष पहले ज्ञान की जो व्याख्या की थी, वह आज भी उतनी ही सार्थक है। सच्चा ज्ञान वही है जो हमें भगवान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे, हमारे अंदर के राग-द्वेष और अहंकार को मिटाए, और हमारे जीवन में विनम्रता लाए। जो ज्ञान हमें दूसरों से ऊँचा दिखाने की भावना दे, वह असली ज्ञान नहीं, बल्कि अहंकार है।
आचार्यश्री ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि दो पंडित यज्ञ में आमंत्रित हुए थे, पर दोनों ने एक-दूसरे की निंदा की। जब भोजन का समय आया तो यजमान ने एक को घास और दूसरे को कूटी हुई रोटी परोसी, क्योंकि उन्होंने एक-दूसरे का ऐसा ही परिचय दिया था। दोनों पंडित लज्जित हो गए। आचार्यश्री ने कहा कि जो ज्ञान किसी की बुराई करवाए, वह ज्ञान नहीं बल्कि अज्ञान है। सच्चा ज्ञानी वही होता है जो नम्रता, करुणा और विवेक से भरा हो।
इस अवसर पर नए उपाश्रय का अनावरण किया गया, जहां श्रद्धालु जय-जयकार के साथ आनंदित हो उठे। आचार्यश्री ने युवाओं के लिए हर शुक्रवार सुबह 7 से 8 बजे तक विशेष सूत्रज्ञान क्लास की प्रेरणा दी और कहा कि बच्चों को भी पाठशाला से जोड़ना बहुत जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी धर्म और ज्ञान की सही दिशा में आगे बढ़े।
रोजाना सुबह 9:15 बजे से प्रवचन का आयोजन रहेगा।
ज्ञान पंचमी के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु आचार्यश्री के ज्ञानमय प्रवचनों से प्रेरित होकर सच्चे ज्ञान और विनम्रता को जीवन में अपनाने का संकल्प लेकर लौटे।

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