_गपशप की पाठशाला_दिनेश दोशी_
_फुर्सत की घड़ी, बातों की लड़ी,
हल्का-फुल्का,मन रसीला।_
_हँसी की फुहार,किस्सों की डोली,
जुड़ते हैं दिल,बनते हम जोली।_
_मन बहलाए, पल को सुहाना,
अपनों से बातें, याराना पुराना।_
_कभी खबर नई, कभी याद पुरानी,
जीवन में लाए रंगत सयानी।_
_मगर ध्यान रहे, सीमा न लांघे,
किसी के भी दिल पर तीर न साधे।_
_चुगली की धूल, बुराई का कुआँ,
कर दे रिश्तों को पल में धुआँ।_
_समय अनमोल है,इसे न खोना,
बेकार की बातों में कभी न जाना।_
_सकारात्मक हो हर एक चर्चा,
जीवन में आए आनंद की वर्षा।_
_गपशप है मीठी सी एक धारा,
मन को सुकून दे,लाए उजियारा_
_गपशप है जिंदगी का एक हिस्सा,
बिना उसके नीरस है किस्सा_
_गपशप से तनाव कम होता,
बिना उसके गम दूर न होता_
_चुगली से परहेज़ कभी किसी का
चमन न उजड़े, इसका ख्याल रखना_
_यही है गपशप की परिभाषा,
कभी तोला कभी माशा_
_हँसी और ज्ञान का हो संगम,
जीवन बने एक सुंदर सरगम।_
_✍🏻दिनेश दोशी_


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